उदयपुर। शहर की प्रतिष्ठित सांस्कृतिक संस्था सुरों की मंडली संस्था की महिला विंग द्वारा आयोजित संगीतमय संध्या शाम-ए-ग़ज़ल मधुश्री बैंक्वेट हॉल, अशोका पैलेस में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। शाम 5:30 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में उदयपुर के प्रतिभाशाली कलाकारों ने अपनी सुरमयी प्रस्तुतियों से ग़ज़ल प्रेमियों का दिल जीत लिया और पूरे माहौल को संगीत की मधुरता से सराबोर कर दिया।
संस्थापक अध्यक्ष मुकेश माधवानी ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य संगीत जगत की उभरती प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना और ग़ज़ल जैसी पारंपरिक विधा को नई पीढ़ी तक पहुँचाना है। उन्होंने बताया कि संस्था भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से शहर की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्था के सचिव अरुण चौबीसा ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रम समाज में सकारात्मकता का संचार करते हैं और कला के प्रति लोगों की रुचि को बढ़ाते हैं। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को संगीत और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।
कोषाध्यक्ष योगेश उपाध्याय ने बताया कि संस्था का उद्देश्य उदयपुर की छिपी हुई संगीत प्रतिभाओं को एक सशक्त मंच प्रदान करना है। शाम-ए-ग़ज़ल के माध्यम से पारंपरिक गायकी को जीवित रखने और युवाओं को इस समृद्ध विरासत से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
इन कलाकारों ने दी प्रस्तुतियां
कार्यक्रम की संयोजिका मधु केवल्या ने बताया कि इस अवसर पर आयोजित संगीतमय संध्या में कलाकारों ने अपनी मधुर प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। नूतन जी बेदी ने रफ्ता रफ्ता, मेघा गोस्वामी ने चांदी जैसा रंग है तेरा, संगीता गोस्वामी ने रस्मे उल्फत को निभाएं, आराध्या वैष्णव ने दिल चीज़ क्या है, सुरेंद्र व्यास ने दिल आज शायर है, विजय राजपूत ने दीवारों दर से उतरकर, भावना जैन ने वो कागज़ की कश्ती और कमल जुनेजा ने हम तेरे शहर में आए हैं की प्रस्तुति दी।
इसी क्रम में माला ने क्यों ज़िंदगी की राह में, राजलेश जीनगर ने होंठों से छू लो तुम, किशोर यादव ने ना किसी के दिल का, मनोहर मुखिया ने चौदहवीं का चाँद हो, रामेश्वर पानेरी ने चिट्ठी आई है, अरुण चौबीसा ने होश वालों को खबर क्या, महावीर जैन ने दिल ढूंढता है और निखिल माहेश्वरी ने इस तरह मोहब्बत की शुरुआत कीजिए प्रस्तुत कर श्रोताओं का मन मोह लिया।
उन्होंने बताया कि मधु शर्मा ने दिल में एक लहर सी उठी है अभी, मोना कारवा ने जिए तो जिए कैसे, गोपाल गोठवल ने अपनी जुल्फें मेरी, रमेश दतवानी ने रंग और नूर, गीता सिंह राठौड़ ने किसी नज़र को तेरा, मोहन सोनी ने तुमको देखा तो ये ख्याल आया, ज्योति मोदियानी ने ज़िंदगी में सदा मुस्कुराते रहो, नरेश शर्मा ने तू जो नहीं तो कुछ भी नहीं है, मधुबाला ने ना कजरे की धार, गौरव स्वर्णकार ने ज़िंदगी अब भी तेरी बज़्म में एवं दिव्या सारस्वत ने प्यार का पहला खत और संदीप कर्णपुरिया ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।