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मृत्यु के बाद कीमती मकान-जेवर की तरह नेत्रदान,भी वसीयत में लिखें : सुषमा सोन

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07 Jul 26
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मृत्यु के बाद कीमती मकान-जेवर की तरह नेत्रदान,भी वसीयत में लिखें : सुषमा सोन

कोटा। सामाजिक संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा संचालित नेत्रदान जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत सुभाष विहार निवासी, सुषमा सोन ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर नेत्रदान का संकल्प लेते पत्र भरा।

इस अवसर पर उन्होंने समाज के नाम एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि "जिस प्रकार हम अपनी मृत्यु के बाद अपने कीमती मकान, जमीन-जायदाद और जेवर आदि के संबंध में वसीयत लिखकर जाते हैं, उसी प्रकार हमें यह भी अपनी वसीयत में स्पष्ट रूप से लिखना चाहिए कि,हमारी मृत्यु के पश्चात हमारे नेत्र अवश्य दान किए जाएं। इससे हमारे परिवार को भी हमारी अंतिम इच्छा का सम्मान करने में सुविधा होगी और किसी नेत्रहीन व्यक्ति के जीवन में फिर से उजाला आ सकेगा।"

सुषमा के पति कृष्ण कुमार सोन,ने पत्नी के नेत्रदान संकल्प की सराहना करते हुए कहा कि,नेत्रदान ऐसा महादान है,जो मृत्यु के बाद भी दो व्यक्तियों को नई रौशनी प्रदान कर सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी वसीयत में नेत्रदान की इच्छा का उल्लेख करे तथा अपने परिजनों को भी इसकी जानकारी दे, तो नेत्रदान की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और हजारों दृष्टिबाधित लोगों को नया जीवन मिल सकता है।

शाइन इंडिया फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने सुषमा सोन को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके इस प्रेरणादायी निर्णय की सराहना की तथा इसे समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया। संस्था ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे अपने जन्मदिवस, विवाह वर्षगांठ अथवा अन्य विशेष अवसरों पर नेत्रदान का संकल्प लेकर समाज में मानवता का संदेश फैलाएं।
 


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