राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी विधानसभा में लंबित प्रश्नों पर बहुत गंभीर है। देवनानी ने पिछली और वर्तमान विधानसभा के लंबित प्रश्नों को लेकर नए साल में 2 जनवरी बुधवार को सुबह 11 बजे विधानसभा में राज्य के सभी विभागों के सचिवों की एक बैठक बुलाई है ।इस बैठक का उद्देश्य आगामी बजट सत्र से पूर्व 15वीं और 16वीं विधानसभा के सभी लंबित प्रश्नों, प्रस्तावों और आश्वासनों आदि सभी लंबित प्रकरणों का अनिवार्य रूप से निस्तारण करवाया जाना है । विधानसभाध्यक्ष देवनानी की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में राज्य के मुख्य सचिव, सभी विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव और शासन सचिव मौजूद रहेंगे। सभी विभागों के प्रमुखों को लंबित प्रश्नों की जानकारी के साथ व्यक्तिश बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए है ।
विधानसभा सचिवालय की तरफ से मुख्य सचिव से भी लंबित प्रश्नों का निस्तारण के लिए विशेष ध्यान देते हुए इन सभी लंबित प्रश्नों का निस्तारण अनिवार्य रूप से कराने का अनुरोध किया गया है। साथ ही विधानसभा की ओर से सभी विभागों को निर्देश प्रदान किए गए है कि विधानसभा के आगामी बजट सत्र से पूर्व 15वीं और 16वीं विधानसभा के लंबित प्रश्नों, प्रस्तावों और आश्वासनों आदि पर विशेष ध्यान रखते हुए सभी लंबित प्रकरणों का निस्तारण अनिवार्य रूप से करवाया जाए। लंबित प्रश्नों पर विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने शुरू से ही सख्ती का रुख रखा है जिसके परिणाम भी भी बहुत अच्छे आए तथा वर्तमान राजस्थान विधानसभा में कुल मिलाकर लगभग 91.5 प्रतिशत प्रश्नों के उत्तर प्राप्त हो गए हैं। इस आंकड़े में प्रथम तीन सत्रों के दौरान पूछे गए प्रश्नों में से प्राप्त उत्तर भी शामिल हैं। राजस्थान विधानसभा में लंबित प्रश्नों के जवाब प्राप्त करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल करने के पीछे विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने अधिकारियों के साथ निरंतर समीक्षा और बैठकों के माध्यम से प्रश्नों के जवाब समयबद्ध प्राप्त करने पर जोर रहा है, जिससे परिणाम सकारात्मक रहे हैं।
राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक व्यवस्था का वह केंद्रीय मंच है, जहाँ जनता की समस्याएँ उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार और प्रशासन के समक्ष रखी जाती हैं। विधानसभा की कार्यवाही में प्रश्नकाल को लोकतंत्र की आत्मा कहा जाता है, क्योंकि इसी के माध्यम से सरकार की नीतियों, योजनाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सीधा सवाल खड़ा किया जाता है। विधानसभा में प्रश्नों के लंबे समय तक लंबित रहने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने सख्त रुख अपनाया है। इस दिशा में विधानसभा भवन में आयोजित बैठकों और समीक्षा बैठकों को एक महत्वपूर्ण माध्यम बनाया गया है। पिछले सत्रों में यह माना गया कि कई विभागों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत नहीं हुए। कुछ प्रश्न सत्र समाप्त होने के बाद भी लंबित रहते हैं, जबकि कई मामलों में दिए गए उत्तर अधूरे, अस्पष्ट या केवल औपचारिक होते हैं। इससे विधायकों की भूमिका सीमित होती है और जनता तक सही जानकारी नहीं पहुँच पाती। इस स्थिति को विधानसभाध्यक्ष ने गंभीर मानते हुए कहा कि प्रश्नों को लंबित रखना न केवल संसदीय परंपराओं के विपरीत है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है।
लंबित प्रश्नों की समस्या के समाधान के लिए विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी की अध्यक्षता में विधानसभा में लगातार बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों में विधानसभा सचिवालय, संसदीय कार्य विभाग और विभिन्न प्रशासनिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विभागवार लंबित प्रश्नों की समीक्षा करना और उनके निस्तारण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करना था। इन बैठकों में यह निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विभाग अपने लंबित प्रश्नों की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत करे और यह बताए कि किन कारणों से उत्तर समय पर नहीं दिए जा सके। इस प्रक्रिया से विभागों पर एक नैतिक और प्रशासनिक दबाव बना कि वे विधानसभा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से लें। विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पिछली बैठकों में दो टूक शब्दों में कहा कि विधानसभा में पूछे गए प्रश्न केवल कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जनता की अपेक्षाओं का प्रतिबिंब हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रश्नों के उत्तर तथ्यात्मक, स्पष्ट और संपूर्ण हों। केवल औपचारिक जवाब या पुराने आंकड़ों की पुनरावृत्ति स्वीकार नहीं की जाएगी। यदि किसी प्रश्न से संबंधित जानकारी एकत्र करने में समय लगता है, तो इसकी जानकारी समय रहते विधानसभा सचिवालय को दी जानी चाहिए।विधानसभाध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि लगातार लापरवाही बरतने वाले विभागों की जवाबदेही तय की जाए और आवश्यकता पड़ने पर विधानसभा के समक्ष स्पष्टीकरण भी दिया जाए। विधानसभा बैठकों में इस बात पर भी चर्चा हुई कि प्रश्नकाल को और अधिक प्रभावी कैसे बनाया जाए। विधानसभाध्यक्ष देवनानी ने कहा कि प्रश्नकाल लोकतंत्र का सबसे सशक्त माध्यम है और इसे कमजोर नहीं होने दिया जा सकता। इसके लिए विभागों को सत्र शुरू होने से पहले ही संभावित प्रश्नों के उत्तर तैयार रखने की कार्य संस्कृति विकसित करनी चाहिए। इससे सदन में चर्चा अधिक सार्थक और तथ्यपरक होगी।
बैठकों में यह भी तय किया गया कि ई-विधान प्रणाली और डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से लंबित प्रश्नों की निरंतर निगरानी की जाएगी। प्रत्येक विभाग को यह जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी कि उसके कितने प्रश्न लंबित हैं और उनकी समय-सीमा क्या है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रश्नों के उत्तर देने की प्रक्रिया तेज होगी।
विधानसभा में आयोजित बैठकों और विधानसभाध्यक्ष की सख्ती को विधायकों ने सकारात्मक पहल बताया है। विधायकों का कहना है कि समय पर उत्तर न मिलने से उनके क्षेत्र की समस्याएँ सदन में प्रभावी ढंग से नहीं उठ पातीं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन बैठकों और निर्देशों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में और अधिक सुधार आएगा और प्रश्नकाल की गरिमा बनी रहेगी। लंबित प्रश्नों को लेकर विधानसभाध्यक्ष देवनानी द्वारा की गई यह पहल केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि सुशासन की दिशा में एक ठोस कदम है। इससे विभागों में जवाबदेही की भावना मजबूत होगी और यह संदेश भी जा रहा है कि विधानसभा की उपेक्षा किसी भी स्तर पर स्वीकार्य नहीं है।
विधानसभा में बैठकों के माध्यम से लंबित प्रश्नों पर सख्ती यह दर्शाती है कि राजस्थान विधानसभा अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों को लेकर सजग है। विधानसभाध्यक्ष वासुदेव देवनानी का यह प्रयास न केवल सदन की कार्यप्रणाली को मजबूत करेगा, बल्कि जनता के विश्वास को भी और अधिक सुदृढ़ करेगा। समयबद्ध, स्पष्ट और तथ्यपूर्ण उत्तर ही लोकतंत्र को जीवंत बनाए रखने की आधारशिला हैं।