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अनेकान्त एवं स्यादवाद: विश्व शांति का विकल्प

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13 Jun 26
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अनेकान्त एवं स्यादवाद: विश्व शांति का विकल्प

विज्ञान समिति के दर्शन विज्ञान प्रकोष्ठ के तत्वावधान में शोधार्थी सुशान्त जैन द्वारा "अनेकान्त एवं स्यादवाद: विश्व शांति का विकल्प" विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। अपने प्रवचन में सुशान्त जैन ने विभिन्न आगमों के संदर्भ देकर अनेकान्त और स्यादवाद की पद्धति की सुस्पष्ट और उपयोगी व्याख्या की तथा दैनिक जीवन एवं वैश्विक परिदृश्य में इनके महत्व को रेखांकित किया।
मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि आज के समय में, जब वैचारिक कट्टरता, असहिष्णुता और मतभेदों के कारण सामाजिक तनाव बढ़ रहे हैं, अनेकान्तवाद और स्यादवाद की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। ये सिद्धांत हमें सिखाते हैं कि मतभेद विरोध का नहीं, बल्कि व्यापक सत्य की खोज का अवसर हैं। वस्तुतः अनेकान्त और स्यादवाद केवल दार्शनिक अवधारणाएँ नहीं, बल्कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, लोकतांत्रिक संवाद और वैश्विक सद्भाव की आधारशिला हैं। यही कारण है कि ये सिद्धांत आज भी मानवता को विवेक, सहिष्णुता और समन्वय का अमूल्य संदेश प्रदान करते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. श्याम लाल गोदावत ने की। चर्चा में इन्जीनियर राजेन्द्र खोखावत, डॉ. कर्नल डी. एस. बया, लक्ष्मण कर्णावत, डॉ. पुष्पा कोठारी आदि ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. एन. एल. कच्छारा ने किया।
समारोह में कुलप्रमुख डॉ. के. एल. कोठारी, डॉ. महीप भटनागर, डॉ. आर. के. गर्ग, डॉ. आई. एल. जैन, डॉ. के. पी. तलेसरा, इन्जीनियर आर. के. चतुर, डॉ. सुजान सिंह, डॉ. बी. एल. चावत सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।


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