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अब लू पूर्वानुमान अब 4-5 दिन पहले हो रहा जारी, हीट एक्शन प्लान का प्रभावी कार्यान्वयन संभव हुआ

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12 Mar 26
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अब लू पूर्वानुमान अब 4-5 दिन पहले हो रहा जारी, हीट एक्शन प्लान का प्रभावी कार्यान्वयन संभव हुआ

उदयपुर। मौसम विभाग द्वारा अब लू पूर्वानुमान अब 4-5 दिन पहले जारी किए जाते हैं, जिससे हीट एक्शन प्लान का प्रभावी कार्यान्वयन संभव हुआ है।  इसके साथ ही अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित होने के कारण अब 2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान चक्रवात ट्रैक पूर्वानुमान त्रुटियों में 20-25 प्रतिशत तक कमी आई है।
राज्यसभा में सांसद चुन्नीलाल गरासिया द्वारा मिशन मौसम-कार्यान्वयन की स्थिति
को लेकर पूछे गए प्रश्न पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्य सभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मिशन मौसम के तहत 26 सितंबर 2024 को पुणे और नोएडा में उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (एचपीसी) प्रणालियों का उद्घाटन किया गया। नई प्रणालियां-अर्क (11.77 पेटाफ्लॉप्स), अरुणिका (8.24 पेटाफ्लॉप्स) और 1.9 पेटाफ्लॉप्स एआई-एमएल प्रणाली मिलकर मंत्रालय की कुल क्षमता को 21.91 पेटाफ्लॉप्स तक बढ़ाती हैं। यह अवसंरचना उच्च-रिज़ॉल्यूशन मौसम एवं जलवायु मॉडलिंग और एआई व एमएल आधारित पूर्वानुमान को सक्षम बनाती है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नई प्रणालियों के आने से पूर्वानुमान सटीकता में सुधार
हुआ है। 2016-20 की तुलना में 2021-25 के दौरान चक्रवात ट्रैक पूर्वानुमान त्रुटियों में 20-25 प्रतिशत तक कमी आई है। तीव्रता पूर्वानुमान में 33-35 प्रतिशत सुधार (72 घंटे तक)। लैंडफॉल पॉइंट त्रुटि 24 घंटे में 31.9 किमी से घटकर 19.0 किमी और 48 घंटे में 61.5 किमी से घटकर 34.4 किमी रह गई है तथा लू पूर्वानुमान अब 4-5 दिन पहले जारी किए जाते हैं, जिससे हीट एक्शन प्लान का प्रभावी कार्यान्वयन संभव हुआ है।  
मिशन मौसम में सुधार होने के कारण अब सामाजिक-आर्थिक लाभ भी हो रहे हैं जैसे समय पर तटीय निकासी और आपदा तैयारियों में सुधार हुआ है। मानसून के दौरान बेहतर कृषि योजना बनाई जा रही है तथा जीवन, संपत्ति और आर्थिक व्यवधानों की हानि में कमी आई है। भविष्य में मंत्रालय ने मिशन मौसम के दूसरे चरण का प्रस्ताव रखा है। इसमें राष्ट्रीय मौसम प्रेक्षण नेटवर्क को मजबूत करना, उच्च-रिज़ॉल्यूशन मॉडलिंग क्षमताओं को बढ़ाना और एआई व एमएल आधारित पूर्वानुमान प्रणालियों का विस्तार शामिल होगा। मिशन को बहु-चरणीय कार्यक्रम के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा।


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