श्रीगंगानगर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2025-26 में छोटे कृषकों की मांग को ध्यान में रखते हुए विभागीय दिशा निर्देशों में परिवर्तन कर तारबन्दी में 1.5 हैक्टेयर भूमि की बाध्यता को दूर करते हुए इसे 0.5 हैक्टेयर किया है। ऐसा करने से गरीब एवं छोटी जोत वाले किसानों को भी लाभ मिलेगा
राजस्थान सरकार कृषि उत्पादन को बढ़ाने सीमांत एवं लघु स्तर के किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से तारबंदी योजना पर अनुदान दे कर किसानों को राहत प्रदान कर रही हैं। सरकार द्वारा प्रदेश के किसानों की फसलों को निराश्रित पशुओं के नुकसान से बचाने के लिए ये जन कल्याणकारी योजना चलाई जा रही है। किसान कड़ी मेहनत व लागत लगाकर फसल और सब्जियां पैदा करते हैं परंतु नील गाय व बेसहारा पशुओं द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाया जाता है। फसलों की सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए राजस्थान सरकार द्वारा खेतों की कांटेदार, चेनलिंक, तारबंदी करवाने पर अनुदान दिया जा रहा है।
कांटेदार, चेनलिंक, तारबंदी, वर्गाकार नोडफेंसिंग योजना के लिए आवेदन कर्ता किसान राजस्थान का मूल निवासी होना चाहिए। उसके पास 0.5 हेक्टेयर भूमि होनी आवश्यक है। यदि एक किसान के पास 0.5 हैक्टेयर नहीं है, तो वो अपने पड़ोसी के साथ मिलकर समूह में भी आवेदन लगा सकता है। समूह में 2 या 2 से अधिक किसान मिलकर भी यदि 0.5 हैक्टेयर भूमि एक जगह पर रखते हैं, तो उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा। वहीं सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने हेतु समुदायिक रूप से न्यूनतम 10 या अधिक किसान मिलकर 5 हेक्टेयर भूमि में तारबंदी करवाते हैं, तो प्रति किसान अधिकतम 400 मीटर लंबाई पर 50 प्रतिशत या 100 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से अधिकतम 40 हजार रुपये अनुदान राशि मिलेगी। लघु एवं सीमांत किसानों को 400 मीटर लंबाई पर इकाई लागत का 60 प्रतिशत या 120 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से 400 मीटर पर 48 हजार रुपये तक प्रति कृषक देय होगा। वहीं सामूहिक रूप से 10 किसान मिलकर यदि 5 हैक्टेयर क्षेत्र में यदि तारबन्दी करते हैं, तो उन्हें इकाई लागत का 70 प्रतिशत अनुदान अर्थात 140 रुपये प्रति मीटर के हिसाब से 400 मीटर पर 56 हजार रुपये प्रति किसान तक अनुदान देय है ।
खेतों की तारबंदी पर अनुदान के लिए इच्छुक एवं पात्र किसान तारबंदी के लिए प्रस्तावित भूमि की पेरीफेरी का नवीनतम प्रमाणित संयुक्त नक्शा ट्रेस व जमाबंदी एवं जनाआधार कार्ड, आधार कार्ड लघु एवं सीमान्त प्रमाण पत्र। इन सभी दस्तावेजों के साथ ई-मित्र केंद्र या स्वयं के द्वारा राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने के पश्चात विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति जारी की जाती है।
किसान द्वारा कांटेदार, चेनलिंक, तारबंदी योजना के लिए किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाईन आवेदन करने के पश्चात विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति निकाली जाती है एवं विभाग द्वारा आवेदन कर्ता किसान को तारबंदी करने के लिए स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है। तत्पश्चात किसान या समूह द्वारा खेत में तारबंदी करने का कार्य किया जाता है। कार्य पूर्ण होने पर व्यय राशि के समस्त बिल किसान या समूह द्वारा संबंधित कृषि अधिकारी को उपलब्ध करवाने होते है।
मौके पर जाकर संबंधित कृषि अधिकारी द्वारा कार्य पूर्ण होने का भौतिक सत्यापन राज किसान साथी पोर्टल पर ऑनलाइन किया जाता है। इसके पश्चात अनुदान राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खाते में ट्रांसफर किया जाता है। राज्य सरकार की इस जन कल्याणकारी योजना में पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर कृषि विभाग द्वारा आवेदन पत्रों का निस्तारण किया जाता है।