हज़रत सूफ़ी नज़ीर साहब क़ादरी, चिश्ती, नूरी रहमतुल्लाह अलैहे के उर्स में उमड़ा अकीदतमंदों का जनसैलाब, कुल की रस्म और दुआ के साथ दो दिवसीय उर्स का समापन|
ब्रह्मपोल स्थित दरगाह हज़रत इमरत रसूल बाबा परिसर में स्थित हज़रत सूफ़ी नज़ीर साहब क़ादरी, चिश्ती, नूरी रहमतुल्लाह अलैह के दो दिवसीय उर्स का समापन मशहूर कलाम आज रंग हैं के साथ हुआ |
शैदाई हिदायत तुल्ला ने बताया की सोमवार सुबह से ही उर्स की तक़रीबात शुरू हो गई | जिसमें नागौर से तशरीफ़ लाये जावेद क़ादरी साहब एवं दीगर हज़रात ने सूफियाना कलाम पेश किए | जिसमें
" कुछ नहीं मांगता शाहों से ये शैदा तेरा "
"दर्द सह कर भी तेरा नाम लिए जाते हैं, तेरे दीवाने तुझे याद किए जाते हैं "
"ये बात किस क़द्र हसीन जो कह गये मोईनुद्दीन
मेरा बादशाह हुसैन हैं "
आखरी में हज़रत अमीर खुसरो का मशहूर कलाम " आज रंग हैं ऐ मां रंग हैं री, मेरे मेहबूब के घर रंग हैं री " पढ़ा गया" |
फातिहा ख्वानी के बाद पूरे मुल्क में अमन शांति एवं तरक्की के लिए दुआ की गई | हज़रत सूफी निसार साहब बासनी ने सभी को उर्स की मुबारक बाद पेश की | जायरीनो को लंगर तकसीम किया गया |