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राजस्थान की जल-बुद्धिमत्ता: महाराष्ट्र के लिए वर्षा जल संचयन के सबक

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24 Jun 26
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सूखे राजस्थान में पारंपरिक और आधुनिक वर्षा जल संचयन (RWH) प्रथाओं ने जल संकट के खिलाफ अद्भुत लचीलापन पैदा किया है। मानसून की अनिश्चितता, बाढ़ और जलाशयों के सूखने से जूझ रहे महाराष्ट्र को राजस्थान के समुदाय-आधारित सफल मॉडल से बहुत कुछ सीखना चाहिए और उसके पैटर्न अपनाने चाहिए।
राजस्थान ने जोहड़, खड़ीन, टंका और बावड़ियों जैसी प्राचीन संरचनाओं को पुनर्जीवित किया। अलवर में तरुण भारत संघ (टीबीएस) और राजेंद्र सिंह ने हजारों जोहड़ों को बहाल कर नदियों को जीवित किया, भूजल स्तर बढ़ाया और गांवों का कायाकल्प किया।
उदयपुर के डॉ. पी.सी. जैन इस क्षेत्र के समर्पित योद्धा हैं। पी.सी. जैन अस्पताल के स्वामी डॉ. जैन पिछले दो दशकों से छत पर वर्षा जल संचयन और सरल तकनीकों को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने 1,400 से अधिक घरों, संस्थानों और स्कूलों को प्रेरित किया, सीडी शो, नुक्कड़ नाटक और जागरूकता कार्यक्रमों के जरिए लोगों को शिक्षित किया। डालमिया वाटर-एनवायरनमेंट अवॉर्ड सहित सम्मानों से नवाजे गए डॉ. जैन का कार्य सरल, कम लागत वाला और प्रभावी मॉडल प्रस्तुत करता है।
राज्य सरकार की नीतियों में नए भवनों के लिए RWH अनिवार्य है, जो जल कनेक्शन से जुड़ा है। मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान जैसी योजनाएं छत संचयन और रिचार्ज को बढ़ावा देती हैं। सफलता का राज है समुदाय की भागीदारी, स्थानीय सामग्री और निरंतर रखरखाव।
महाराष्ट्र की चुनौतियां
महाराष्ट्र में 2000 के दशक से बड़े भवनों के लिए RWH नियम हैं, लेकिन अनुपालन कमजोर है। रखरखाव की कमी, निगरानी का अभाव और प्रवर्तन की ढिलाई से कई सिस्टम कागजी रह जाते हैं। घनी आबादी और प्रदूषण इसे और चुनौतीपूर्ण बनाते हैं।
महाराष्ट्र को राजस्थान के पैटर्न अपनाने की जरूरत
महाराष्ट्र को राजस्थान के सिद्ध मॉडल को सक्रिय रूप से अपनाना चाहिए:
1. समुदाय की स्वामित्व भावना: डॉ. जैन और टीबीएस की तरह रेसिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों और एनजीओ के साथ रखरखाव तथा जागरूकता अभियान चलाएं।
2. मजबूत प्रवर्तन: जल कनेक्शन और सब्सिडी को RWH से जोड़ें, नियमित ऑडिट और जुर्माना लगाएं।
3. विकेंद्रीकृत रिचार्ज: शहरी क्षेत्रों में जोहड़-शैली रिचार्ज पिट, पारगम्य सतहें और छत संचयन को व्यापक रूप से अपनाएं, पुराने भवनों में रेट्रोफिटिंग करें।
4. सरल और स्केलेबल तकनीक: डॉ. जैन की कम लागत वाली छत संचयन पद्धति को अपनाएं—फर्स्ट-फ्लश डाइवर्टर और फिल्टर के साथ।
5. नीति एकीकरण: RWH को वेस्टवाटर रिसाइक्लिंग और ग्रीन बिल्डिंग से जोड़ें, जन शिक्षा पर जोर दें।
राजस्थान के पैटर्न अपनाकर—समुदाय, सरलता, प्रवर्तन और निरंतरता—महाराष्ट्र अपने भरपूर वर्षा जल का बेहतर उपयोग कर जल संकट कम कर सकता है, बाढ़ नियंत्रित कर सकता है और जल सुरक्षा हासिल कर सकता है। अब नीतियों को व्यवहार में बदलने और डॉ. जैन जैसे चैंपियनों को प्रोत्साहित करने का समय है।
 


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