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विश्व कला दिवस का ऐतिहासिक महत्व - डॉ. श्रीनिवास महावर

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15 Apr 26
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विश्व कला दिवस का ऐतिहासिक महत्व - डॉ. श्रीनिवास महावर

उदयपुर| जनमत मंच के तत्वाधान में विश्व कला दिवस का ऐतिहासिक महत्व विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए  अध्यक्ष डॉ.श्रीनिवास महावर ने बताया कि-

विश्व कला दिवस प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल को लियोनार्डो दा वीन्सी के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है (लियोनार्डो दा वीन्सी (1452-1519) पुनर्जागरण काल के एक महान इतालवी चित्रकार, वैज्ञानिक, इंजीनियर और आविष्कारक थे, जिन्हें उनके समय से आगे की सोच के लिए "बहुमुखी प्रतिभा का धनी" माना जाता है। वे दुनिया की सबसे प्रसिद्ध पेंटिंग 'मोना लिसा'और 'द लास्ट सपर' के रचयिता थे। 

कला के विकास को,बढ़ावा देने के लिए  विश्व कला दिवस, 2019 में यूनेस्को महासभा के 40 वें सत्र में,जो समाज के बीच संबंधों को सुदृढ़ करने,कलात्मक अभिव्यक्तियों की विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने और सतत विकास में कलाकारों के योगदान को उजागर करने के लिए घोषित किया गया था।

उन्होंने कला के मुख्य 10 प्रकारों में चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला, संगीत, साहित्य, नृत्य, रंगमंच (नाट्य), सिनेमा, फोटोग्राफी और डिजिटल कला आदि के बारे में बताते हुए कहा कि। ये रूप दृश्य, प्रदर्शन और व्यावहारिक माध्यमों से मानव भावनाओं और विचारों को अभिव्यक्त करते है। जो विस्तार से इस प्रकार है।

1.चित्रकला (Painting): कैनवास, कागज या दीवारों पर रंगों के माध्यम से दृश्य बनाना।

2.मूर्तिकला (Sculpture): पत्थर, धातु, या लकड़ी को तराशकर त्रि-आयामी (3D) आकृतियां बनाना आदि।

3.वास्तुकला/स्थापत्य कला (Architecture): भवनों, पुलों और स्मारकों की डिजाइनिंग और निर्माण

4.संगीत (Music): स्वर और ताल के माध्यम से भावों की अभिव्यक्ति।

5.साहित्य (Literature): भाषा और शब्दों के माध्यम से विचारों को लिपिबद्ध करना।

6.नृत्य (Dance): लयबद्ध शरीर संचालन के माध्यम से नृत्य प्रस्तुति।

7.रंगमंच(नाट्य)Theatre: मंच पर अभिनय के माध्यम से कहानी प्रस्तुत करना।

8.सिनेमा/फिल्म (Film): चलचित्रों के माध्यम से कलात्मक कहानी कहना।

9.फोटोग्राफी (Photography): कैमरे के माध्यम से प्रकाश और दृश्यों को कैद करना

10.डिजिटल कला (Digital Art): कंप्यूटर, सॉफ्टवेयर या टैबलेट का उपयोग करके बनाई गई कला, आदि।ये कलाएं मानव संस्कृति और रचनात्मकता के विभिन्न पहलुओं को दर्शाती है।

मंच के सचिव शिरीष नाथ माथुर एवं सहायक आचार्य आजाद मीणा ने
बताया कि-

कला ही आत्मिक शान्ति का माध्‍यम है। यह ‍कठिन तपस्‍या है, साधना है। इसी के माध्‍यम से कलाकार सुनहरी और इन्‍द्रधनुषी आत्‍मा से स्‍वप्निल विचारों को साकार रूप देता है। कला में ऐसी शक्ति होती है कि वह लोगों की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर उसे ऊँचे स्‍थान पर पहुँचा देती है।


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