इस "सेमोथेरेपी" की शुरुआत प्राचीन मिस्र में हुई थी बाद में इसे यूनानियों ने अपना लिया था , यह एक पारंपरिक और प्राकृतिक उपचार पद्धति है, यूनानी में इसे "सैमोथेरेपी" कहा गया इसे यूनानी शब्द "सामोस" से लिया गया जिसका अर्थ होता है "रेत" यानि इसे "रेत हम्माम" या "रेत स्नान" भी कहते हैं। यह चिकित्सा के रूप में गर्म रेत में शरीर को दबाकर दर्द, विषहरण और रक्त संचार में सुधार करने वाली पारंपरिक चिकित्सा है।
प्रक्रिया__सूरज की धूप से प्राकृतिक रूप से गर्म हुई रेत का उपयोग किया जाता है। गर्म रेत में एक उथला गड्ढा खोदा जाता है। फ़िर गड्ढे में पीठ के बल लिटाए जाते हैं और उन्हें गर्दन तक रेत से ढक दिया जाता है। इस प्रक्रिया में 15 से 30 मिनट तक का समय लगता हैं। रेत की गर्मी में पूरी तरह से ढके होने के कारण, शरीर से बहुत ज़्यादा पसीना निकलने लगता है। थोड़ी देर बाद शरीर ठंडा होने लगता है, जब तय समय पूरा हो जाता है तब उन्हें एक गर्म कंबल में लपेट दिया जाता है। व्यक्ति रेत में सिर्फ़ दो से पाँच मिनट ही रह पाता हैं इसलिए बाहर निकाल कर उसे कम्बल में लपेट दिया जाता हैं। लगभग 45 मिनट तक कंबल में आराम से लपेट कर रखा जाता हैं, इस दौरान पसीना और बची हुई रेत मिलकर उनकी त्वचा पर कीचड़ जैसी एक परत बन जाती हैं। बाद में इस कीचड़ को नहाकर साफ़ कर लिया जाता है, तब यह उपचार पूरा हो जाता हैं। इसके बाद भी यदि चाहें तो दूसरे गड्ढे में दोबारा जाकर इस प्रक्रिया को फिर से शुरू कर सकते हैं ।
लाभ: __
1. रेत में प्राकृतिक खनिज (जैसे सिलिका, कैल्शियम) होते हैं, जो त्वचा और हड्डियों को पोषण देते हैं।2. यह थैरेपी ब्लड सर्कुलेशन को सुधारती है।
3. यूनानी सिद्धांतों के अनुसार, यह थेरेपी शरीर के तापमान को बढ़ाकर मेटाबॉलिज्म (उपापचय) को ठीक करती है और विकृत पदार्थों को बाहर निकालती है।
4. गठिया और जोड़ों का दर्द__ गर्म रेत की सिकाई ऑस्टियोआर्थराइटिस, रूमेटाइड अर्थराइटिस और साइटिका के दर्द में काफी राहत देती है।
5. मांसपेशियों को आराम__ रेत का वजन और प्राकृतिक ऊष्मा मांसपेशियों की जकड़न को दूर करती है।
6. डिटॉक्सिफिकेशन और त्वचा रोग__पसीना आने से हानिकारक विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं। रेत के कण त्वचा को एक्सफोलिएट करते हैं और सोरायसिस जैसी समस्याओं में लाभ पहुंचाते हैं। पसीना आने से शरीर से ज़हरीले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं, और रेत के कण सूखी त्वचा को साफ़ करते हैं। रेत का वज़न मांसपेशियों को आराम देने और मन को शांत करने में मदद करता है। रेत वाले हमाम का इस्तेमाल त्वचा की समस्याओं, जैसे कि मुहासे, सोरायसिस और दूसरी बीमारियों के इलाज के लिए भी किया जाता है ।प्रयोगशाला के रूप में "रेत हम्माम" के सेंटर्स खोले जाते हैं।
सावधानियां __
1. यह उपचार प्राकृतिक है इसे हृदय रोगों, उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) और त्वचा के खुले घाव वाले मरीजों को यह थैरेपी करने से पहले किसी प्रमाणित यूनानी चिकित्सक से परामर्श अवश्य लेना चाहिए।
2. थैरेपी के दौरान पूरे समय मॉनिटरिंग की जाती है, जबकि वे रेत में दबे होते हैं।
3. देखभाल करने वाले रेत पर छाते लगाते हैं ताकि लोगों को धूप से बचाया जा सके ।4. थैरेपी के दौरान डिहाइड्रेशन से बचने के लिए उन्हें पानी पीने में मदद की जानी चाहिए ।
5. सुरक्षा की दृष्टि से दिल के ऊपर कम रेत डाली जाती है।