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अशोक पैलेस में आज सजेगा “राज रंगीलो राजस्थान” का रंगारंग मंच, लोक संस्कृति की झलक से सराबोर होगा शहर

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29 Mar 26
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अशोक पैलेस में आज सजेगा “राज रंगीलो राजस्थान” का रंगारंग मंच, लोक संस्कृति की झलक से सराबोर होगा शहर

उदयपुर। झीलों की नगरी उदयपुर आज एक बार फिर अपनी समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं के रंग में रंगने जा रही है। राजस्थान दिवस के उपलक्ष में सुरों की मंडली संस्थान द्वारा भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम “राज रंगीलो राजस्थान” का आयोजन 29 मार्च को दोपहर 1:00 बजे मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस, शोभागपुरा में किया जाएगा।

संस्था के संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने बताया कि सुरों की मंडली वर्षों से विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन का कार्य करती आ रही है। “राज रंगीलो राजस्थान” इसी श्रृंखला की एक विशेष कड़ी है, जिसमें राजस्थान की विविध सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि
यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बनेगा, बल्कि प्रदेश की गौरवशाली लोक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने का भी एक सशक्त प्रयास होगा।

संस्था के सचिव अरुण चौबीसा के अनुसार, इस आयोजन में लगभग 50 प्रतिभागी अपनी मधुर आवाज़ में राजस्थानी लोक गीत प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने बताया कि ये गीत न केवल मनोरंजन करेंगे, बल्कि राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और परंपराओं की गहराई को भी दर्शकों तक पहुंचाएंगे।

कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि कार्यक्रम की विशेषता यह होगी कि सभी कलाकार और सदस्य पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में नजर आएंगे। रंग-बिरंगे परिधानों, पारंपरिक आभूषणों और सजीव प्रस्तुति के साथ पूरा वातावरण राजस्थानी संस्कृति में सराबोर हो जाएगा। उन्होंने बताया कि महिला सदस्यों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले आकर्षक लोक नृत्य इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहेंगे, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देंगे।

कार्यक्रम के संयोजक विष्णु वैष्णव, नूतन वेदी, विकास स्वर्णकार एवं गोपाल गोठवाल इस आयोजन को भव्य और यादगार बनाने के लिए लगातार तैयारियों में जुटे हुए हैं। आयोजन स्थल को भी पूरी तरह राजस्थानी थीम में सजाया जा रहा है, ताकि दर्शकों को एक अलग ही सांस्कृतिक अनुभव मिल सके।

सुरों की मंडली संस्थान ने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लेकर राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति, संगीत और नृत्य का आनंद लें तथा इस परंपरा को आगे बढ़ाने में अपनी भागीदारी निभाएं।


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