उदयपुर। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर द्वारा रविवार सायं हिवड़ा री हूक कार्यक्रम बंजारा मंच शिल्पग्राम उदयपुर में आयोजित किया गया।
पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र उदयपुर के निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने बताया कि नित नए नवाचार करने के क्रम में पर्यटकों एवं आमजन को अपनी विभिन्न कलाओं का हुनर दिखाने के उद्देश्य से मंच प्रदान करने हेतु हिवड़ा री हूक कार्यक्रम रविवार शाम को आयोजित किया गया।
सर्वप्रथम पियूष ने जल्लाद एवं बेटे की कहानी सुनाई। इसके बाद चन्द्रसिंह सांखला ने देशभक्ति गीत जो शहीद हुए है उनकी.... प्रस्तुत किया।
फिर कृतिका ने यूकीली इंस्ट्रूमेंट से कहीं दूर जब दिन ढल जाए प्रस्तुत किया... तो हर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इसी क्रम में विकास ने ये हौसला कैसे झुके.... गाना प्रस्तुत किया।
दयाराम सुथार ने मुझे गम नहीं है इसका कि बदल गया जमाना... प्रस्तुत किया। उसके बाद पंकज ने उड़ जा काले कौआ... गाना प्रस्तुत किया।
इसी क्रम में राकेश ने आज मौसम बड़ा बेईमान है... गीत प्रस्तुत किया। केन्द्र के सहायक निदेशक (वित्त एवं लेखा) दुर्गेश चांदवानी ने है प्रीत जहां की रीत सदा...गीत प्रस्तुत किया।
उसके बाद सिद्धांत भटनागर ने एक कविता खुद की खुद से बात प्रस्तुत की। मांगीलाल ने खुदा भी आसमां से जब जमीं पर देखता होगा... गीत प्रस्तुत किया।
इसके बाद अरविन्द ने देखो मैंने देखा एक सपना...गीत प्रस्तुत किया। इसके बाद आशुतोष पाण्डे ने कविता प्रस्तुत की।
नरेश पंवार ने दुनिया किसी के प्यार में जन्नत से कम नहीं... गजल प्रस्तुत किया। मंच संचालन अमित व्यास ने किया।
अंत में केन्द्र निदेशक डॉ. अश्विन एम. दलवी ने तुम बिन मोरा जिया लागे ना... प्रस्तुत किया।
‘हिवड़ा री हूक’ कार्यक्रम की खासियत यह है कि जो लोग प्रतिभा तो रखते हैं, मगर प्रदर्शन करने को मंच नहीं मिलता, उनको इसमें मंच प्रदान किया जाता है।