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पंडित चतुरलाल की जन्मशती पर कल शिल्पग्राम में “स्मृतियां” कॉन्सर्ट

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04 Mar 26
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पंडित चतुरलाल की जन्मशती पर कल शिल्पग्राम में “स्मृतियां” कॉन्सर्ट

उदयपुर। पं. चतुरलाल मेमोरियल सोसायटी एवं हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड द्वारा भारतीय शास्त्रीय संगीत जगत के महान तबला वादक, “ताल के जादूगर” पंडित चतुर लाल की जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्य में 6 मार्च को सायं 6.30 बजे शिल्पग्राम में स्मृतियां कॉन्सर्ट का भव्य आयोजन किया जाएगा।  
यह वर्ष पंडित चतुरलाल के 100 वर्षों की गौरवशाली संगीत यात्रा को समर्पित है। पंडित चतुर लाल उन अग्रणी भारतीय ताल वादकों में थे जिन्होंने भारतीय ताल को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित किया।
भारतीय शास्त्रीय संगीत के वैश्विक इतिहास में वर्ष 1955 एक ऐतिहासिक अध्याय के रूप में दर्ज है, जब उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित चतुर लाल ने पश्चिमी देशों का ऐतिहासिक संगीत दौरा किया। उन्हें विश्वप्रसिद्ध वायलिन वादक येहूदी मेनुहिन द्वारा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत और परिचित कराया गया। इसी क्रम में उन्होंने न्यूयॉर्क स्थित म्यूजियम ऑफ मॉडर्न आर्ट में प्रस्तुति दी। यह पहली बार था जब भारतीय शास्त्रीय संगीत उस प्रतिष्ठित मंच तक पहुँचा। यह क्षण भारतीय संगीत के वैश्विक प्रसार की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हुआ। वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति देने वाले प्रारंभिक भारतीय तबला वादकों में से थे। विश्वविख्यात कलाकारों के साथ उनकी ऐतिहासिक जुगलबंदियां आज भी संगीत प्रेमियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। समकालीन समीक्षाओं ने उनकी कला को असाधारण बताया। हिंदुस्तान टाइम्स वीकली (2 फरवरी 1958) ने लिखा था कि पं. रवि शंकर, अली अकबर, चतुरलाल अपने-अपने वाद्यों के निर्विवाद उस्ताद और अनुपम प्रतिनिधि थे।
इसी प्रकार 27 अप्रैल 1958 को द न्यूयॉर्क टाइम्स  ने उनकी कला की विराटता का उल्लेख करते हुए लिखा कि चतुर लाल की कला इतनी महान थी कि जब वे रवि शंकर के साथ संगत करते थें, तो ऐसा प्रतीत होता है मानो उनके साथ पूरा एक सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा जुड़ गया हो।”
ये समीक्षाएं प्रमाण हैं कि पंडित चतुर लाल केवल एक संगतकार नहीं, बल्कि अपने आप में एक विराट संगीत व्यक्तित्व थे।
वे पंडित रवि शंकर के साथ वर्ष 1957 में ऑस्कर के संगीत वर्ग में नामांकन से जुड़े पहले भारतीय तालवादकों में सम्मिलित रहे। उनके तबला वादन को अंतरराष्ट्रीय समीक्षकों द्वारा अत्यंत सराहा गया। अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें जीवनकाल में अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया।
ताल वाद्य कचहरी” की परिकल्पना को साकार कर उन्होंने ताल की जटिलताओं को वैश्विक श्रोताओं तक पहुँचाया। भारतीय शास्त्रीय संगीत में उनका योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है और आज भी उनकी शैली नई पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हुई है।
शिल्पग्राम में 6 मार्च को स्मृतियां कॉन्सर्ट का यह 26वाँ वर्ष विशेष रूप से उनकी स्मृति और विरासत को समर्पित रहेगा। इस अवसर पर देश-विदेश के विख्यात कलाकार एक ही मंच पर प्रस्तुति देंगे और अपनी कला के माध्यम से उन्हें संगीतमय श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। कार्यक्रम में पद्म भूषण से सम्मानित सुप्रसिद्ध मोहन वीणा वादक पंडित विश्व मोहन भट्ट, तंत्री सम्राट पं. सलील भट्ट तथा प्रांशु चतुर लाल अपनी प्रस्तुतियों से संध्या को अलौकिक बनाएंगे। अंतरराष्ट्रीय कलाकार मोआ डेनियलसन द्वारा संतूर वादन की विशेष प्रस्तुति भी इस अवसर पर होगी, जो संगीत की वैश्विक सरहदों को स्पर्श करेगी। इसके अतिरिक्त सुप्रसिद्ध नियाजी निजामी ब्रदर्स द्वारा सूफी कव्वाली की विशेष प्रस्तुति आयोजित की जाएगी, जो श्रोताओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत कर देगी। इसी कार्यक्रम में जिंक प्रतिभा टैलेंट हंट के विजेताओं को भी इस भव्य मंच पर अपनी कला प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया जाएगा।
इस आयोजन को आरएसएमएम लिमिटेड एवं राजस्थान पर्यटन का सहयोग प्राप्त है। कार्यक्रम के हॉस्पिटैलिटी पार्टनर के रूप में प्राइड होटल तथा डिजिटल पार्टनर के रूप में सैंडीज ट्रैवल टेल्स जुड़े हुए हैं। यह संगीतमय संध्या केवल एक कॉन्सर्ट नहीं, बल्कि एक विरासत का उत्सव है। एक ऐसी धरोहर का, जिसने भारतीय ताल को विश्व पटल पर अमर कर दिया। उदयपुर के समस्त संगीत प्रेमियों को इस ऐतिहासिक अवसर पर सादर आमंत्रित किया जाता है।


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