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 ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से बचाए जा सकते हैं नौ जीवन — विद्यार्थियों ने लिया समाज को जागरूक करने का संकल्प

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19 Jul 26
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 ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगदान से बचाए जा सकते हैं नौ जीवन — विद्यार्थियों ने लिया समाज को जागरूक करने का संकल्प

बूंदी। शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह समाज और मानवता के प्रति जिम्मेदारी का बोध भी कराती है। इसी उद्देश्य से अब विद्यालयों में ‘नो बैग डे’ को मानव सेवा और जीवन बचाने के संदेश से जोड़ा जा रहा है।

नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान के क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों से पूरे हाड़ौती संभाग में निरंतर कार्य कर रही संस्था शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा संयुक्त निदेशक, स्कूल शिक्षा, कोटा संभाग के साथ हुए एमओयू के बाद अब पूरे हाड़ौती संभाग के राजकीय एवं निजी विद्यालयों में अंगदान, नेत्रदान एवं देहदान जागरूकता कार्यशालाओं का शुभारंभ हो चुका है।

इसी क्रम में शुक्रवार को बूंदी जिले के ग्राम तालेड़ा एवं अकतासा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में विद्यार्थियों के लिए विशेष जागरूकता कार्यशालाओं का आयोजन किया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों को नेत्रदान, अंगदान एवं देहदान की पूरी प्रक्रिया, भ्रांतियों, वैज्ञानिक तथ्यों तथा मृत्यु के बाद मानव जीवन को बचाने में दान की भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

कार्यशाला के प्रमुख वक्ता एवं शाइन इंडिया फाउंडेशन के संस्थापक डॉ. कुलवंत गौड़ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि, “एक ब्रेन डेड व्यक्ति का अंगदान नौ जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन दे सकता है। जिस शरीर को मृत्यु के बाद अग्नि या मिट्टी को सौंप दिया जाता है, वही शरीर किसी दूसरे परिवार के लिए जीवन की सबसे बड़ी उम्मीद बन सकता है।”

अन्य वक्ता व संस्था सचिव डॉ संगीता गौड़ ने कहा कि, अंगदान केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी सेवा है। आज के विद्यार्थी कल के समाज के निर्माता हैं। यदि वे स्वयं अंगदान और नेत्रदान का महत्व समझेंगे और अपने परिवारों तथा समाज तक यह संदेश पहुंचाएंगे, तो आने वाले समय में हजारों लोगों को जीवन बच सकता है ।

प्रधानाचार्य ओम प्रकाश पंचोली ने कहा कि, “विद्यालय विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का केंद्र है। यदि बच्चों को मानव सेवा, अंगदान और नेत्रदान जैसे विषयों से जोड़ा जाए, तो यह शिक्षा को समाज सेवा से जोड़ने का अत्यंत प्रभावी माध्यम बन सकता है। हमारे विद्यार्थी इस संदेश को अपने घरों और समाज तक पहुंचाकर एक बड़ी सामाजिक जागरूकता का हिस्सा बन सकते हैं।”

इस अवसर पर डॉ. गौड़ ने कहा कि नेत्रदान एवं अंगदान को लेकर समाज में आज भी कई भ्रांतियां हैं, जिन्हें वैज्ञानिक जानकारी और सही संवाद के माध्यम से दूर किया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवारों को भी अंगदान के महत्व के बारे में जानकारी दें।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने अंगदान एवं नेत्रदान से जुड़े विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका विशेषज्ञों द्वारा सरल भाषा में समाधान किया गया। विद्यार्थियों ने इस सामाजिक अभियान से जुड़ने तथा अपने परिवार और समाज में अंगदान का संदेश पहुंचाने का संकल्प भी लिया।

शाइन इंडिया फाउंडेशन द्वारा संचालित यह अभियान अब हाड़ौती संभाग के विद्यालयों में निरंतर जारी रहेगा। संस्था का उद्देश्य है कि प्रत्येक विद्यालय से अंगदान, नेत्रदान एवं देहदान का संदेश विद्यार्थियों के माध्यम से प्रत्येक परिवार तक पहुंचे।


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