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सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में पारिवारिक गतिशीलता एवं महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

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30 Jan 26
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सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान महाविद्यालय में पारिवारिक गतिशीलता एवं महिला सशक्तिकरण पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित

उदयपुर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के  संघटक सामुदायिक एवं व्यावहारिक विज्ञान विद्यालय के संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा “उड़ान: पारिवारिक गतिशीलता एवं महिला सशक्तिकरण” विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय कुलगुरु प्रो. प्रताप सिंह ने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि परिवार समाज की सबसे सशक्त इकाई है और जब परिवार में समानता, संवाद एवं सम्मान की भावना विकसित होती है, तब महिला सशक्तिकरण स्वाभाविक रूप से साकार होता है। माननीय कुलगुरु ने न केवल महिला अपितु परिवार, समाज, राष्ट्र और वैश्विक स्तर पर सेमिनार की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए सारगर्भित अनुभव आधारित उद्बोधन में विगत और आगत के दृष्टांत को रेखांकित करते हुए महिला के बहुआयामी यथा शारीरिक, मानसिक, सामुदायिक, कानूनी, धार्मिक, नैतिक पक्षों पर महिला की दशा और दिशा पर प्रकाश डाला।

महाविद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. धृति सोलंकी ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि “परिवार और समाज की संरचना में आ रहे परिवर्तनों को समझे बिना महिला सशक्तिकरण की संकल्पना को पूर्ण रूप से नहीं अपनाया जा सकता। ‘उड़ान’ जैसी संगोष्ठियाँ शैक्षणिक विमर्श को सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं।कार्यक्रम की आयोजन सचिव डॉ हेमू राठौड ने बताया कि सेमिनार में देश के 11 राज्यों के कुल 142 प्रतिभागियों ने भाग लिया।संगोष्ठी में माननीय कुलगुरु द्वारा ‘सशक्त नारी और उनके योगदान’ विषयक एल्बम एवं ‘महिला कल्याण से संबंधित प्रमुख कानून’ विषयक पैम्फलेट का भी विमोचन किया गया।

संगोष्ठी के पैनल चर्चा सत्र में प्रो. मीना गौर ने इतिहास के परिप्रेक्ष्य में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा की। डॉ. कला मुनेत ने महिलाओं के अधिकारों एवं विधिक ढाँचे पर प्रकाश डाला। डॉ. भावना पोखरना ने महिला सशक्तिकरण के राजनीतिक आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत किए, जबकि डॉ. गायत्री तिवारी ने पारिवारिक संरचना के मनोवैज्ञानिक आयामों पर सारगर्भित विचार रखे। पैनल चर्चा का संचालन डॉ. गायत्री तिवारी द्वारा किया गया।

सेमिनार के प्रथम तकनीकी सत्र में आठ पीएच.डी. शोधार्थियों द्वारा  भारतीय नारीत्व के बदलता स्वरूप तथा तनाव प्रबंधन और पारिवारिक संबंधों को सुदृढ़ बनाने पर प्रस्तुतीकरण दिए गए। द्वितीय तकनीकी सत्र में नौ पीएच.डी. शोधार्थियों ने समकालीन परिवारों में संरचनाएँ, संस्थाएँ एवं लैंगिक प्रभाव तथा भारत में महिलाओं के विधिक अधिकार जैसे विषयों पर प्रस्तुतीकरण देकर अपने विचार प्रस्तुत किए। सुश्री भावना ने तकनीकी सत्रों का संचालन किया।

आयोजन को सफल बनाने में आयोजन सचिव डॉ. सुमन सिंह, डॉ. रेखा व्यास एवं डॉ. हेमू राठौर, समन्वयक डॉ. जयमाला दवे, डॉ. अंजली जुयाल एवं पीएचडी शोधार्थी का महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम का संचालन सुश्री अविशा  एवं सुश्री सुष्मिता द्वारा किया गया। डॉ. अंजली जुयाल एवं सुश्री नंदिनी वाधवानी ने धन्यवाद प्रेषित किया।


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