कोटा। शहर के वरिष्ठ व्यवसायी, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं समाजसेवी,दीप श्री सुयोग, विवेकानंद नगर निवासी श्री नागरमल मुंधड़ा (90 वर्ष) ने अपने पुत्र नरेंद्र कुमार व पत्नी श्रीमती शारदा की सहमति से देहदान का संकल्प लेकर समाज के लिए एक अमूल्य उदाहरण प्रस्तुत किया है।

नागरमल जी ने कहा कि – “जीवन तो सभी जीते हैं, किंतु मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा कर जाना ही सच्चा धर्म है। शरीरदान से भावी पीढ़ियों के डॉक्टरों को शिक्षा और शोध में मदद मिलेगी और यह समाज के लिए स्थायी योगदान साबित होगा।”

वे आयुर्वेदिक दवाइयों के अच्छी जानकारी रखते हैं, और उन्होंने अनेक गरीब व जरूरतमंद लोगों का निःशुल्क इलाज किया है। जीवनभर समाज सेवा करने वाले नागरमल जी ने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा का संकल्प लेकर लोगों को  प्रेरित किया।

इस अवसर पर शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम ने उनके निवास पर पहुँचकर देहदान संकल्प पत्र भरवाया और उन्हें प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया।

नागरमल जी ने यह भी कहा कि – “शरीरदान के साथ-साथ यदि हम अपने अन्य अंग भी दान करें तो उससे मानव जाति का कल्याण हो सकता है। मृत्यु के बाद भी जीवन किसी और के लिए उजाला बन सकता है।”

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