उदयपुर। घुमंतू समाज के युवा-युवतियों तथा समाज के प्रमुख जन का भव्य सम्मेलन प्लेसमेंट सभागार, सीटीएई महाविद्यालय, महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर में उत्साह एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। उदयपुर में अपने प्रकार का यह पहला सम्मेलन रहा, जिसमें घुमंतू समाज के युवाओं को एक मंच पर लाकर वर्तमान समय में रोजगार, स्वरोजगार, पारंपरिक व्यवसायों के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों, कौशल विकास, नवाचार तथा समाज के समग्र विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गंभीर मंथन किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य केवल समस्याओं की चर्चा करना नहीं, बल्कि युवाओं को नई दिशा, आत्मविश्वास और व्यावहारिक समाधान प्रदान करना था। सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए शिक्षाविदों, विशेषज्ञों एवं वरिष्ठजनों ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें बदलते समय के अनुरूप स्वयं को तैयार करने का संदेश दिया।
सम्मेलन की विशेषता यह रही कि औपचारिक कार्यक्रम प्रारंभ होने से पूर्व सभी प्रतिभागियों, अतिथियों एवं वक्ताओं ने चाय पर आत्मीय वातावरण में एक-दूसरे से परिचय एवं सहज संवाद किया। इस अनौपचारिक चर्चा ने युवाओं और विशेषज्ञों के बीच खुलकर विचारों के आदान-प्रदान का वातावरण बनाया, जिससे सम्मेलन का उद्देश्य और अधिक सार्थक हुआ।
प्रथम सत्र मे वक्ता के रूप में भारत ग्रामीण विकास मंत्रालय के तत्वाधान द्वारा संचालित आईसीआईसीआई (आरसेटी ) से कौशलेन्द्र सिंह ने बताया की आरसेटी बेरोज़गार युवाओं और युवतियों को निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण प्रदान कराती है। सभी प्रशिक्षण पूर्ण रूप से निःशुल्क है तथा प्रशिक्षण पूर्ण होने पर टूलकिट एवं भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा। हमारा उद्देश्य बेरोज़गारों को उनकी रुचि के अनुसार कौशल में निपूर्ण बनाना है ताकि वे भविष्य में अपने को बेहतर दिशा दे सकें। अपना स्वयं का रोज़गार शुरू कर सकें।
इसी सत्र में उद्योगपति हेमंत जैन ने युवाओं को स्वरोजगार तथा उनके लिए किया जा रहे कार्यों पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम में अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह प्रान्त कार्यवाह दीपक शुक्ला ने कहा कि प्रत्येक समाज की ताकत उसका युवा होता है जिस प्रकार हनुमान जी को जामवंत ने अपनी ताकत का स्मरण दिलाया है वैसे ही हम सब युवाओं को अपनी अंदर की प्रतिभा और ताकत को पहचान उसके अनुसार कार्य करना चाहिए.। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शहर विधायक ताराचंद जैन ने घुमंतू युवाओं के अपने प्रकार के यह प्रथम कार्यक्रम से उनके रोजगार में नई दिशा व सहायता मिलेगी और स्वयं इसमें हर सम्भव सहयोग के लिए तैयार रहेंगे।
वल्लभनगर पशु चिकित्सा महाविद्यालय के डिन डॉ. शिव शर्मा ने सत्र में बताया की किस प्रकार घुमंतू समाज मूलतः पशुपालक समाज रहा है बस आवश्यकता इस बात ही है कि वह पशुपालन को व्यवस्थित करें तो वह न केवल अपने परिवार का बल्कि अन्य परिवार को रोजगार देने वाला भी बन सकता है
सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण संवाद सत्र रहा। इस दौरान युवा-युवतियों ने रोजगार, स्वरोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, कौशल विकास, शिक्षा, सरकारी योजनाओं की जानकारी, पारंपरिक व्यवसायों की चुनौतियों तथा आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जुड़े अनेक प्रश्न मंच के समक्ष रखे। विशेषज्ञों ने सभी प्रश्नों का विस्तार से उत्तर देते हुए युवाओं को व्यावहारिक समाधान, प्रशिक्षण, सरकारी योजनाओं और उद्यमिता के अवसरों की जानकारी दी। इस खुले संवाद ने सम्मेलन को अत्यंत जीवंत और उपयोगी बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, कला, खेल, सामाजिक सेवा एवं अन्य क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियाँ प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली युवा-युवतियों का सम्मान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।
समापन सत्र में प्रसिद्ध चित्रकार, घुमंतू जाति उत्थान न्यास के प्रांत सह संयोजक डॉ. पुष्कर लोहार ने कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी शक्ति उसके जागरूक, संस्कारित और आत्मविश्वासी युवा होते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने पूर्वजों की गौरवशाली परंपरा, संघर्ष, त्याग और समाज के लिए किए गए योगदान से प्रेरणा लेकर समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।घुमंतू समाज की पारंपरिक कला, शिल्प, हस्तकला एवं व्यवसाय केवल आजीविका का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक पहचान और गौरवशाली विरासत हैं। उन्होंने कहा कि युवा इन परंपरागत कौशलों को आधुनिक तकनीक, डिज़ाइन, नवाचार और डिजिटल विपणन से जोड़कर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकते हैं। अपनी जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक सोच के साथ आगे बढ़ना ही भविष्य की सफलता का मार्ग है।
डॉ. लोहार ने युवाओं से विशेष रूप से दो प्रकार के नशों से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पहला नशा शराब, तंबाकू एवं अन्य मादक पदार्थों का है, जो व्यक्ति और परिवार दोनों को कमजोर करता है, जबकि दूसरा नशा मोबाइल और सोशल मीडिया की अनियंत्रित लत का है, जो युवाओं की एकाग्रता, समय और भविष्य को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि युवा इन दोनों व्यसनों से स्वयं को बचा लें, तो वे अपने जीवन में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।
उन्होंने युवाओं से केवल रोजगार पाने की मानसिकता तक सीमित न रहकर रोजगार देने वाले बनने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वरोजगार, उद्यमिता, नवाचार तथा पारंपरिक व्यवसायों का आधुनिकीकरण ही भविष्य की दिशा है। इस अवसर पर उन्होंने घुमंतू जाति उत्थान न्यास द्वारा समाज के उत्थान के लिए संचालित छह प्रमुख रचनात्मक कार्यों की जानकारी भी युवाओं को दी तथा उनसे इन अभियानों में सक्रिय सहभागिता निभाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर समाजसेवी तथा उद्योगपति हेमेंद्र श्रीमाली, शिक्षाविद, डॉ. शंकर माली,प्रो. विनोद यादव और न्यास से जुड़े डॉ. वीणा सनाढय, नरेन्द्र सोनी, अंजू सोनी, राहुल राठौर,नरेश यादव, चुन्नीलाल पटेल, राजनाथ, नारायण लाल, गणेश वागरिया उपस्थित रहे। सम्मेलन में विभिन्न सत्रों का संचालन न्यास से जुड़े पंकज पालीवाल तथा नाथू लाल माली ने किया।