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वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत बताया जल का महत्व

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01 Jun 26
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वंदे गंगा जल संरक्षण अभियान के तहत बताया जल का महत्व

श्रीगंगानगर। वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान 2026 कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय कार्यक्रम कृषि एव उद्यान विभाग द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र पदमपुर में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सतीश कुमार शर्मा द्वारा वंदे जल संरक्षण अभियान आयोजन के उद्देश्य एवं महत्व से उपस्थित महिलाओं और किसानों को अवगत करवाया। जल संरक्षण के लिए उपस्थित महिलाओं, किसानों एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों को जल संरक्षण की शपथ दिलाई।
केवीके प्रभारी डॉ. सीमा चावला ने कृषि में महिलाओं के योगदान पर प्रकाश डालते हुए किचन गार्डनिंग, कंपोस्ट पिट द्वारा उन्नत किस्म की गोबर की खाद तैयार करने, घरो में वर्षा जल के सरंक्षण हेतु सोख्ता गड्ढा निर्माण कर जल संरक्षण की विधाओं के बारे में जानकारी दी।
सहायक निदेशक कृषि श्री सुरजीत कुमार ने परंपरागत जल स्त्रोत के सरंक्षण और उनके पुनरोद्वार की आवश्यकता, महत्व के बारे में जानकारी दी। सहायक निदेशक कृषि श्री सुशील कुमार शर्मा द्वारा कृषि विभाग द्वारा जल बचत हेतु डिग्गी निर्माण, फॉर्म पौंड, पाइप लाइन योजनाओं के बारे में अनुदान और आवेदन की प्रक्रिया की जानकारी प्रदान की।
उद्यान विभाग के सहायक कृषि अधिकारी श्री नरेश अरोड़ा ने सूक्ष्म सिंचाई पद्धति ड्रिप, फव्वारा, मिनी फव्वारा, किन्नू की बागवानी एवं जैविक खेती हेतु वर्मी कंपोस्ट यूनिट निर्माण के महत्व और अनुदान प्रकिया के बारे में जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. नवल द्वारा जल बचत हेतु डिग्गी में सिंचाई जल को भंडारित कर मेड़ पद्धति से खेती कर कम पानी में अधिक क्षेत्रफल में ज्यादा उत्पादन लेने, उर्वरक बचत की विधि से अवगत कराया।
कृषि अनुसंधान अधिकारी श्री जगजीत सिंह ने जैविक खेती के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में जिले में रसायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण खेती योग्य भूमि की सेहत गड़बड़ा रही है। इसके दुष्प्रभाव के कारण किसानों को वांछित उपज नहीं मिल रही है एवं प्रतिदिन नई-नई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। किसान परम्परागत खादों जैसे गोबर की खाद, कंपोस्ट खाद, हरी खाद, केंचुआ खाद एवं जीवाणु खादों का अधिक उपयोग करें। रसायनिक उर्वरकों का संतुलित उपयोग करें। किसान मिट्टी परीक्षण करवाकर मिट्टी की जांच रिपोर्ट के आधार पर खेती करें।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजवीर ने 1 जून से आरम्भ हुए “खेत बचाओ अभियान” के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि 30 जून 2026 को इसका समापन होगा। उन्होंने बताया कि इसके तहत जिले की ग्राम पंचायतों में कृषि विभाग एव कृषि विज्ञान केंद्र के सहयोग से कृषक गोष्ठियों का आयोजन कर किसानों को वैकल्पिक खादों एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान की जाएगी। अभियान का मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग को कम कर मृदा स्वास्थय कार्ड आधारित खेती को बढ़ावा देना एवं उर्वरकों के संतुलित उपयोग के बारे में जानकारी प्रदान करना है। सहायक कृषि अधिकारी श्री राजा सिंह, श्री श्योप्रकाश ने कार्यक्रम में शामिल अधिकारियों कर्मचारियांे, महिलाओं और कृषकों का धन्यवाद ज्ञापित किया। 


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