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नन्हे मास्टरमाइंड का बड़ा कारनामारू आंखों पर पट्टी बांधकर दो खिलाडि़यों से खेली शतरंज, गौरीक लोढ़ा ने बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान

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01 Jun 26
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नन्हे मास्टरमाइंड का बड़ा कारनामारू आंखों पर पट्टी बांधकर दो खिलाडि़यों से खेली शतरंज, गौरीक लोढ़ा ने बनाया इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान

उदयपुर। प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए उदयपुर के 5 वर्षीय बाल प्रतिभा गौरीक लोढ़ा ने एक ऐसी उपलब्धि हासिल की है, जिसने न केवल शहर बल्कि पूरे राजस्थान का गौरव बढ़ाया है। आंखों पर पट्टी बांधकर एक साथ दो खिलाडि़यों के साथ ब्लिट्ज शतरंज खेलने का अनोखा कीर्तिमान स्थापित कर गौरीक ने इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराया है।
इतनी कम उम्र में हासिल की गई यह उपलब्धि गौरीक की असाधारण स्मरण शक्ति, गहन एकाग्रता और अद्भुत मानसिक क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने बिना किसी दृश्य सहायता के केवल अपने दिमाग में शतरंज की बिसात और चालों को याद रखते हुए दो अलग-अलग खिलाडि़यों के साथ एक साथ मुकाबला खेलकर सभी को हैरत में डाल दिया।
इस रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि 16 अप्रैल 2026 को हुई। उस समय गौरीक की आयु मात्र 5 वर्ष 8 माह 13 दिन थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी छोटी उम्र में इस स्तर का प्रदर्शन दुर्लभ है और यह भविष्य में बड़ी उपलब्धियों की मजबूत नींव साबित हो सकता है।
गौरीक की इस सफलता के पीछे सुनियोजित प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास की अहम भूमिका रही। डॉ. पश्मीना जैन के मार्गदर्शन तथा जयपुर स्थित ए ब्रेन कोच के प्रशिक्षकों प्रवीण पारीक और निशा पारीक द्वारा दिए गए सेंसरी एन्हांसमेंट ट्रेनिंग ने उनकी मानसिक क्षमता को नई दिशा प्रदान की। नियमित अभ्यास और विशेष प्रशिक्षण के माध्यम से गौरीक ने अपनी याददाश्त, एकाग्रता और विश्लेषण क्षमता को लगातार विकसित किया।
इस उपलब्धि में रॉकवुड्स स्कूल ने भी महत्वपूर्ण सहयोग दिया। सेंसरी एन्हांसमेंट प्रोग्राम के वेन्यू पार्टनर के रूप में विद्यालय ने बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने में सराहनीय भूमिका निभाई।
गौरीक के माता-पिता सिद्धार्थ लोढ़ा और सलोनी लोढ़ा ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चों की क्षमताओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा, सकारात्मक वातावरण और उचित मार्गदर्शन दिया जाए तो वे असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल कर सकते हैं।
गौरीक की इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि उम्र चाहे कितनी भी छोटी क्यों न हो, यदि प्रतिभा के साथ मेहनत, अनुशासन और सही प्रशिक्षण जुड़ जाए तो सफलता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं। आज गौरीक लोढ़ा युवा पीढ़ी और अभिभावकों के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। आंखों पर पट्टी थी, लेकिन सपनों पर नहीं,गौरीक ने अपनी प्रतिभा से इतिहास रच दिया।


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