श्रीगंगानगर। जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट डॉ. मंजू ने श्रीगंगानगर जिले में तेजाब व टंकक्षारक पदार्थों के विक्रय के नियंत्रण को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किये हैं।
जिला कलक्टर ने बताया कि अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस जयपुर द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार तेजाब एवं टंकक्षारक पदार्थों के विक्रेताओं द्वारा सम्पूर्ण रूप से पालना नहीं की जा रही है। समस्त संबंधित उपखण्ड मजिस्ट्रेट एवं समस्त संबंधित विभागों द्वारा यह सुनिश्चित किया जाये कि विक्रेताओं द्वारा निर्देशों की पालना की जाये। विक्रय पलक पर तेजाब का बेचान पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा, जब तक कि विक्रेता एक लॉगबुक, पंजिका का संधारण ना करे, जिसमें तेजाब के बेचान का इन्द्राज हो एवं व्यक्ति/व्यक्तियों, जिन्हें तेजाब का बेचान किया जायेगा, का पूर्ण विवरण एवं बेचान किये तेजाब की मात्रा का अंकन ना हो। लॉगबुक, पंजिका में क्रेता जिसे यह बेचा जाता है, के पता का इन्द्राज किया जायेगा।
सभी विक्रेता तेजाब का बेचान तभी करेंगे, जब क्रेता सरकार द्वारा जारी फोटो वाला पहचान पत्र जिसमें उक्त क्रेता का पता अंकित हो दिखावे, तेजाब खरीदने का कारण, उद्देश्य स्पष्ट करें। विक्रेता तेजाब के समस्त भण्डारण की घोषणा संबंधित उपखण्ड अधिकारी के समक्ष प्रत्येक 15 दिवस में करेगा। 18 साल से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को तेजाब का बेचान नहीं किया जा सकेगा। तेजाब के भण्डारण की घोषणा नहीं करने की स्थिति में संबंधित उपखण्ड अधिकारी उक्त भण्डार को जब्त करेंगे और उक्त विक्रेता पर 50 हजार रूपये तक की समुचित शास्ति अधिरोपित कर सकेंगे। उपरोक्त निर्देशों की अवहेलना किसी व्यक्ति द्वारा किये जाने पर संबंधित उपखण्ड अधिकारी द्वारा 50 हजार रूपये की शास्ति आरोपित की जायेगी।
समस्त शैक्षणिक संस्थाएं, अनुसंधान प्रयोगशालाएं, अस्पताल, राजकीय विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम विभागों जिन पर तेजाब रखने और भण्डारण रखे जाने का दायित्व है, निम्नलिखित की पालना सुनिश्चित करेंगे। तेजाब के उपयोग की पंजिका का संधारण किया जायेगा और उसे संबंधित उपखण्ड अधिकारी के यहां दाखिल किया जायेगा। तेजाब को कब्जे में रखने और उसे परिसर में सुरक्षित रखने के लिये एक व्यक्ति को इसका दायित्व सौंपा जायेगा। उक्त व्यक्ति के पर्यवेक्षण में तेजाब का संधारण किया जायेगा और प्रयोगशाला, भण्डारण जहां तेजाब का उपयोग होता है, वहां से जाने वाले छात्र, व्यक्ति की जांच आवश्यक रूप से की जायेगी। निर्देशों के उल्लंघन, अवहेलना, अधिक्रमण पर समुचित कार्यवाही करने की समस्त उतरदायित्व संबंधित उपखण्ड अधिकारी का रहेगा।