-वासुदेव देवनानी-
विश्वभर में प्रति वर्ष 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारत की उस महान सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक है, जिसने मानवता को स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाया है। योग हजारों वर्षों से भारतीय जीवन-दर्शन का अभिन्न अंग रहा है। आज यह केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के लगभग सभी देशों में स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए अपनाया जा रहा है।
*योग की प्राचीन परंपरा*
योग का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। भारतीय ऋषियों और मुनियों ने योग के माध्यम से शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का मार्ग खोजा। वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता तथा महर्षि पतंजलि के योगसूत्रों में योग का विस्तृत वर्णन मिलता है। महर्षि पतंजलि को योग दर्शन का प्रमुख प्रवर्तक माना जाता है। उन्होंने योग को अष्टांग योग के रूप में व्यवस्थित किया, जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान और समाधि शामिल हैं। भारतीय संस्कृति में योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित और संतुलित बनाने की समग्र पद्धति है। इसका उद्देश्य मनुष्य को स्वस्थ शरीर, शांत मन और जागृत चेतना प्रदान करना है।
*प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को है अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाने का श्रेय*
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत भारत के प्रयासों से हुई। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में योग के महत्व को रेखांकित करते हुए एक अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है, जो मन और शरीर, विचार और कर्म, संयम और संतुष्टि के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। भारत के इस प्रस्ताव को महासभा में अभूतपूर्व समर्थन मिला। संयुक्त राष्ट्र के 177 देशों ने सह-प्रायोजक बनकर इसका समर्थन किया, जो संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में किसी प्रस्ताव को मिला सबसे व्यापक समर्थन माना जाता है। इसके बाद 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया।
*21 जून ही क्यों चुना गया?*
21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे ग्रीष्म अयनांत (समर सोलस्टिस ) कहा जाता है। भारतीय परंपरा में इसका विशेष आध्यात्मिक महत्व माना गया है। योग परंपरा के अनुसार इसी काल से सूर्य उत्तरायण से दक्षिणायन की ओर बढ़ता है और इसे आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए योग दिवस के लिए 21 जून का चयन किया गया।
*पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस*
21 जून 2015 को पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे विश्व में उत्साहपूर्वक मनाया गया। भारत में राजधानी दिल्ली के राजपथ (अब कर्तव्य पथ) पर हजारों लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया। इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने विश्व रिकॉर्ड भी बनाया। इसके साथ ही दुनिया के अनेक देशों में सार्वजनिक स्थलों, विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। तब से प्रत्येक वर्ष योग दिवस नए उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाया जा रहा है।
*योग का वैज्ञानिक महत्व*
आधुनिक विज्ञान ने भी योग के लाभों को स्वीकार किया है। अनेक शोधों से सिद्ध हुआ है कि नियमित योगाभ्यास शरीर और मन दोनों के लिए लाभकारी है।योग शरीर को लचीला बनाता है, मांसपेशियों को मजबूत करता है तथा संतुलन और सहनशक्ति बढ़ाता है। यह मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय रोग जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में सहायक माना जाता है। योग और ध्यान तनाव, चिंता तथा अवसाद को कम करने में मदद करते हैं। नियमित अभ्यास से मन शांत और एकाग्र रहता है। प्राणायाम और योगासन शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं, जिससे बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। योग व्यक्ति को अनुशासित जीवन, सकारात्मक सोच और आत्मनियंत्रण की प्रेरणा देता है।
*कोविड-19 काल में योग की भूमिका*
कोरोना महामारी के दौरान और उसके बाद योग का महत्व और अधिक बढ़ गया। कोविड -19 के लॉकडाउन और मानसिक तनाव के दौर में लाखों लोगों ने योग और प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। विशेषज्ञों ने भी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए योग को उपयोगी बताया। इस अवधि में ऑनलाइन योग सत्रों और डिजिटल माध्यमों से योग का प्रसार विश्वभर में तेजी से हुआ।आज अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अनेक अन्य देशों में योग केंद्र संचालित हो रहे हैं। विश्वविद्यालयों और चिकित्सा संस्थानों में योग पर शोध हो रहे हैं। कई देशों में योग प्रशिक्षक के रूप में हजारों लोग कार्य कर रहे हैं। योग ने भारत की सांस्कृतिक कूटनीति को भी नई पहचान दी है। यह भारत की “सॉफ्ट पावर” का प्रभावी माध्यम बन कर उभरा है। योग के माध्यम से दुनिया भारत की आध्यात्मिक परंपरा और जीवन-दर्शन से परिचित हो रही है।आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली, मोबाइल और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता तथा तनावपूर्ण वातावरण में योग बच्चों और युवाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। विद्यालयों में योग शिक्षा से विद्यार्थियों की एकाग्रता, स्मरण शक्ति और आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे उनमें अनुशासन और सकारात्मक सोच का विकास होता है।नई पीढ़ी को योग से जोड़ना स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। योग केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। यह प्रकृति के साथ सामंजस्य का भी संदेश देता है। योग हमें सिखाता है कि मानव और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण, संतुलित जीवनशैली और प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग की प्रेरणा भी योग दर्शन से प्राप्त होती है।
*भारत की विश्व को अमूल्य देन*
योग भारत की ऐसी सांस्कृतिक विरासत है, जिसने सीमाओं, भाषाओं और धर्मों की दीवारों को पार कर पूरी मानवता को जोड़ने का कार्य किया है। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इस बात का प्रमाण है कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी विश्व को दिशा देने में सक्षम है। आज जब दुनिया तनाव, असंतुलन और जीवनशैली जनित रोगों की चुनौतियों का सामना कर रही है, तब योग स्वस्थ, शांतिपूर्ण और संतुलित जीवन का प्रभावी समाधान प्रस्तुत करता है। इस परिपेक्ष्य में हम कह सकते है कि अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन और वैश्विक कल्याण का आंदोलन है। यह दिन हमें योग को केवल एक दिवस तक सीमित न रखकर जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा देता है। योग शरीर को शक्ति, मन को शांति और आत्मा को ऊर्जा प्रदान करता है। भारत की इस अमूल्य धरोहर को अपनाकर हम न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि एक स्वस्थ, सुखी और समरस विश्व के निर्माण में भी योगदान दे सकते हैं। योग भारत का विश्व को दिया गया ऐसा संदेश है, जो “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को साकार करते हुए सम्पूर्ण मानवता को एक सूत्र में जोड़ता है।
राजस्थान विधान सभा में प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है जिसमें विधान सभा के सदस्य, अधिकारी और कर्मचारी गण भाग लेते है।
National News
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस : भारत की प्राचीन अमूल्य धरोहर और आध्यात्मिक विरासत का वैश्विक उत्सव
Related stories
Need to Connect the New Generation with the Legacy of Haldighati and Dewair: Union Minister Shekhawat
Udaipur: Union Minister for Culture and Tourism Gajendra Singh Shekhawat said that the younger generation mus…
Panel Discussion on “Medical Tourism in Udaipur: Possibilities and Challenges” Held on World Tourism Day
Udaipur: On the occasion of World Tourism Day, the Tourism and Hotel Management Programme of Mohanlal Sukhadi…
Seeing the World Through the Camera: Photography Workshop Organised at Pacific College
Udaipur: A photography workshop was organised at Pacific College, Chitrakoot Nagar, on Saturday by Pacific Co…
BCI Yuva Investor Connect 2026 Held in Rajasthan, Attracts Registrations from 350 Startups
Udaipur: BCI Yuva Investor Connect 2026 was organised at IIM Udaipur with the objective of strengthening the…