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पीएमसीएच में 18 वर्षीय युवक की स्पाइनल कॉर्ड से निकाला दुर्लभ ट्यूमर,मरीज को अपाहिज होने से बचाया

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12 Mar 26
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पीएमसीएच में 18 वर्षीय युवक की स्पाइनल कॉर्ड से निकाला दुर्लभ ट्यूमर,मरीज को अपाहिज होने से बचाया

उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के अस्थि रोग विभाग के चिकित्सकों ने एक 18 वर्षीय किशोर की स्पाइनल कॉर्ड में मौजूद दुर्लभ ट्यूमर का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर उसे फिर से अपने पैरों पर खड़ा कर उसे अपाहिज होने से बचा लिया है। यह सर्जरी न केवल तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण थी, बल्कि मरीज की कम उम्र ने इसे और भी संवेदनशील बना दिया था।
दरअसल सलूम्बर निवासी 18 वर्षीय नानालाल पिछले तीन महीनों से अपने बाएं पैर में लगातार बढ़ती कमजोरी और चलने में परेशानी हो रही थी। मरीज ने स्थानीय चिकित्सक को दिखाया लेकिन फायदा नही हुआ। मरीज की बिगडती हालत को देखतें हुए परिजन उसे पेसिफिक हॉस्पिटल लेकर आए जहॉ अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष शर्मा के नेतृत्व में डॉ.एमानुअल भोरे ने उसकी जॉच की मरीज की एमआरआई कराई गई, तो थोरेसिक स्पाइन के टी6दृ टी7 लेवल पर एक ट्यूमर की पता चला।  यह ट्यूमर नसों के दबाव का कारण बन रहा था, जिससे मरीज पर लकवे का खतरा मंडरा रहा था।
स्पाइन सर्जन डॉ.एमानुअल भोरे ने बताया कि मरीज की तुरन्त सर्जरी जरूरी था। विभागाध्यक्ष डॉ.सुभाष शर्मा के नेतृत्व में की गई इस जटिल स्पाइन सर्जरी में चिकित्सकों की टीम ने टी6दृ टी7 लेमिनेक्टॉमी प्रक्रिया अपनाई, जिसके माध्यम से स्पाइनल कॉर्ड के अंदरूनी हिस्से तक पहुंचकर ट्यूमर को सफलतापूर्वक निकाला गया। यह ट्यूमर न केवल नसों पर दबाव डाल रहा था बल्कि फोरामिनल क्षेत्र तक भी फैला हुआ था, जिसे बेहद सूक्ष्मता से अलग किया गया। चूंकि ट्यूमर निकालने के बाद रीढ़ की हड्डी की स्थिरता प्रभावित होने का जोखिम था, इसलिए डॉक्टरों ने टी6दृ टी8 पेडिकल स्क्रू फिक्सेशन तकनीक का उपयोग कर रीढ़ को मजबूती प्रदान की।
इस सफल ऑपरेशन में डॉ.सुभाष शर्मा के नेतृत्व में स्पाइन सर्जन डॉ.एमानुअल भोरे ,डॉ.मोहित, डॉ.रूचित सुथार और डॉ.पुलकित,एनेस्थीसिया विभाग से डॉ.प्रकाश ऑडिच्य,डॉ.रवींद्र सिंह ,डॉ.अरविंद के साथ ओटी इंचार्ज सुभाष शर्मा, मन्ना लाल और नागेश की टीम का योगदान रहा।  
डॉ.एमानुअल भोरे ने बताया कि इंट्राड्यूरल एक्स्ट्रामेडुलरी ट्यूमर होने की दर प्रति 1,00,000 व्यक्तियों पर मात्र 0.3 से 0.4 केस प्रति वर्ष है। सामान्यतः यह बीमारी 40 से 60 वर्ष की आयु के लोगों में होती है, लेकिन महज 18 वर्ष की आयु में इसका होना चिकित्सा विज्ञान की दृष्टि से असामान्य है।
ऑपरेशन के बाद नानालाल ने कम्प्लीट न्यूरोलॉजिकल रिकवरी प्राप्त कर ली है। अब वह बिना किसी सहारे के चलने में सक्षम है और उसे दर्द व कमजोरी से पूरी तरह राहत मिल चुकी है।
पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल ने कहा कि चिकित्सा जगत में आ रही नई तकनीकों और हमारे अनुभवी डॉक्टर्स के समन्वय का ही परिणाम है कि हम स्पाइनल कॉर्ड के इस दुर्लभ ट्यूमर का सफल ऑपरेशन कर सके। 18 वर्ष की आयु में इस तरह की बीमारी का होना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी स्पाइन सर्जिकल टीम ने इसे बखूबी अंजाम दिया। पीएमसीएच निरंतर ऐसे ही जटिल केसों में सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहा है, ताकि मेवाड़ और आसपास के मरीजों को घर के पास ही सर्वश्रेष्ठ इलाज मिल सके।
 


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