धरती पर मानव सभ्यता के विकास के साथ संपूर्ण मानवता को कला, संस्कृति और सभ्यता का पाठ भारत ने ही सिखाया है। भारत ही वह देश है जिसने दूसरे देशों और वहाँ के धर्मावलंबियों पर कभी कोई अत्याचार नहीं किए। भारत की प्राचीन सनातन धर्म की शिक्षा और संस्कारों ने दुनिया को ज्ञान और विज्ञान  सिखाते हुए जीवसृष्टि कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। यह विचार संघ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित बांसवाड़ा नगर की भगत सिंह बस्ती द्वारा आयोजित विराट हिंदू महोत्सव में आयोजित समारोह में मुख्य वक्ता डॉ. विपिन चंद्र ने व्यक्त किए। उन्होंने  कहा कि संघ भारत के इसी सांस्कृतिक वैभव का प्रहरी बनकर मानवकल्याण के लिए पंच परिवर्तनों से दुनिया का ध्यान आकर्षित कर रहा है। सामाजिक समरसता, परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य के इन पाँच प्रणों की क्रियान्विति से आने वाली हजारों पीढियां सुरक्षित और संरक्षित रहेंगी।  दोपहर 3 बजे नासिक ढोल के साथ परिणय वाटिका से भव्य शोभायात्रा प्रारंभ हुई जिसमें आबाल वृद्ध सभी ने केसरिया बाना पहन कर अपूर्व उत्साह, उल्लास और उमंग के साथ नाचते थिरकते हुए भाग लिया। शोभायात्रा मार्ग में पढ़ने वाली गौ रक्षा कॉलोनी, भगत सिंह कॉलोनी, गोकुलधाम परिसर, वाडिया कॉलोनी, अंबिका कॉलोनी, श्रीजी परिसर और शारदा कॉलोनी में पुष्पवर्षा करके शोभायात्रा का स्वागत किया गया। गोधुली वेला में अनिकेत वाटिका में प्रवेश करते ही  आतिशबाजी से सारा वातावरण जगमग हो उठा। दीपक कोठारी के द्वारा 'जाग रहा है जन गण मन' इस आव्हान गीत के साथ समारोह की सांस्कृतिक शुरुआत हुई। प्रो. प्रमोद वैष्णव ने अतिथियों का परिचय प्रस्तुत किया। भगत सिंह कॉलोनी की छात्राओं ने पहलगाम के कायराना कृत्य पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की जिसमें ऑपरेशन सिंदूर की धमक दिखाई दी। लीना सोतानी के निर्देशन में हुई इस लघु नाटिका पर उपस्थित जन समुदाय ने करतल ध्वनि से छात्राओं का हौसला बढाया। भारत माता के चित्र पर दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुई भव्य और दिव्य सांस्कृतिक संध्या में सर्वप्रथम सम्मेलन के अध्यक्ष ललित कलाल ने संगठन की शक्ति, सामाजिक समरसता और सनातन चेतना का संदेश दिया। उन्होंने उपस्थित सनातन धर्मियों का आह्वान किया कि सभी सामाजिक समरसता के रंग में भारत को एकता के सूत्र में बाँधते हुए विकसित भारत के लिए संकल्पबद्ध रहें। भारत माता मंदिर के महंत रामस्वरूप महाराज ने कहा कि भारत और यहाँ की संस्कृति पर विगत हजार वर्षों में अनगिनत आक्रमण हुए फिर भी सनातन धर्म अपने सत्य के बल पर अडिग रहा।  बड़ा रामद्वारा के संत रामप्रकाश महाराज ने उपस्थित जन समुदाय का आवाहन किया कि वे संगठित होकर वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए एक रहें और भारत को विश्व गुरु के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए संकल्प लें। 
सम्मेलन में मंच पर मातृशक्ति की प्रतिनिधि इशिका दीदी ने वर्तमान समय में संस्कारों की आवश्यकता पर बल दिया और माता बहनों से नई पीढ़ी को संस्कारमय वातावरण देने का आवाहन किया। हिंदू सम्मेलन में विभाग प्रचारक विकासराजजी, जिला प्रचारक गोविंद सिंहजी,  मनोज शर्मा, कन्हैयालाल यादव अमित चौधरी, सहित अनेक गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। भगत सिंह बस्ती के अनिल सिंघल, अनिल मेठानी, भगवती पटेल,  अजय गुप्ता, के के शुक्ला, नगेंद्र दोसी, द्रोमिल त्रिवेदी, मनोज जोशी, सज्जन सिंह राठौड़, राहुल मेहता, महेश रावल, बृजमोहन तूफान, विनोद जैन, नरपत जैन,भूदेव भट्ट, विजय कौशिक के साथ बड़ी तादाद में मातृशक्ति ने भी आनंद उमंग और उल्लास के साथ अपनी सहभागिता दिखाई। संयोजन सम्मेलन के पालक प्रो. राजेश जोशी ने और आभार संयोजक दीपक जोशी ने व्यक्त किया। 
 

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