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राष्ट्र विमर्श परिवर्तन की ऐतिहासिक गर्जना - प्रो. बीपी शर्मा

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13 Jun 26
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राष्ट्र विमर्श परिवर्तन की ऐतिहासिक गर्जना - प्रो. बीपी शर्मा

उदयपुर। वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप समिति के अध्यक्ष प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने कहा कि 17 जून 2026 को प्रताप गौरव केन्द्र ‘राष्ट्रीय तीर्थ’ के तत्वावधान में होने जा रहा हल्दीघाटी विजय सार्द्ध चतुःशती समारोह केवल एक स्मृति आयोजन नहीं, बल्कि राष्ट्र के ऐतिहासिक विमर्श को पुनः स्थापित करने का महाअभियान है। विमर्श परिवर्तन की राष्ट्र गर्जना है। यह समारोह देश और विश्व के समक्ष उन ऐतिहासिक तथ्यों को प्रमाणिक रूप से प्रस्तुत करेगा, जिन्हें लंबे समय तक विकृत अथवा मिथ्या रूप में प्रचारित किया जाता रहा। हल्दीघाटी युद्ध की 450वीं वर्षगांठ पर हो रहा यह आयोजन उस सत्य को दृढ़ता से स्थापित करेगा कि हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप ने अदम्य शौर्य, रणनीति और राष्ट्रनिष्ठा के बल पर अकबर की सेना को परास्त किया था। महाराणा भूपाल स्टेडियम गांधी ग्राउंड में प्रातः 9.30 बजे होने वाली राष्ट्र चेतना संकल्प सभा को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत संबोधित करेंगे।

प्रो. शर्मा ने कहा कि पिछले साढ़े चार सौ वर्षों से यह मिथ्या प्रचारित किया जाता रहा कि हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की विजय हुई थी। वस्तुतः यह ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत एक भ्रम था। हल्दीघाटी विजय सार्ध चतुःशती समारोह इस भ्रम का निराकरण करते हुए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह विमर्श स्थापित करेगा कि हल्दीघाटी का युद्ध महाराणा प्रताप की निर्णायक विजय का प्रतीक था तथा अकबर की सेना पराजित होकर वापस लौटी थी।

उन्होंने कहा कि विदेशी मूल के आक्रांताओं द्वारा आठवीं शताब्दी से प्रारम्भ हुए आक्रमणों के दौर में मेवाड़ ने सदैव अपनी सम्प्रभुता, स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा की। जब उजबेकिस्तान मूल के बाबर की तीसरी पीढ़ी के वंशज अकबर ने भारत के अनेक राजाओं को अपने प्रभाव में लेकर साम्राज्यवादी विस्तार का अभियान प्रारम्भ किया, तब महाराणा प्रताप ने उसके समक्ष आत्मसमर्पण करने अथवा अधीनता स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। उन्होंने अपने स्वाभिमान और मेवाड़ की स्वतंत्रता की रक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी।

प्रो. शर्मा ने कहा कि अकबर ने महाराणा प्रताप पर दबाव बनाने के लिए अनेक शिष्टमंडल भेजे, किन्तु महाराणा प्रताप किसी भी प्रकार के दबाव के आगे नहीं झुके। अंततः उसने आमेर के राजा मानसिंह सहित अनेक सेनापतियों को विशाल सेना के साथ मेवाड़ पर आक्रमण के लिए भेजा। युद्ध के प्रारम्भिक चरण में ही मेवाड़ी सेना का आक्रमण इतना प्रचंड था कि मुगल सेना सात कोस तक पीछे हट गई। स्थिति इतनी विकट हो गई कि मेहतर खान को सैनिकों का मनोबल लौटाने के लिए यह घोषणा करनी पड़ी कि बादशाह अकबर स्वयं युद्धभूमि में पहुंच रहे हैं। तब जाकर मुगल सेना पुनः संगठित होकर लौटी।

उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान महाराणा प्रताप का पराक्रम अपने चरम पर दिखाई दिया। वे अकेले ही उस स्थान तक पहुंच गए जहां मानसिंह का हाथी खड़ा था। चेतक ने अपने अगले पैर हाथी पर टिकाए और महाराणा प्रताप ने पूरी शक्ति से भाले का प्रहार किया। किन्तु मानसिंह हाथी के हौदे में छिप गया, जिससे उसके प्राण बच गए।

प्रो. शर्मा ने कहा कि युद्ध के पश्चात भी मुगल सेना भय और असुरक्षा की स्थिति में रही। मानसिंह के नेतृत्व वाली सेना गोगुंदा के किले में सीमित होकर रह गई। सैनिकों ने सुरक्षा के लिए खाइयां खोदीं और बाहर निकलने का साहस नहीं किया। रसद संकट इतना गहरा गया कि उन्हें उन घोड़ों का मांस खाना पड़ा जिनके सवार युद्ध में मारे जा चुके थे। भोजन के अभाव में कच्ची केरियां खाने से अनेक सैनिक बीमार पड़ गए, किन्तु फिर भी वे चार माह तक किले से बाहर निकलकर स्वतंत्र रूप से रसद जुटाने का साहस नहीं कर सके।

उन्होंने कहा कि बाद में जब मुगल सेना बड़ी कठिनाई से आगरा लौटी, तब अकबर स्वयं भी उसके प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं था। उसने नाराज होकर मानसिंह की ड्योढ़ी माफ कर दी और उसे छह माह तक दरबार में प्रवेश की अनुमति नहीं दी। यह स्थिति स्वयं इस बात का संकेत है कि अभियान अपेक्षित परिणाम प्राप्त नहीं कर सका था।

प्रो. शर्मा ने कहा कि हल्दीघाटी का युद्ध केवल एक सैन्य संघर्ष नहीं था, बल्कि स्वतंत्रता, स्वाभिमान और राष्ट्रधर्म की रक्षा का महायुद्ध था। हल्दीघाटी विजय सार्ध चतुःशती समारोह इसी ऐतिहासिक सत्य, राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान के पुनर्जागरण का उद्घोष है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास के वास्तविक स्वरूप को स्थापित करने का कार्य करेगा।

घर-घर पहुंच रहे पत्रक

-प्रताप गौरव केन्द्र के निदेशक अनुराग सक्सेना ने कहा कि ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया (इस वर्ष 17 जून) के पावन अवसर पर सम्पूर्ण देश में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जाएगी। साथ ही, 18 जून को प्रतिवर्ष हल्दीघाटी विजय दिवस मनाया जाता है। गत वर्ष से अब तक हल्दीघाटी विजय के 450वें वर्ष के उपलक्ष्य में प्रताप गौरव केन्द्र द्वारा वर्षभर विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन आयोजनों का समापन भी 17 जून को राष्ट्र चेतना संकल्प सभा से होगा।

उन्होंने बताया कि सभा के निमित्त हल्दीघाटी विजय की गौरव गाथा के 2 लाख पत्रक छपवाए गए हैं। कार्यकर्ता घर-घर जाकर पत्रक बांट रहे हैं। पत्रक वितरण उदयपुर जिले सहित बांसवाड़ा, डूंगरपुर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, भीलवाड़ा, सलूम्बर, अजमेर, ब्यावर, जयपुर, जोधपुर, कोटा, झालावाड़ आदि जिलों में किया जा रहा है। साथ ही, मेवाड़-वागड़ की सीमा से सटे गुजरात और मध्यप्रदेश के मंदसौर, साबरकांठा आदि जिलों में भी हल्दीघाटी विजय की गौरवगाथा पहुंच रही है। उन्होंने बताया कि सभा के लिए एक हजार से अधिक संत-महात्माओं को निमंत्रण दिया जा रहा है। साथ ही, राजस्थाऩ के विभिन्न समाजों के पांच हजार प्रबुद्धजनों तथा देश भर से 500 से अधिक समाजसेवियों को विशिष्ट अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जा रहा है।

20 से अधिक समितियों का गठन

-कार्यक्रम संयोजक सीए महावीर चपलोत ने बताया कि आयोजन के लिए 20 से अधिक समितियों का गठन किया जा चुका है। इनमें आवास, यातायात, टेंट निर्माण, मंच सज्जा, पत्रक वितरण, भोजन निर्माण, भोजन वितरण, शीतल पेय, पार्किंग प्रबंधन, स्वागत समिति, सुरक्षा समिति, चिकित्सा, स्वच्छता सहित विभिन्न व्यवस्थाओं से जुड़ी समितियां सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। हजारों कार्यकर्ता दिन-रात तैयारियों में जुटे हुए हैं। समन्वय के लिए प्रताप गौरव केन्द्र में केन्द्रीय कार्यालय भी स्थापित किया गया है।

तीन डोम, गर्मी से बचाव का पूरा प्रयास

-समारोह में लगभग 25 से 30 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान है। आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए करीब दो लाख वर्गफुट क्षेत्रफल में विशाल एवं सुसज्जित डोम तैयार किया जा रहा है। डोम में अलग-अलग ब्लॉक बनाकर 20 हजार से अधिक कुर्सियों की व्यवस्था की जाएगी। गर्मी को देखते हुए पंखों, मिस्ट सिस्टम तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है, ताकि आगंतुकों को अधिकतम सुविधा मिल सके। आगंतुकों का प्रवेश पहाड़ी बस स्टैंड के द्वार से रहेगा। गुरु गोविन्द सिंह स्कूल की ओर से विशिष्ट अतिथियों का प्रवेश रखा गया है और लवकुश स्टेडियम की ओर से अतिविशिष्ट अतिथियों का प्रवेश रखा गया है।

हल्दीघाटी की माटी से बन रही प्रताप की तस्वीर

-हल्दीघाटी की माटी से महाराणा प्रताप और सरसंघचालक डॉ. मोहनराव भागवत की तस्वीर बनाई जा रही है। यह तस्वीर कलाकार मनोहर कलार्थी बना रहे हैं। हल्दीघाटी की माटी से तस्वीर बनाने का यह अनूठा प्रयोग पहली बार किया जा रहा है। मंच के सामने मिट्टी से कुम्भलगढ़, चित्तौड़गढ़ की प्रतिकृति बनाई जाएगी, साथ ही हल्दीघाटी महासमर के दृश्यों का अंकन भी किया जाएगा। चौराहों को भगवा पताकाओं से सजाया जाएगा और देशभक्ति गीत गूजेंगे।

बाहर से आ रहे आगंतुकों को मिलेंगे भोजन पैकेट

-भोजन व्यवस्था प्रमुख नानालाल वया ने बताया कि उदयपुर के बाहर से आ रहे आगंतुकों को लौटते समय भोजन पैकेट प्रदान किए जाएंगे। इसके लिए 25 हजार से अधिक भोजन पैकेट की व्यवस्था की जा रही है। भोजन वितरण पार्किंग स्थलों पर किया जाएगा। वितरण प्रमुख धीरज बोड़ा ने बताया कि कार्यक्रम समाप्ति के बाद लौटते समय भोजन पैकेट वाहनों में प्रदान किए जाएंगे।

15 से तीन दिवसीय प्रदर्शनी

-प्रदर्शनी प्रमुख डॉ. रमन सूद ने बताया कि महाराणा भूपाल स्टेडियम में 15 जून से ही तीन दिवसीय ‘मेवाड़ शौर्य प्रदर्शनी’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें मेवाड़ के शौर्यपूर्ण इतिहास, वीरों और वीरांगनाओं के चित्र पूर्ण ऐतिहासिक विवरण के साथ प्रदर्शित किए जाएंगे।

चिकित्सा सुविधाओं का भी विशेष ध्यान

-चिकित्सा व्यवस्था समिति के डॉ. राजवीर सिंह के अनुसार कार्यक्रम स्थल पर आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध रहेगी। एक एम्बुलेंस भी आयोजन स्थल पर तैनात रहेगी। एमबी हॉस्पिटल से चिकित्सक, छात्र चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ आदि भी रहेंगे। इमरजेंसी में एक विशेष टीम इस दिन सक्रिय रहेगी। हर टीम में एक महिला चिकित्सक भी होगी।

पार्किंग से आयोजन स्थल तक ई-रिक्शा की तैयारी

-राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में उदयपुर संभाग सहित विभिन्न जिलों से आने वाले वाहनों की पार्किंग विद्या भवन, फतह स्कूल प्रांगण में रहेगी। वहां से कार्यक्रम स्थल तक लाने और कार्यक्रम के बाद लेजाने के लिए ई-रिक्शा लगाने की तैयारी की जा रही है। जहां तक संभव होगा, ई-रिक्शा का उपयोग किया जाएगा। इसके बाद अन्य वाहनों की व्यवस्था की जाएगी।

पार्किंग पर भी पेयजल

-बाहर से आने वाले अतिथियों एवं प्रबुद्धजनों के वाहनों के लिए विद्या भवन एवं फील्ड क्लब परिसर में विशाल पार्किंग की व्यवस्था की गई है। पार्किंग स्थलों से समारोह स्थल तक आवागमन के लिए आंतरिक यातायात व्यवस्था भी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर शीतल पेय की भी पर्याप्त व्यवस्था रहेगी।

सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त आयोजन

-यह प्रयास किया जाएगा कि पूरा आयोजन सिंगल यूज प्लास्टिक से मुक्त रहे। अतिथियों के लिए पानी की बोतल मिट्टी की उपयोग में ली जाएगी, वहीं कूड़ेदान भी मिट्टी के उपयोग में लिए जाएंगे। 


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