उदयपुर। पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती के जीवन से प्रेरणा प्राप्त करने का अह्वान आर्य समाज भीलवाड़ा के प्रधान एवं श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री विजय शर्मा ने किया। वे आज उदयपुर के गुलाब बाग स्थित नवलखा महल में पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती की पुण्य तिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती जिनका पूर्व नाम हनुमान प्रसाद चौधरी था तथा वे खनन उद्योग व्यवसायी थे। उनकी महर्षि दयानन्द सरस्वती तथा आर्य समाज के प्रति ऐसी आस्था जगी कि उन्होंने अपना राजशाही वैभव छोड़कर घर परिवार को त्याग कर अपना जीवन आर्य समाज की सेवा में अर्पित कर दिया। वे श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के संस्थापक व आजीवन अध्यक्ष थे।
नवलखा महल वह स्थल है जहां महर्षि दयानन्द सरस्वती मेवाड़ के तत्कालीन महाराणा सज्जन सिंह जी के आमंत्रण पर उदयपुर पधारे तथा नवलखा महल जो कि मेवाड़ शासन का गेस्ट हाउस था। महाराणा सज्जन सिंह जी ने महर्षि दयानन्द को मेवाड़ शासन के राजकीय अतिथि का दर्जा देते हुए नवलखा महल में प्रवास करवाया था। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने साढ़े छह माह नवलखा महल में प्रवास किया। यहां प्रवास के दौरान उन्होंने सत्यार्थ प्रकाश की रचना की। इस प्रकार नवलखा महल एक ऐतिहासिक स्थल होने के साथ साथ आर्य समाज के प्रमुख तीर्थ स्थल का केन्द्र है। परन्तु दुर्भाग्य से आजादी के बाद यह स्थल राज्य सरकार के स्वामित्व में आ गया और इस स्थल को राजस्थान सरकार के आबकारी विभाग का गोदाम बना दिया गया। महर्षि दयानन्द सरस्वती की इस कर्मभूमि पर आबकारी विभाग के शराब का गोदाम होने से आर्य जगत् व्यवथित था और निरन्तर इस प्रयास में था कि यह स्थल आर्य समाज को प्राप्त हो।
पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती, स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती और आर्य समाज के अथक प्रयास से यह स्थल राजस्थान सरकार ने 99 वर्ष की लीज पर निर्धारित शुल्क के साथ वर्ष 1992 में आर्य समाज को सौंपा और लीज डीड में राजस्थान सरकार ने इस स्थल को महर्षि दयानन्द का भव्य स्मारक बनाने की की शर्त लगाई थी। जब यह स्थल आर्य समाज को सौंपा तब पूर्ण जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था। इस स्थल को भव्यता व जीर्णाेद्धार करने की प्रथम आहूति पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने एक करोड़ रु. दान देकर की उनकी इस प्रकार की दान आहूति से इस स्थल का जीर्णोद्धार हुआ। ऐसे महामना दानी व्यक्तित्व के जीवन से हमें प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी सच्चिदानन्द सरस्वती ने वैदिक राष्ट्रवाद एक विमर्श पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्य समाज का देश की आजादी में प्रमुख योगदान रहा है। वे समाज सुधार के साथ साथ राष्ट्रप्रेम की भी प्रेरणा देता है। महर्षि दयानन्द सरस्वती ने स्पष्ट किया कि विदेशी शासन कितना भी अच्छा क्यों न हो, वह स्वराज्य का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने 1876 में ही ’भारत भारतीयों के लिए’ और ’स्वराज’ का नारा दिया था। उनका मानना था कि राजनीतिक स्वतंत्रता की नींव सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पुनरुत्थान पर टिकी है। उन्होंने वेदों के प्रचार के माध्यम से लोगों में अपनी प्राचीन संस्कृति और धर्म पर गर्व करना सिखाया। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती जी भी स्वतत्रंता सैनानी थे। वे देश की आजादी के लिए जेल भी गए। अतः उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व के लिए प्रेरणादायी है।
पूज्य स्वामी सुमेधानन्द सरस्वती ने कहा कि आज नवलखा महल के प्रकल्प देश ही नहीं अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। इसका सबसे पहले श्रेय पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती को जाता है। उन्होंने नवलखा महल को राजस्थान सरकार से आर्य समाज को दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका तो निभाई वरन् इसके जीर्णाेद्धार के लिए एक करोड़ रु. के दान की आहूति आर्य समाज के भामाशाह पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती ने दी। ऐसे महामना की प्रेरणा से उनका सानिध्य प्राप्त करने वाले श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के वर्तमान अध्यक्ष श्री अशोक आर्य जी व उनकी टीम ने इस स्थल पर विभिन्न स्थापित कर पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की है।
इस अवसर पर आबूरोड के प्रधान एवं श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के उपाध्यक्ष श्री मोती लाल आर्य ने कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती के प्र्रेरणा नवलखा महल में प्राप्त कर आदिवासी क्षेत्र में गोविन्द गुरु ने मेवाड़ व वागड़ में स्वतंत्रता की अलख जगाई। इस स्थल को अपनी पुरानी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि प्रदान कराने में पूज्य स्वामी तत्त्वबोध सरस्वती ने अपना सर्वस्व अर्पित किया। अतः ऐसे महामना दानी को मैं प्रणाम करता हूं। हमें उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करनी चाहिए।
राजसमन्द की विधायक दीप्ति माहेश्वरी ने कहा कि नवलखा महल व पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती से उनका जुड़ाव उनकी माता श्रीमती किरण माहेश्वरी के समय से ही रहा है। ें देशप्रेम, राष्ट्रप्रेम की भावना पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती के रग रग में भरी थी। उन्होंने राष्ट्रभक्ति के इस स्थल नवलखा महल को अपना वैभव व पहचान दिलाई। उन्हीं की इस प्रेरणा से आज यह स्थल भव्य बन सका है।
स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत करते हुए श्रीमद् दयानन्द सत्यार्थ प्रकाश न्यास के अध्यक्ष श्री अशोक आर्य ने बताया कि मेरा सौभाग्य है कि मुझे पूज्य स्वामी तत्त्वबोध जी सरस्वती का सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उनका नवलखा महल को अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का एक सपना था और इसके लिए वे हमेशा प्रयासरत रहते थे। उनकी इस प्रेरणा से हम नवलखा महल को आज अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला पाये हैं।
आज के कार्यक्रम का प्रारम्भ श्री नवनीत आर्य के पुरोहित्य में यज्ञ से हुआ। यज्ञ में न्यास के संयुक्त मंत्री डॉ. अमृतलाल तापड़िया, श्रीमती उगान्ता यादव, एवं कई कार्यकर्ता उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन आर्य समाज हिरणमगरी,उदयपुर के प्रधान श्री संजय शांडिल्य ने किया और धन्यवाद न्यास के कोषाध्यक्ष श्री नारायण लाल मित्तल ने किया।
इस अवसर पर न्यास के न्यास मंत्री श्री भवानीदास आर्य,उपाध्यक्ष श्री मोती लाल आर्य,न्यासी डॉ.एस.के.माहेश्वरी,जन सम्पर्क सचिव श्री विनोद कुमार राठौड़,श्री रवीन्द्र राठौड़, श्रीमती उगान्ता यादव,श्रीमती सरला गुप्ता, श्री राजकुमार गुप्ता,श्री इन्द्रप्रकाश यादव, श्री चन्द्रशेखर शर्मा, श्री महेश मित्तल, आर्य समाज हिरणमगरी के पूर्व प्रधान श्री भंवरलाल आर्य एनएमसीसी यूथ की संयोजक श्रीमती ऋचा, श्री जयेश आर्य,श्री हेमेन्द्र, श्री कपिल सोनी, श्री सुभाष गुप्ता,श्रीमती शीतल गुप्ता,शोभित मित्तल, श्री दिव्येश सुथार, सुश्री करिश्मा शर्मा, श्रीमती दुर्गा गोरमात, श्री सिद्धम, श्री गौरव, श्रीमती रेखा,श्री लक्ष्मण,श्री कालू,श्रीमती निरमा,श्री देवीलाल, श्री रमेश पालीवाल,श्री धीरज अरोडा,आर्य समाज हिरणमगरी के मंत्री वेदमित्र आर्य, समाज सेवी सी.ए.श्री सत्यनारायण माहेश्वरी,डॉ.प्रशान्त अग्रवाल,श्रीमती आभा आर्य एवं कई कार्यकर्ता उपस्थित थे।
कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ के साथ हुआ।