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मुस्कान क्लब में हुई देश भक्ति गीतों की प्रतियोगिता

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09 Aug 26
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मुस्कान क्लब में हुई देश भक्ति गीतों की प्रतियोगिता

उदयपुर | पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमानुसार श्रीमती श्रद्धा गट्टाणी की अध्यक्षता में आज ओरिएंटल पैलेस रिसोर्ट रिवाह हॉल में हमारे आगामी स्वतंत्रता दिवस की पूर्व तैयारियों के अंतर्गत मुस्कान क्लब के सदस्यों के बीच देशभक्ति गीतों की प्रतियोगिता आयोजित की गई। पारदर्शिता बनाए रखने के लिये सभी प्रतिभागियों को कोड नंबर आवंटित किए गए।

निर्धारित मापदंडों के आधार पर प्रतिभागियों के मूल्यांकन हेतु डॉ ऋतंभरा राणावत एवं श्री नरेश वेर को निर्णायक (जज) के रूप में आमंत्रित किया गया था। दोनों निर्णायकों का स्वागत श्रीमती रेणु माथुर एवं श्रीमती कुसुमलता त्रिपाठी ने किया। श्रीमती श्रद्धा गट्टाणी का स्वागत श्रीमती रजनी जोशी ने किया।

मंच संचालक सूरजमल पोरवाल ने सभी का स्वागत किया व के.के. त्रिपाठी से दोनों निर्णायकों का परिचय कराया। श्री पोरवाल ने प्रतिभागियों को नियमों से अवगत कराया।

मीडिया प्रभारी प्रोफेसर विमल शर्मा ने बताया कि बिना साज के आयोजित इस प्रतियोगिता में 25 प्रतिभागी ने निर्धारित तीन मिनिट में प्रस्तुति देकर अपने हुनर का प्रदर्शन किया। अंकों के आधार पर निर्णायक मंडल ने प्रथम - अरुण चौबीसा, द्वितीय - संतोष गुप्ता तथा तृतीय स्थान - ईश्वर चंद जैन को प्रदान किया । ये तीनों विजेता प्रतिभागी 15 अगस्त के मुख्य कार्यक्रम के दौरान अपनी प्रस्तुतियाँ देंगे।

अपने संक्षिप्त व सारगर्भित उद्बोधन का प्रारंभ डॉ श्रीमती श्रद्धा गट्टाणी ने वन्दे मातरम् गाकर सभी उपस्थित जनों में उत्साह का संचार किया।

उन्होंने अपने अर्श वाक्य "जी भरकर जियो, जी में भरकर मत जियो" से सभी को कुंठा भुक्त जीवन जीने का संदेश दिया, साथ ही क्लब में नियमित दिन में केरम व ताश खेल खेलने लोगों से स्वच्छता का विशेष ध्यान रखने का आग्रह किया।

डॉ श्रद्धा ने एम. पी. माथुर, आर. सी. जोशी का मधुर मुस्कान पत्रिका तथा डॉ. विमल शर्मा को समाचारों के निरंतर प्रकाशन के लिये मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

निर्णायक डॉ ऋतंभरा ने भी "जय जवान, जय किसान" गीत प्रस्तुत किया।

अंत में राष्ट्रगान हुआ और अल्पाहार के साथ कार्यक्रम समाप्त किया गया।

प्रतिभागियों के कोड क्रम में निम्नलिखित प्रस्तुतियाँ दी - होठों पर सच्चाई, है प्रीत जहाँ की रीत, कर चले हम फ़िदा, किन्ना सोना देश है मेरा (पंजाबी), वीरों ने जब जान गंवाई (कविता), सलाम शहीदों को, होठों पे सच्चाई रहती है, सरहद के उस पार तिरंगा,है प्रीत जहाँ की रीत, जहां डाल-डाल पर, ऐ मेरे प्यारे वतन, माई चलती रहे, चंदन है इस देश की माटी, आ धरती हिंदुस्तान री, ये देश है पुकारता, ऐ मेरे वतन के लोगों, हम लाये हैं तूफान से कश्ती निकाल के, ऐ मेरे वतन के लोगों, हल्दीघाटी में समर लड़यो, चूम के सर पे बाँधे कफ़न, प्रणाम उन को शहीदों को, ऐ मेरे प्यारे वतन, ऐ मेरे प्यारे वतन, सीने में जुनून रखता हूँ (कविता), आओ आज नमन करें (कविता)।

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