जयपुर। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि राजस्थान विधानसभा के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा के ऐतिहासिक उत्सव के अवसर पर वर्ष पर्यन्त चार बड़े कार्यक्रम होंगे।
देवनानी ने शुक्रवार को राज्य विधान सभा भवन जयपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में विधानसभा अमृत महोत्सव के सम्बंध में कई अहम जानकारियाँ दी। उन्होंने बताया कि राज्य विधानसभा के अमृत महोत्सव कार्यक्रमों की शुरूआत 15 जुलाई से होगी जिसमें उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन और लोकसभा स्पीकर ओम बिरला भाग लेगे तथा वे राजस्थान की प्रथम विधानसभा से मौजूदा सोलहवीं विधानसभा तक के पूर्व एवं वर्तमान सदस्यों और प्रदेश के सांसदों के विशाल सम्मेलन को सम्बोधित करेंगे ।
विधानसभाध्यक्ष ने बताया कि इस ऐतिहासिक सम्मेलन में लोकतंत्र की यात्रा, विधायी परंपराओं, सदन की गरिमा, संसदीय अनुभवों, चुनौतियों और विधानसभा के डिजिटल रूपांतरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी। साथ ही पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, उपाध्यक्षों और वरिष्ठतम विधायकों का विशेष सम्मान किया जाएगा।
स्पीकर देवनानी ने बताया कि समारोह में राजस्थान और पंजाब के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े और गुलाब चंद कटारिया,मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, प्रतिपक्ष के नेता टीकाराम जूली के साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुन्धरा राज, सभी पूर्व विधानसभाध्यक्ष, उपाध्यक्ष, राजस्थान के सभी 200 वर्तमान विधायक और 495 पूर्व विधायकों के साथ ही राजस्थान के सभी 35 सांसदों (लोकसभा में 25 और राज्यसभा में 20 सांसद ) सहित अन्य विशिष्ट अतिथियों को भी आमंत्रित किया गया है। उन्होंने कहा कि यह भव्य समागम भारतीय संसदीय लोकतंत्र का गौरवशाली उत्सव होगा, जिसमें अनुभव, परंपरा, नवाचार, महिला शक्ति, युवा ऊर्जा और जनविश्वास का अद्भुत समन्वय दिखाई देगा।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने बताया कि 'राजस्थान विधानसभा' अपने गौरवशाली कार्यकाल के 75 वर्ष पर ऐतिहासिक अमृत महोत्सव मना रही है। इस मील के पत्थर को अविस्मरणीय बनाने के लिए 15 जुलाई, 2026 को राज्य विधानसभा के विशाल सदन में यह भव्य और गरिमामय अमृत महोत्सव समारोह आयोजित किया जा रहा है जिसके उद्घाटन सत्र में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि समापन समारोह में राज्यसभा के सभापति एवं भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी।
*पूर्व विधानसभाध्यक्षों एवं वरिष्ठ विधायकों का होगा सम्मान*
देवनानी ने बताया कि समारोह में पूर्व विधानसभा अध्यक्षों, पूर्व उपाध्यक्षों, छह या उससे अधिक बार निर्वाचित पूर्व विधायकों तथा वर्तमान विधायकों का सम्मान किया जाएगा। यह सम्मान राजस्थान की लोकतांत्रिक परंपरा को समृद्ध करने वाले जनप्रतिनिधियों के योगदान के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक होगा।
उन्होंने बताया कि समारोह में पूर्व विधानसभाध्यक्ष शांतिलाल चपलोत, सुमित्रा सिंह, दीपेन्द्र सिंह शेखावत, कैलाश चन्द मेघवाल, डॉ. सी.पी. जोशी तथा पूर्व उपाध्यक्ष तारा भण्डारी, रामनारायण मीणा एवं राव राजेन्द्र सिंह को सम्मानित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त छह या उससे अधिक बार विधानसभा के सदस्य रहे वरिष्ठ नेताओं तथा वर्तमान में निर्वाचित वरिष्ठ विधायकों का भी सम्मान किया जाएगा।
छह या अधिक बार के पूर्व विधायकों में वरिष्ठतम पूर्व विधायक और पूर्व स्पीकर सुमित्रा सिंह (9 बार की विधायक ), पंजाब के राज्यपाल गुलाब चन्द कटारिया (8 बार), प्रद्युम्न सिंह (8 बार), नारायण सिंह (7 बार), देवी सिंह भाटी (7 बार), राजेन्द्र राठौड़ (7 बार), सांसद घनश्याम तिवाड़ी (6 बार), हेमाराम चौधरी (6 बार), और डॉ. बी.डी. कल्ला (6 बार) सहित 14 दिग्गजों को सम्मानित किया जाएगा। सदन के वर्तमान सदस्यों में कालीचरण सराफ (8 बार), डॉ. दयाराम परमार (7 बार), प्रताप सिंह सिंघवी (7 बार) के साथ-साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वसुन्धरा राजे (6 -6 बार), कैबिनेट मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा (6 बार) और मदन दिलावर (6 बार) सहित 10 वर्तमान विधायकों का अभिनंदन होगा।
*23 ऐतिहासिक कानूनों पर होगीं विशेष चर्चा*
विधानसभाध्यक्ष ने बताया कि अमृत महोत्सव के प्रथम कार्यक्रम में राजस्थान की विभिन्न विधानसभाओं में पारित 23 महत्वपूर्ण कानूनों पर विशेष चर्चा कराई जाएगी। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, पूर्व उपाध्यक्ष और पूर्व मंत्री इन कानूनों के सामाजिक एवं प्रशासनिक प्रभावों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। इनमें राजस्थान भूमि सुधार एवं जागीर पुनर्ग्रहण अधिनियम, 1952, राजस्थान जमींदारी एवं बिस्वेदारी उन्मूलन अधिनियम, 1959, राजस्थान पंचायत समिति एवं जिला परिषद अधिनियम, 1959, राजस्थान प्राथमिक शिक्षा अधिनियम, 1964, राजस्थान लोकायुक्त एवं उप लोकायुक्त अधिनियम, 1973, राजस्थान सूचना का अधिकार अधिनियम, 2001, राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम, 2011 सहित अन्य महत्वपूर्ण कानून शामिल हैं। श्री देवनानी ने कहा कि इन कानूनों ने राजस्थान के सामाजिक परिवर्तन, प्रशासनिक सुधार, शिक्षा विस्तार, पारदर्शिता और जनकल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अमृत महोत्सव के माध्यम से इन ऐतिहासिक निर्णयों की प्रासंगिकता और वर्तमान संदर्भों पर भी चर्चा की जाएगी।
*समारोह का होगा सजीव प्रसारण*
देवनानी ने बताया कि अमृत महोत्सव के प्रथम कार्यक्रम का सजीव प्रसारण राजस्थान विधानसभा के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा, ताकि प्रदेश और देश के नागरिक इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बन सकें। विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने बताया कि यह आयोजन न केवल मरुधरा के विधायी इतिहास, वर्तमान और भविष्य को एक सूत्र में पिरोने वाला राष्ट्रीय उत्सव होगा, बल्कि इसमें सात दशकों की लोकतांत्रिक यात्रा के अनुभवों, नवाचारों और संसदीय परंपराओं का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
*अमृत महोत्सव के चार प्रमुख कार्यक्रम एक वर्ष तक चलेंगे*
देवनानी ने बताया कि राजस्थान विधानसभा के 75वें वर्ष पर पूरे एक वर्ष तक अमृत महोत्सव के तहत चार प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे जिनमें एक में देश भर की महिला जन प्रतिनिधियों और एक में युवाओं को आमंत्रित करना प्रस्तावित है। अमृत महोत्सव का समापन अगले वर्ष राजस्थान स्थापना दिवस पर होगा। अमृत महोत्सव कार्यक्रमों के लिए देश के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और अन्य विशेष अतिथियों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने बताया कि इन कार्यक्रमों में संसदीय एवं संविधान विशेषज्ञों के विशेष सत्र आयोजित होंगे, जिनमें लोकतंत्र की मजबूती, विधायी प्रक्रिया और संवैधानिक मूल्यों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि जन-आकांक्षाओं की संवाहिका और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षक राजस्थान विधानसभा की गौरवशाली यात्रा अनुभव और जनसेवा की 75 वर्षों की अविस्मरणीय गाथा है।सात दशकों से अधिक की इस यात्रा में राजस्थान के विकास, सामाजिक समरसता और बुनियादी सुधारों को गति देने में सदन के प्रत्येक कालखंड के सदस्यों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। विधानसभा ने समय-समय पर ऐसे निर्णय लिए हैं, जिन्होंने प्रदेश के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक विकास की मजबूत आधारशिला रखी है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विधानसभा का अमृत महोत्सव लोकतांत्रिक परंपराओं, विधायी उपलब्धियों और जनसेवा के संकल्प का उत्सव है। यह आयोजन अतीत के अनुभवों, वर्तमान की उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य करेगा।