उदयपुर | राजस्थान चाइल्ड एडवाइजर ग्रुप (आर-केग) प्रदेश में बाल अधिकारों की संरक्षण हेतु गठित स्वंय सेवी संस्थाओं, स्वंय सेवकों एवं सेनानिवृत अधिकारियों का सामूहिक मंच है । हम सभी का पहला दायित्व है कि प्रदेश में कही भी बाल अधिकारों के हनन की सूचना मिले तो हम सबसे पहले सक्रियता दिखाकर सरकार के सहयोगी बने| वर्तमान में निराश्रित बाल गृहों के बंद होने की जानकारी चिंताजनक है, हम सरकार से संवाद कर जल्द से जल्द गृह पुनःखुलवाने हेतु प्रयास करेंगे | उक्त विचार शहर के जिला परिषद सभागार में आर-केग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए संगठन के अध्यक्ष एवं समाजसेवी चंद्रगुप्त सिंह चौहान ने व्यक्त किए |
इस अवसर पर आर-केग महासचिव एवं पूर्व सदस्य राजस्थान बाल आयोग, राजस्थान सरकार डॉ. शैलेंद्र पंड्या ने जानकारी देते हुए बताया कि किशोर न्याय अधिनियम, 2015 अंतर्गत प्रत्येक जिला मुख्यालय पर निराश्रित बच्चों के लिए बालक-बालिकाओं के पृथक-पृथक गृह की व्यवस्था की गई थी | इसी के तहत उदयपुर जिला मुख्यालय जो की संभाग मुख्यालय भी हैं यहां पूर्व में 18 गृह संचालित थे जिसमें 600 से अधिक बच्चे निवासरत थे | इन गृहो को बंद करने से अब यह बच्चे कहां गए यह काफी बड़ी चिंता का विषय है | इस पर सरकार का ध्यान आकर्षित करना होगा |
बैठक में शिक्षाविद् एवं आर-केग के सदस्य डॉ. राजश्री गांधी ने बच्चों में नशे की बढ़ती समस्या एवं शैक्षणिक संस्थाओं के आसपास नशे का उपलब्धता पर कार्य करने का सुझाव दिया |
इस अवसर पर मैत्री संस्थान की निदेशक एवं संगठन की सदस्य डॉ. गीता पटेल ने जनजाति अंचल के बच्चों के मुद्दों को उठाते हुए सामूहिक एवं सतत प्रयास की बात कही |
बैठक में संमिधा संस्थान के प्रदीप रावानी, प्रतिबद्ध संस्थान के गिरीश भारती, गायत्री सेवा संस्थान के नितिन पालीवाल, राहडा फाउंडेशन से अर्चना सिंह, नवजीवन संस्थान से सखाराम मेघवाल, कनिष्का श्रीमाली, आर-केग सदस्य पायल कनेरिया, आशिता जैन, विवेक पालीवाल ने भी अपने विचार प्रकट किए |
बैठक उपरांत सभी ने आर-केग अध्यक्ष के साथ जिला कलेक्टर उदयपुर नमित मेहता को ज्ञापन सौंप कर बाल गृहो को जल्द खुलवाने की मांग की ।