उदयपुर: विज्ञान समिति द्वारा नव वर्ष के अवसर पर आयोजित समारोह में साहित्य, संगीत और हास्य का अनुपम संगम देखने को मिला। संचालन सचिव डॉ. आर.के. गर्ग के कुशल संचालन में मंच पर प्रमुख अतिथि रणधीर सिंह चौधरी, महीप भटनागर एवं आर.के. चतुर उपस्थित रहे।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि समिति के कुल गीत की शुरुवात के बाद स्वागत करते हुए समिति अध्यक्ष प्रो महीप भटनागर ने अपने उद्बोधन में वर्ष की परिभाषा पर प्रकाश डालते हुए कहा की यह अपने जीवन की एक पुस्तक हैं जिसमें 12 अध्याय एवं 365 पृष्ठ हैं | हर व्यक्ति को प्रतिदिन इसका एक पृष्ठ स्वं लिखना होता हैं |
गत वर्ष की गई विशिष्ट उपलब्धियों के लिए प्रो. महीप भटनागर, प्रो. प्रेम सुमन जैन, डॉ. अनुराग तलेसरा, डॉ. सुजान सिंह, रविंद्र भटनागर, अविनाश भटनागर, डॉ. नेहा लोढ़ा एवं धर्मेंद्र वैष्णव का तिलक शाल व ऊपरण पहना सम्मानित किया गया।
संस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया :-
बी.एल. चावत ने 'है अपना दिल तो आवारा' गीत सुनाया, डॉ. के.एल. कोठारी ने स्वरचित कविता पाठ किया, शिवा तलेसरा ने 'तेरे सुर और मेरे गीत' प्रस्तुत किया, गीता सिंह ने 'हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे' गाया। प्रो. महीप भटनागर ने चुटकुला ('महिला की अभिलाषा बना मोबाइल') एवं कविता ('यह देश किसका है') सुनाई। इसके अलावा आर.के. खोखावत (स्वरचित कविता ), रेणु भंडारी (चुटकुले), प्रकाश तातेड़ (स्वरचित गीत), शिव रतन तिवारी, आर.के. चतुर (कविताएं) एवं रणजीत सिंह चौधरी (गुजरे साल की यादें) सुना अपनी प्रस्तुतियां दीं।
कार्यक्रम में डॉ. आई.एल. जैन एवं ज्योति भटनागर का जन्मदिन भी मनाया गया।