उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के अनुसंधान निदेशालय में आज नव नियुक्त कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह के स्वागत के उपलक्ष्य में एक विशेष बैठक का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख अन्वेषक और वैज्ञानिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ भी मनाई गई, जिसे सभी वैज्ञानिकों और अन्वेषकों ने एक साथ गाकर राष्ट्रीय भावना का प्रदर्शन किया। इस अवसर पर अनुसंधान निदेशक डॉ. अरविंद वर्मा, क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अमित त्रिवेदी सहित विश्वविद्यालय के सभी वैज्ञानिक उपस्थित थे।
बैठक में डॉ. अरविंद वर्मा ने विश्वविद्यालय में चल रही विभिन्न अनुसंधान गतिविधियों और परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने ए.आई.सी.आर.पी., नेटवर्क परियोजनाओं, आर.के.वी.वाई. परियोजनाओं और पी.वी.टी. परियोजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में मानव संसाधन को सशक्त बनाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि एमपीयूएटी प्रदेश का एक अग्रणी कृषि अनुसंधान संस्थान है, जिसके पास सबसे अधिक परियोजनाएं हैं और जिसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए रखना आवश्यक है।
अपने उद्बोधन में कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि देश की स्वतंत्रता और एकता का प्रतीक है, जिसने भारतीय जनमानस को जागृत किया। मातृभूमि को देवी का रूप देकर इसे आराधना का प्रतीक बना दिया गया, और इन पंक्तियों ने इतिहास की दिशा बदल दी। संस्कृत और बंगला के मधुर संगम में रचा गया यह गीत भारत की आत्मा का गान बन गया था।
कुलगुरु डॉ. सिंह ने अपने संबोधन में विश्वविद्यालय के विकास और अनुसंधान गतिविधियों के विस्तार को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि वे एमपीयूएटी को कृषि शिक्षा और अनुसंधान में उत्कृष्टता का केंद्र बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और सभी वैज्ञानिकों व संकाय सदस्यों से विश्वविद्यालय के प्रगति पथ में योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी.जी. छीपा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख अन्वेषक और वैज्ञानिक उपस्थित थे।
Source: