उदयपुर। निम्बार्क शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, सूरजपोल में महिला समाज सोसाइटी द्वारा आत्मोत्साह जागरण एवं नैतिक साहस बढ़ाने पर विशेष मोटिवेशनल सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य एस.टी.सी प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं को आत्महत्या जैसे घातक विचारों से दूर रखना तथा जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना था।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता समाजसेवी माया कुम्भट ने कहा कि जीवन ईश्वर का दिया अनमोल अवसर है। अनेक शुभ कर्मों और सौभाग्य से प्राप्त हुए इस मनुष्य जन्म का पूर्ण उपयोग किए बिना हार मान लेना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि कठिनाइयां जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन उनसे भागना कायरता है।

उन्होंने पांडवों के वनवास का उदाहरण देते हुए कहा कि बारह वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास होते हुए भी पांडव विचलित नहीं हुए। धैर्य, साहस और लक्ष्य–समर्पण के बल पर वे वापस लौटे और राज्य प्राप्त किया। इसी प्रकार विपरीत परिस्थितियां हमें परखने आती हैं, गिराने नहीं।

माया कुम्भट ने अपनी प्रेरक कविता “जब उम्मीद के तीर तरकश में न हों…” के माध्यम से विद्यार्थियों को भावनात्मक रूप से झकझोरा। कविता के पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने समझाया कि असफलताएं भूकंप का झटका अवश्य देती हैं, पर गिरा नहीं पातीं। ऐसे समय में भागना नहीं, बल्कि दृढ़ होकर खड़े रहना ही जीवन की परीक्षा पास करना है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा का खराब परिणाम, रिश्तों में धोखा या किसी भी प्रकार की मानसिक निराशा—ये सब जीवन के सामान्य अनुभव हैं। इनके कारण जीवन समाप्त करने का विचार आना ही गलत है। मार्कशीट एक कागज़ है, जबकि हर बच्चा अपने परिवार का “जिगर का टुकड़ा” है।

उन्होंने ऋषि रमन की प्रेरक कथा सुनाकर बताया कि हर समस्या का हल धैर्य, मार्गदर्शन और सकारात्मक सोच से निकलता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी छात्र-छात्राओं ने हाथ उठाकर सामूहिक संकल्प लिया—
“किसी भी परिस्थिति में आत्महत्या का कदम नहीं उठाएंगे; समस्याओं का समाधान संवाद, मार्गदर्शन और प्रयासों से ही खोजेंगे।”

कार्यक्रम में विद्यालय स्टाफ के साथ वंदना शर्मा, बबीता जैन, चन्द्रकला कोठारी उपस्थित रहीं। मीनाक्षी लोढ़ा ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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