उदयपुर | मुस्कान क्लब यूथ विजेटेड का साप्ताहिक विशेष कार्यक्रम में गजलों की महफिल का आयोजन ओरिएंटल पैलेस रिसोर्ट के नव सभा सभागार में हुआ | अध्यक्षता डॉ बी एल वर्मा ने की एवं गट्टानी फाउंडेशन के केयरटेकर नीरज गट्टानी मुख्य अतिथि रहे, संचालन के के त्रिपाठी ने किया व एमपी माथुर मंचासीन रहे |
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि 152 सदस्यों ने 28 स्वरचित, फिल्मी एवं गैर फिल्मी गजलों का आनंद लिया |
तीन स्वरचित गज़ले :- एम पी माथुर - बांट के दर्द किसी का खुशी उसकी देखिए, डॉ. विमल शर्मा - खामोशी की चुप्पी में भी, श्रीमती रीटा श्रीमाली - तन्हा लम्हा और तन्हा मै |
फ़िल्मी / गैर फ़िल्मी :
अमर माथुर - जीना तेरी गली में,
श्रीमती कुसुम त्रिपाठी -हर तरफ हर जगह,
श्रीमती उषा कुमावत -कस्मे हम अपनी जान,
के के त्रिपाठी - कल रात जिंदगी से मुलाक़ात हो गई,
श्रीमती सुधा व्यास - उनको ये शिकायत है,
ईश्वर जैन - तेरे आने की जब खबर महके,
अजीत सिंह खींची - नियते शौक ना भर ना जाए कही,
हिम्मत सिंह कोठारी - चांदी जैसा रंग है तेरा,
अखिलेश शर्मा- जिंदगी जब भी तेरी बज्म में लाती है हमें,
श्रीमती मंजू सनाढ्य - कुछ और जमाना कहता है,
अजय गोयल - दर्द की बारिश सही जरा माध्यम आहिस्ता चल,
श्रीमती मधु - महोब्बत की झूठी कहानी पे रोये,
श्रीमती कल्पना - है जिंदगी कितनी खूबसूरत,
कमल सोंधी - चिट्ठी ना कोई संदेश,
श्रीमती नलिनी बंधु - क्यो जिंदगी की राह में मज़बूर हो गए
दिलीप सुराणा - होठों से छू तुम,
भगवान दास तिलवानी - शब के जागे हुए तारों को,
दिलीप गभरानी - तुम को देखा तो ये ख्याल आया,
अरुण चौबीसा - आज जाने की जिद ना करो,
श्रीमती नूतन कोठारी -मुझे गम भी उनका अजीज है,
राज कुमार बाफना - सुना था के वो आयेगे अंजुमन में,
श्रीमती शीला चौधरी - दिल के अरमान,
श्रीमती लक्ष्मी असवानी - ना जाने क्या हुआ,
श्रीमती ज्योति मोदियानी - अगर हम कहें और वो मुस्करा दें,
निर्मल दामानी - यूँ हसरतो के दाग और रो लिए
मुख्य अतिथि नीरज गट्टानी ने सदस्यो की उम्दा प्रस्तुतियों पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए 6 नये सदस्यों का स्वागत किया |
राष्ट्रगान से कार्यक्रम समाप्त हुआ |