GMCH STORIES

गति शक्ति विश्वविद्यालय ने क्षमता निर्माण आयोग के साथ मिलकर क्षमता निर्माण प्रयासों के लिए हाथ मिलाया

( Read 399 Times)

11 Mar 26
Share |
Print This Page
गति शक्ति विश्वविद्यालय ने क्षमता निर्माण आयोग के साथ मिलकर क्षमता निर्माण प्रयासों के लिए हाथ मिलाया

नई दिल्ली। भारत सरकार के क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) ने आज वडोदरा में प्रशिक्षण संस्थानों के लिए सतत वित्तपोषण, शासन और संसाधन जुटाने पर एक पश्चिमी क्षेत्रीय परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया। गति शक्ति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में पश्चिमी राज्यों के सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों (सीएसटीआई) के 26 प्रतिभागियों ने संस्थागत वित्तपोषण और शासन में प्रमुख सुधारों पर विचार-विमर्श किया।
इस अवसर पर सीबीसी और गति शक्ति विश्वविद्यालय के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए, जो सहयोगात्मक क्षमता निर्माण प्रयासों के प्रति एक महत्वपूर्ण औपचारिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कार्यशाला सत्रों में मसौदा रूपरेखा संरचना और नीति दिशा पर एक साझा सहमति स्थापित हुई। कार्यशाला में दो विषयगत समूहों ने प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की।
पहला समूह सतत वित्तपोषण पर केंद्रित था। इसमें वित्तीय संरचनाओं और बजट मॉडलों पर चर्चा हुई। राजस्व प्रतिधारण, पुनर्विनियोजन और आगे ले जाने की व्यवस्थाओं का विश्लेषण किया गया। समूह ने राजस्व सृजन के संभावित तरीकों का भी पता लगाया।
दूसरा समूह शासन और संसाधन जुटाने पर केंद्रित था। इसमें शक्तियों के प्रत्यायोजन और शासी निकाय की कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श किया गया। शैक्षणिक और प्रशासनिक स्वायत्तता चर्चा के प्रमुख क्षेत्र थे। समूह ने अवसंरचना उपयोग नीति पर भी विचार किया। संस्थागत विशेषज्ञता का लाभ उठाने और डिजिटल विस्तार तथा साझेदारी पर भी विचार.विमर्श किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी के स्वागत भाषण से हुआ। इसके बाद गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज चैधरी ने संबोधित किया और क्षमता निर्माण के उभरते परिदृश्य में जीएसवी की भूमिका पर प्रकाश डाला। सीबीसी की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चैहान ने संस्थागत सुदृढ़ीकरण के माध्यम से सीएसटीआई को भविष्य के लिए तैयार करने पर चर्चा की और विकसित भारत@2047 की दिशा में एक सशक्त सीएसटीआई पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण में सीबीसी की सहायक भूमिका को रेखांकित किया।
सीबीसी ने कहा कि पश्चिमी क्षेत्रीय परामर्श से प्राप्त अंतर्दृष्टि को राष्ट्रीय स्तर पर समेकित अनुशंसाओं में शामिल किया जाएगा, जिनका उद्देश्य सतत वित्तपोषण तंत्र को मजबूत करना, शासन संरचनाओं में सुधार करना और सिविल सेवा प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र में संसाधन जुटाने की क्षमताओं को बढ़ाना है।


Source :
This Article/News is also avaliable in following categories :
Your Comments ! Share Your Openion

You May Like