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स्मार्ट पुलिसिंग के लिए साइबर सुरक्षा सशक्तिकरण‘ विषयक दो दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न

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17 Feb 26
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स्मार्ट पुलिसिंग के लिए साइबर सुरक्षा सशक्तिकरण‘ विषयक दो दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण सम्पन्न

उदयपुर। उदयपुर रेंज पुलिस और यूनिसेफ राजस्थान के तत्वावधान में संचालित पुलिसिंग फॉर केयर ऑफ चिल्ड्रन कार्यक्रम अंतर्गत साइबर अपराधों की रोकथाम और जागरूकता के लिए ‘स्मार्ट पुलिसिंग के लिए साइबर सुरक्षा सशक्तिकरण‘ विषयक दो दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन मंगलवार को डबोक स्थित गीतांजलि इंस्टीटयृट ऑफ टेक्निकल स्टडीज में हुआ। पुलिस महानिरीक्षक श्री गौरव श्रीवास्तव के निर्देशन एवं कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एएसपी हर्ष रतनू के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित साइबर क्राइम एवं औपरेशन विशेषज्ञ ईशान सिन्हा ने पीपीटी के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, एपीके फाईल, मोबाइल फोरेंसिक, एआई तकनीक आदि के बारे में बिन्दुवार जानकारी दी और साइबर फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए सतर्क रहने, तकनीक का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को इस संबंध में जागरूक करने का प्रशिक्षण दिया। 
पुलिस महानिरीक्षक श्री गौरव श्रीवास्तव ने इस महत्वपूर्ण दो दिवसीय रेंज स्तरीय प्रशिक्षण कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों एवं सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए कहा कि ‘स्मार्ट पुलिसिंग के लिए साइबर सुरक्षा सशक्तिकरण’ आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुकी है। डिजिटल युग में अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, और हमें भी उसी गति से अपने कौशल एवं तकनीकी क्षमता को उन्नत करना होगा। आज साइबर अपराध केवल तकनीकी चुनौती नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में हमारी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि हम तकनीकी रूप से दक्ष, सतर्क और संवेदनशील रहें और साइबर अपराध को बढ़ावा देने वालों पर शिकंजा कसते हुए आमजन को सुरक्षित वातावरण प्रदान करें।
नोडल अधिकारी एएसपी हर्ष रतनू ने कहा कि इन दो दिनों में विषय विशेषज्ञ द्वारा साइबर अपराध की नवीन प्रवृत्तियों, डिजिटल साक्ष्य संकलन, साइबर फॉरेंसिक तकनीकों, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग तथा साइबर कानूनों की विस्तृत जानकारी दी गई है जो आप सभी के लिए उपयोगी साबित होगी। यह प्रशिक्षण केवल जानकारी तक सीमित न रहकर, व्यवहारिक पुलिसिंग में भी दिखाई देना चाहिए। यूनिसेफ राजस्थान की उदयपुर रेंज स्तरीय बाल संरक्षण सलाहकार सिंधु बिनुजीत ने समस्त अतिथियों, विषय विशेषज्ञ एवं प्रतिभागियों का आभार जताते हुए सभी को कार्यशाला के अनुभवों का लाभ लेते हुए पीड़ित को त्वरित राहत प्रदान करने और इस संबंध में आमजन को जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए विश्वास जताया कि यह कार्यशाला स्मार्ट, पारदर्शी और उत्तरदायी पुलिसिंग की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध होगी।
दूसरे दिन के प्रशिक्षण सत्र में साइबर क्राइम एवं औपरेशन विशेषज्ञ ईशान सिन्हा ने साइबर अपराध को बढ़ावा देने वाले अपराधियों के विरूद्ध की जाने वाली कानूनी कार्यवाही की प्रक्रिया और अपराध के अनुसार निहित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। श्री सिन्हा ने बताया कि पिछले कुछ सालों में जैसे-जैसे तकनीक का विकास हुआ है, उसी रफ्तार से साइबर क्राइम भी बढ़ रहे हैं। मोबाइल पर मैसेज के दौरान ठगी, बैंक अधिकारी बनकर एटीएम आदि की गोपनीय जानकारी हासिल कर खाते से रूपए उड़ाना, युवतियों के एमएमएस, वीडियो बनाना, अश्लील मैसेज करना, कॉल कर परेशान करना, एटीएम से रूपए उड़ाना आदि घटनाओं के अलावा इन दिनों वाट्सअप आदि के माध्यम से भी अनेक प्रकार के अपराध किए जा रहे हैं। इन पर निगाह रखने के लिए पुलिस को अलर्ट होने तथा ऐसे ग्रुपों पर निगाह रखने के लिए भी ताकीद किया। गीतांजलि इंस्टीटयृट ऑफ टेक्निकल स्टडीज के कैंपस डायरेक्टर डॉ.एस.एम. प्रसन्ना कुमार ने भी विचार रखें। कार्यक्रम में रेंज के सभी साइबर थानों, साइबर सेल व महिला अपराध एवं अनुसंधान प्रकोष्ठ एवं मानव तस्करी विरोधी यूनिट से संबंधित पुलिस अधिकारियों के साथ गिट्स संस्थान के डॉ. चिंतल पटेल, डाॅ. अजीत जोशी,
 कार्यक्रम टीम के दिलीप सालवी, सुनील व्यास और कॉलेज प्रबंधन के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


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