महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संघटक मात्स्यकी महाविद्यालय, उदयपुर में शुक्रवार को विश्व मत्स्य दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में महाविद्यालय के अधिष्ठाता डाँ. आर. एल. सोनी ने मछली के न्युट्रेशनल वेल्यु के बारे में बताया और मत्स्य विभाग में भारत के 3 करोड़ युवक युवतियों को रोजगार देता है और अधिष्ठाता महोदय ने 21 नवम्बर 2025 के विश्व मत्स्य दिवस की थीम ‘‘टिकाऊ और समावेशी नीली अर्थव्यवस्था’’ और ‘‘विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य पालन के टिकाऊ दोहन’’ को बढ़ावा देना के बारे मे अवगत करवाया। दुनिया के मत्स्य उत्पादन में 2/3 जलीय कृषि से व 1/3 समुद्री मात्स्यकी से प्राप्त हो रहा है। मत्स्य उत्पादन में गिरावट के कारण जैसे की अवैध अप्रतिबन्धित और अनियमित, प्रदुषण और ग्लोबल वार्मींग है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों का मनोबल बढाते हुए डाॅ. एम.एल. औझा ने मत्स्य के बारे मे कुछ महत्वपुर्ण तथ्यो की जानकारी प्रदान की साथ ही ‘‘प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना’’ व ‘‘प्रधानमंत्री किसान समृद्धी सहयोजना’’ के बारे में जानकारी प्रदान की। इसके साथ ही दो महत्वपुर्ण दिवस जैसे की मत्स्य कृषक दिवस एवं विश्व मत्स्य दिवस के बारे मंे बताया। डाॅ. नितेश कुमार यादव ने टिकाऊ मत्स्य पालन एवं लघु-स्तरीय योजनाओं के बारे में महत्वपूर्ण और संक्षिप्त रूप से जानकारी प्रदान की। इस अवसर पर महाविद्यालय के अन्य कर्मचारी डाॅ. साहिदा जयपुरी, श्रीमती आरती वर्मा, श्री प्रभुलाल जी, श्री जितेन्द्र जी, श्री प्रकाश जी उपस्थित रहे तथा विद्यार्थी स्वरूप सिंह, नितिन ने विश्व मत्स्य दिवस क्यो मनाया जाता है के बारे मे संक्षिप्त जानकारी दी। तथा महाविद्यालय के समस्त छात्र एवं छात्राए उपस्थित रहे।
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