उदयपुर। क्षेत्रीय कृषि मेला-2026 एवं फल-फूल-सब्जी प्रदर्शनी के अवसर पर महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी), उदयपुर के तत्वावधान में अखिल भारतीय समन्वित कृषि प्रणाली परियोजना द्वारा एकीकृत कृषि प्रणाली मॉड्यूल का सजीव प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शनी का अवलोकन भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, कुलगुरु डॉ. प्रताप सिंह, सहायक महानिदेशक (मानव संसाधन प्रबंधन) डॉ. एस.के. शर्मा, प्रसार शिक्षा निदेशक डॉ. आर.एल. सोनी, कुल सचिव श्री अशोक कुमार, डीन आरसीए डॉ. मनोज महाला एवं ओएसडी डॉ. सिद्धार्थ मिश्रा सहित अन्य अधिकारियों ने किया।
प्रधान अन्वेषक डॉ. हरि सिंह ने एकीकृत कृषि प्रणाली की कार्यप्रणाली तथा इसके घटकों—फसल उत्पादन, बागवानी, पशुपालन, मुर्गीपालन, मत्स्य पालन, जैविक अपशिष्ट प्रबंधन एवं संसाधन पुनर्चक्रण—की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस प्रणाली को अपनाकर एक हेक्टेयर क्षेत्र से 2.30 लाख रुपये तक की अतिरिक्त शुद्ध आय एवं 474 मानव-दिवस रोजगार सृजित किया जा सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि, जोखिम में कमी और संसाधनों का सतत उपयोग संभव है।
मेले में पांच जिलों के 2000 से अधिक किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों ने मॉड्यूल का अवलोकन किया और इसे लाभकारी, टिकाऊ एवं पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में प्रभावी पहल बताया।
यह सजीव प्रदर्शन किसानों को आधुनिक एवं समेकित कृषि तकनीकों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हुआ, जिससे क्षेत्र में टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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