उदयपुर, दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन एग्रीविजन-2026 (द्वितीय उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन) का शनिवार को समापन कृषि नवाचार, उद्यमिता और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका पर केंद्रित विभिन्न ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी सत्रों के साथ हुआ।
वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सत्र में अश्विनी शर्मा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए इसके ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि राष्ट्रभावना और देश सेवा की प्रेरणा है।
कृषि उद्यमिता पर आधारित रोल मॉडल सत्र में चार वक्ताओं ने विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव साझा किए। राजेश कुमार ओझा ने ‘ट्राइबल वेदा’, डॉ. श्रवण यादव ने ‘ग्रामीण युवाओं के लिए जैविक खेती : एक लाभकारी उद्यम’ और अंकित जैन (फसल) ने ‘कृषि में तकनीक एवं नवाचार’ विषय पर व्याख्यान देते हुए युवाओं को आधुनिक तकनीकों और उद्यमिता अपनाने के लिए प्रेरित किया।
महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष पाशा पटेल, जिन्हें ‘बांस मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है, ने बांस की खेती, उसके बहुआयामी उपयोग, किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाओं और पर्यावरण संरक्षण में उसकी भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी।
कार्यक्रम में महिलाओं की कृषि क्षेत्र में भूमिका पर विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें डॉ. विमला डूंकवाल ने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी, नेतृत्व क्षमता और उद्यमिता की संभावनाओं पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।
सम्मेलन की प्रमुख गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए सह-आयोजक सचिव डॉ. अमित कुमार ने बताया कि दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए और कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों से जुड़े 15 उप-विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। सम्मेलन में कृषि नवाचार, तकनीकी विकास, उद्यमिता और युवाओं की भूमिका पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ, जिसमें कुल 624 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
समापन सत्र की अध्यक्षता महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने की। उन्होंने विद्यार्थियों से स्पष्ट विजन के साथ शिक्षा और कौशल विकास पर ध्यान देने तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा, “शिक्षा केवल डिग्री तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्रहित से जुड़ी होनी चाहिए।” उन्होंने बताया कि एग्रीविजन की स्थापना वर्ष 2015 में कृषि विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी।
डॉ. सिंह ने विद्यार्थियों को कृषि नवाचार, रोजगार और उद्यमिता के माध्यम से आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ की तर्ज पर ‘एक पेड़ पिता के नाम’ अभियान चलाने का भी आह्वान किया।
मुख्य अतिथि डॉ. पारस टांक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में युवाओं के लिए रोजगार, स्वरोजगार और उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं को समझने तथा नौकरी खोजने के बजाय रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का आग्रह किया।
विशिष्ट अतिथि विक्रम सिंह फरस्वान ने कहा कि कृषि विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि “जॉब प्रोवाइडर” बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि एग्रीविजन के माध्यम से अब तक लगभग 150 उद्यमी तैयार हो चुके हैं और यह पहल देश के लगभग 60 राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
सम्मेलन का समापन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन के साथ हुआ। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट पोस्टर प्रस्तुतीकरण, मौखिक शोध-पत्र प्रस्तुतीकरण, युवा संसद में प्रभावी भूमिका निभाने वाले प्रतिभागियों तथा विभिन्न प्रदर्शनियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए।
अंत में डॉ. अंशुल शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया तथा सुश्री पीयूषा शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन किया।