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आंखों पर पट्टी बांधकर खेली दो-दो शतरंज की बाजियां, उदयपुर के 6 वर्षीय गौरिक लोढ़ा ने बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान

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25 May 26
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आंखों पर पट्टी बांधकर खेली दो-दो शतरंज की बाजियां, उदयपुर के 6 वर्षीय गौरिक लोढ़ा ने बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान

उदयपुर। प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती, यह बात उदयपुर के छह वर्षीय बाल प्रतिभा ळंनतपा स्वकीं ने साबित कर दिखाई है। महज 5 वर्ष 8 माह की उम्र में गौरिक ने आंखों पर पट्टी बांधकर एक साथ दो खिलाड़ियों के खिलाफ ब्लिट्ज चेस मुकाबले खेलते हुए ऐसा अद्भुत प्रदर्शन किया कि उनका नाम इंड़िया बुक आॅफ रिकाॅर्ड्स में दर्ज हो गया। उनकी इस उपलब्धि ने उदयपुर सहित पूरे राजस्थान को गौरवान्वित कर दिया है।
गौरिक की यह उपलब्धि केवल एक रिकॉर्ड नहीं, बल्कि असाधारण मानसिक क्षमता, गजब की स्मरण शक्ति और अद्वितीय एकाग्रता का प्रतीक बन गई है। आंखों पर पट्टी बंधी होने के बावजूद उन्होंने दोनों शतरंज मुकाबलों की हर चाल को दिमाग में याद रखते हुए शानदार खेल का प्रदर्शन किया। इतनी कम उम्र में ब्लाइंडफोल्ड चेस जैसी कठिन विधा में सफलता हासिल करना अपने आप में दुर्लभ माना जाता है।
इस उपलब्धि के पीछे वैज्ञानिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉ. पश्मीना जैन द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण के साथ जयपुर स्थित ।ठब् - । ठतंपद ब्वंबी के प्रशिक्षक प्रवीण पारीक एवं निशा पारीक ने गौरिक को सेन्सरी एनहेंसमेन्ट, टाइमिंग और मानसिक एकाग्रता का नियमित अभ्यास करवाया। उनके मार्गदर्शन ने गौरिक की प्रतिभा को नई दिशा और ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम के आयोजन और बच्चों को मंच उपलब्ध कराने में त्वबाूववके ैबीववस की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्कूल ने सेन्सरी एनहेंसमेन्ट प्रोग्राम के वेन्यू पार्टनर के रूप में इस उपलब्धि को सफल बनाने में विशेष सहयोग दिया।
गौरिक के परिवार ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों को यदि सही दिशा, सकारात्मक माहौल और निरंतर प्रोत्साहन मिले तो वे छोटी उम्र में भी बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। परिवार का मानना है कि अभ्यास, आत्मविश्वास और अनुशासन ही सफलता की असली कुंजी हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गौरिक लोढ़ा की यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी। जिस उम्र में बच्चे सामान्य खेलों में रुचि लेते हैं, उस उम्र में गौरिक ने अपनी अद्भुत मानसिक क्षमता से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। खेल जगत और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि भविष्य में गौरिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिताओं में भी उदयपुर और राजस्थान का नाम रोशन करेंगे।
 


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