उदयपुर । उदयपुर। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमपीयूएटी) के कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इंजीनियरिंग (सीटीएई) में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “लेसायर-2026 (LASIRE-2026 – Leveraging Artificial Intelligence to Strengthen Innovation & Research Ecosystem)” का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। संगोष्ठी में देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों एवं विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।

अंतिम दिवस पर विभिन्न तकनीकी सत्रों एवं विशेषज्ञ व्याख्यानों का आयोजन किया गया, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उभरते आयामों, अनुसंधान में इसके उपयोग तथा उद्योग एवं अकादमिक क्षेत्र में इसके प्रभाव पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने AI आधारित समाधान, डेटा विश्लेषण, नवाचार एवं भविष्य की तकनीकी संभावनाओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए।

अमितेश शुक्ला (USA) ने अपने व्याख्यान में भविष्य के AI स्टार्टअप्स के निर्माण पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आने वाला समय AI एजेंट आधारित प्रणालियों (AI Agent Systems) का होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक AI समाधान अब एकल मॉडल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लेयर्ड (Layered) AI एजेंट्स के माध्यम से जटिल कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकता है। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों जैसे व्यवसाय, स्वचालन, ग्राहक सेवाएं और निर्णय समर्थन प्रणालियों में इन AI एजेंट्स के उपयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। साथ ही उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में AI एजेंट आधारित समाधान पहले से ही लागू किए जा चुके हैं और भविष्य में इनका विस्तार तेजी से होने वाला है, जिससे स्टार्टअप इकोसिस्टम में नए अवसर उत्पन्न होंगे।

डॉ. हीना राठौर ने अपने व्याख्यान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े नैतिक (Ethical) और नैतिक निर्णय (Moral Decision Making) के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि AI केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर नैतिक चुनौती भी है, विशेष रूप से चिकित्सा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में, जहां AI आधारित निर्णयों का सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि AI सिस्टम के विकास और उपयोग के दौरान निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए AI का जिम्मेदार उपयोग ही समाज के हित में इसके प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित कर सकता है।

डॉ. एन. एस. राठौर, जो इस दिवस के मुख्यवक्ता थे, ने अपने व्याख्यान में “डिजिटल हार्वेस्ट: कृषि में AI, मशीन लर्निंग एवं IoT – भविष्य की अवधारणा से वास्तविकता तक” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कृषि क्षेत्र में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग, रिमोट सेंसिंग एवं IoT के माध्यम से डेटा का संग्रह, विश्लेषण एवं पूर्वानुमान संभव हो रहा है, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक सटीक बनती है। उन्होंने कहा कि AI का उपयोग मुख्य रूप से योजना निर्माण एवं निर्णय सहयोग के लिए किया जाना चाहिए, जिससे उत्पादन की दक्षता बढ़ाई जा सके। उन्होंने Agri 4.0 के अंतर्गत स्मार्ट फार्मिंग, ऑटोमेशन एवं रियल-टाइम डेटा के महत्व को रेखांकित किया तथा भविष्य में Agri 5.0 के तहत प्रिसिजन एग्रीकल्चर, वर्टिकल फार्मिंग एवं जियोस्पेशियल आधारित पूर्वानुमान की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि मशीन लर्निंग फसल रोग पहचान, उत्पादन पूर्वानुमान एवं कृषि प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है, जबकि ब्लॉकचेन तकनीक डेटा सुरक्षा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने में सहायक है।

अंत में उन्होंने कहा,“भविष्य की कृषि केवल मिट्टी पर नहीं, बल्कि डेटा और उससे जुड़ी वैज्ञानिक समझ पर आधारित होगी।”

डॉ. मनीष उन्हाले (USA) ने अपने व्याख्यान में बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सप्लाई चेन मैनेजमेंट (SCM) में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है, विशेष रूप से सतत (Sustainable) एवं लचीली (Resilient) आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण में। उन्होंने कहा कि AI के माध्यम से मांग का पूर्वानुमान, स्टोरेज लोकेशन की पहचान तथा एंड-टू-एंड विजिबिलिटी सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने वैश्विक संघर्षों के उदाहरण देते हुए बताया कि ऐसे समय में AI वैकल्पिक सप्लायर की पहचान, जोखिम प्रबंधन एवं आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर बनाए रखने में सहायक होता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावी सप्लाई चेन के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा अत्यंत आवश्यक है तथा AI टूल्स के माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को अधिक सटीक बनाया जा सकता है। उन्होंने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन, सहयोगी नेटवर्क एवं ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को भविष्य की आपूर्ति श्रृंखला के लिए महत्वपूर्ण बताया।

केतन भट्ट ने अपने व्याख्यान में देवनागरी पांडुलिपियों में AI आधारित टेक्स्ट पहचान (HTR) की सटीकता बढ़ाने हेतु मैन्युस्क्रिप्ट कंपोनेंट सेपरेशन (MCS) की अवधारणा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि पारंपरिक एकसमान प्रोसेसिंग विधियों के स्थान पर बैकग्राउंड, सब्सट्रेट एवं टेक्स्ट जैसे विभिन्न घटकों को अलग-अलग पहचानकर विश्लेषण करना अधिक प्रभावी सिद्ध होता है। उन्होंने एक हाइब्रिड दृष्टिकोण (Hybrid Approach) और डोमेन-विशिष्ट प्रशिक्षण (Domain-Specific Training) के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इससे मशीन लर्निंग मॉडल की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने अपने अध्ययन में विभिन्न प्रयोगात्मक स्थितियों के माध्यम से टेक्स्ट पहचान की त्रुटि दर, प्रिसिजन एवं रिकॉल का विश्लेषण प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने बताया कि AI आधारित मॉडल (जैसे YOLO आधारित तकनीक) के माध्यम से पृष्ठ पहचान में उच्च सटीकता प्राप्त की जा सकती है, जो डिजिटल पांडुलिपि प्रसंस्करण के लिए अत्यंत उपयोगी है।

डॉ. विक्रमादित्य दवे, संगोष्ठी के समन्वयक के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वर्तमान समय में नवाचार, अनुसंधान और तकनीकी विकास का एक महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। उन्होंने बताया कि AI के माध्यम से जटिल समस्याओं का समाधान अधिक प्रभावी और त्वरित रूप से संभव हो रहा है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यक्षमता और गुणवत्ता में सुधार हो रहा है। उन्होंने इस संगोष्ठी के माध्यम से अकादमिक एवं उद्योग जगत के बीच सहयोग को मजबूत करने पर बल दिया तथा युवाओं को AI के क्षेत्र में नवीन कौशल विकसित करने और शोध उन्मुख दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने यह भी कहा कि AI का जिम्मेदार और संतुलित उपयोग भविष्य के सतत विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

समापन सत्र में सीटीएई के डीन डॉ. सुनील जोशी की अध्यक्षता में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पोस्टर प्रस्तुति प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर उन्होंने प्रतिभागियों को नवाचार एवं शोध गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया

इस अवसर पर डीन डॉ. सुनील जोशी एवं संगोष्ठी समन्वयक डॉ. विक्रमादित्य दवे ने संयुक्त रूप से संगोष्ठी के सफल आयोजन में योगदान देने वाले सभी समिति सदस्यों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाली टीम—नारोतम सोनी, आदित्य कच्छवाहा, ध्रुव सक्सेना, नेहा गोधा, कमलेश तिवारी, ओमवीर सिंह, जिगर के. पाठक, शैफाली गोयल एवं गौरव वसीटा—के योगदान की सराहना की।

 

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