उदयपुर, भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग को अपनी अनूठी आवाज़, अभिनय और बहुमुखी प्रतिभा से नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाले महान पार्श्व गायक किशोर कुमार की 97वीं जयंती के अवसर पर उदयपुर के प्रख्यात सूक्ष्म शिल्पकार डॉ. चन्द्रप्रकाश चित्तौड़ा ने उन्हें समर्पित एक विशेष लघु पुस्तिका तैयार की।
डॉ. चित्तौड़ा ने बताया कि यह पुस्तिका केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि भारतीय संगीत जगत में किशोर कुमार के अमूल्य योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक विनम्र प्रयास है। इसमें उनके जीवन, संघर्ष, बहुआयामी व्यक्तित्व और संगीत यात्रा की महत्वपूर्ण झलकियों को संक्षिप्त एवं आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया है।
उन्होंने कहा कि किशोर कुमार केवल एक पार्श्व गायक नहीं थे, बल्कि वे अभिनेता, संगीतकार, गीतकार, निर्माता, निर्देशक और पटकथा लेखक के रूप में भी भारतीय सिनेमा के अद्वितीय कलाकार थे। उनकी मधुर और भावपूर्ण आवाज़ ने प्रेम, विरह, हास्य, रोमांच और जीवन के हर भाव को सहजता से अभिव्यक्त किया। आज भी उनके गीत हर आयु वर्ग के लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय हैं।
डॉ. चित्तौड़ा ने कहा कि "रूप तेरा मस्ताना", "मेरे सपनों की रानी", "ज़िंदगी एक सफर है सुहाना", "पल पल दिल के पास" और "एक लड़की भीगी भागी सी" जैसे कालजयी गीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करते हैं। उन्होंने अपने गायन से हिंदी फिल्म संगीत को एक नई पहचान दी और अपनी विशिष्ट शैली के कारण वे सदैव याद किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि किशोर कुमार का व्यक्तित्व रचनात्मकता, मौलिकता और आत्मविश्वास का प्रतीक था। संगीत के प्रति उनका समर्पण और प्रयोगधर्मिता आज भी युवा कलाकारों के लिए प्रेरणास्रोत है।
डॉ. चित्तौड़ा ने कहा कि इस लघु पुस्तिका के माध्यम से उनका उद्देश्य महान कलाकार के जीवन और उपलब्धियों को संजोते हुए नई पीढ़ी को भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत से परिचित कराना है। उन्होंने कहा कि किशोर कुमार का योगदान भारतीय संगीत इतिहास में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा और उनकी अमर आवाज़ आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेगी।