लॉजिस्टिक्स लागत में कमी, आपूर्ति श्रृंखला को बेहतर बनाने, निजी निवेश को बढ़ावा देने और साफ-सुथरे माल ढुलाई परिवहन को प्रोत्साहित करने में मददगार होंगी नई नीतियां
इन सुधारों से परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकेंगी और रेलवे व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा मिलेगाः अश्विनी वैष्णव
नई दिल्ली। ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’’ को आगे बढ़ाते हुए, रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए मंगलवार को आठ और संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की। इसके साथ ही, इस पहल के तहत लागू किए गए सुधारों की कुल संख्या 17 हो गई है। ये नए सुधार माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स, निर्माण के तरीकों, परियोजनाओं को पूरा करने, वैगन डिजाइन, कौशल विकास और आसान कारोबार में बड़े बदलाव लाएंगे।
नई दिल्ली के रेल भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे भविष्य के लिए तैयार रेलवे व्यवस्था बनाने के लिए कई सुधार कर रहा है। ये सुधार मंत्रालय के उस लक्ष्य का हिस्सा हैं, जिसके तहत कार्यक्षमता बढ़ाने, नवाचार को बढ़ावा देने और रेलवे व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 52 हफ्तों में 52 सुधार लागू किए जाने हैं। श्री वैष्णव ने कहा कि रिफॉर्म एक्सप्रेस पहल के तहत पहले घोषित किए गए सुधारों के उत्साहजनक नतीजे मिलने शुरू हो गए हैं।
सुधार 10ः फ्लाई ऐश का परिवहन
श्री वैष्णव ने कहा कि भारत में हर साल लगभग 340 मिलियन टन फ्लाई ऐश पैदा होती है, जिसमें से लगभग 96 मिलियन टन का इस्तेमाल सीमेंट उद्योग द्वारा किया जाता है। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान लगभग 13 मिलियन टन फ्लाई ऐश का परिवहन कियाए जो देश में कुल फ्लाई ऐश उत्पादन का लगभग चार प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि पारंपरिक रूप से फ्लाई ऐश को खुले वैगनों में ढोया जाता रहा है, जिससे लोडिंग, परिवहन और अनलोडिंग के दौरान धूल से प्रदूषण होता है। थर्मल पावर प्लांट में बड़े ऐश पॉन्ड में जमा करने पर भी फ्लाई ऐश पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए, भारतीय रेलवे ने फ्लाई ऐश के परिवहन के लिए एक नई कंटेनर-आधारित व्यवस्था शुरू की है। नई नीति के तहत, परिवहन के लिए खास तौर पर डिजाइन किए गए आईएसओ-मानक कंटेनरों का इस्तेमाल किया जाएगा। इन कंटेनरों को पावर प्लांट से सीधे टॉप-लोडिंग सिस्टम के जरिए भरा जा सकता है और साइड-डिस्चार्ज या न्यूमैटिक सिस्टम का इस्तेमाल करके बिना धूल प्रदूषण फैलाए खाली किया जा सकता है।
श्री वैष्णव ने कहा कि बंद-कंटेनर व्यवस्था से प्रदूषण-मुक्त परिवहन मुमकिन होगा, सीमेंट प्लांट में जरूरत पड़ने तक सुरक्षित स्टोरेज आसान होगा और लॉजिस्टिक्स की क्षमता में भी काफी सुधार होगा। इन कंटेनरों को रीच स्टैकर्स के जरिए ले जाया जा सकता है, जिससे पावर प्लांट से सीमेंट प्लांट तक बिना किसी रुकावट के सामान की आवाजाही हो सकेगी। इस सुधार से फ्लाई ऐश की रेल से ढुलाई बढ़ने, सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होने और पर्यावरण की चुनौती को आर्थिक रूप से फायदेमंद संसाधन में बदलने की उम्मीद है।
सुधार 11ः कंटेनर क्षेत्र में सुधार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि थोक सामान के अलावा रेल माल ढुलाई में विविधता लाने के लिए ज्यादा कंटेनराइजेशन की जरूरत है। कंटेनर ट्रैफिक को बढ़ावा देने के लिए, भारतीय रेलवे ने कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंसिंग व्यवस्था में एक बड़ा ढांचागत सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत, कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर (सीटीओ) लाइसेंस चार श्रेणियों (श्रेणी चतुर्थ) में जारी किए जाते थे, जिसमें श्रेणी-1 के लिए रूपये 50 करोड़ और बाकी कैटेगरी के लिए रूपये 10 करोड़ की पंजीकरण फीस लगती थी, साथ ही मार्ग से जुड़ी पाबंदियां और पंजीकरण से जुड़ी अलग-अलग जरूरतें भी थीं। अब इसकी जगह एक ही पैन-इंडिया कंटेनर ट्रेन ऑपरेटर लाइसेंस लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत, ऑपरेटर्स बिना किसी श्रेणी आधारित पाबंदी के पूरे भारतीय रेलवे नेटवर्क पर कंटेनर ट्रेनें चला सकेंगे। सभी मार्गों पर लागू रूपये 25 करोड़ की एक जैसी नॉन-रिफंडेबल रजिस्ट्रेशन फीस के जरिए रजिस्ट्रेशन प्रणाली को भी आसान बना दिया गया है।
श्री वैष्णव ने आगे कहा कि ये अनुमति बीस साल तक मान्य रहेगी और सफल ऑपरेशन के आधार पर, बिना किसी रिन्यूअल या एक्सटेंशन फीस के इन्हें आगे बढ़ाया जा सकेगा। आसान लाइसेंसिंग व्यवस्था से कारोबार में आसानी होने, निजी भागीदारी बढ़ने, कंटेनराइजेशन के बढ़ने, रेलवे की ओर ज्यादा नॉन-बल्क कार्गो आकर्षित होने, रसद लागत कम होने और देश की माल ढुलाई व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सुधार 12ः खाद का परिवहन
कृषि क्षेत्र के लिए खाद की ढुलाई के महत्व पर जोर देते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे अभी देश में खाद की लगभग 85 प्रतिशत ढुलाई का काम संभालता है।
उन्होंने कहा कि मौजूदा माल ढुलाई व्यवस्था में करीब पचास अलग-अलग स्लैब थे, जिससे संचालन मुश्किल हो जाता था। नए सुधारों के तहतए माल ढुलाई के शुल्क को आसान बनाकर प्रति टन प्रति किलोमीटर के आधार पर कर दिया गया है, जिसमें तीन तरह की शुल्क संरचना शामिल हैं। इन सुधारों के तहत कंटेनरों के जरिए भी खाद की ढुलाई की जा सकती है। पहले की व्यवस्था में पूरी रेक को एक ही जगह पर पूरा सामान उतारने तक रोकना पड़ता था, लेकिन अब अलग-अलग कंटेनरों को जरूरत के हिसाब से रेक पॉइंट पर उतारा और उन्हें संग्रहित किया जा सकता है। इससे वितरकों की जरूरतों और सामान उठाने की क्षमता के आधार पर विभिन्न चरणों में वितरण करना आसान हो जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कंटेनर से ढुलाई करने पर वैगन के टर्नअराउंड में सुधार होगा, रेक के रुके रहने का समय कम होगा, वितरण में सुधार होगा, खाद को बारिश और मौसम से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा और कुल मिलाकर लॉजिस्टिक्स की कार्यक्षमता बेहतर होगी।
सुधार 13ः रेलवे परियोजनाओं और कार्यों में कारीगरों को कौशल सिखाने की नीति
श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे की ढ़ांचागत परियोजनाओं में सुरक्षा से जुड़े काम होते हैं, जिनके लिए खास कौशल, सटीक इंजीनियरिंग और कड़े गुणवत्तापूर्ण मानकों का पालन जरूरी होता है।
योग्य कार्यबल की तैनाती सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने रेलवे परियोजनाओं और अन्य कार्यों में लगे कारीगरों को कौशल सिखाने के लिए एक व्यापक नीति शुरू की है। यह नीति वेल्डिंग, फिटिंग, चिनाई और निर्माण से जुड़े अन्य खास कार्यों में लगे कामगारों की पहचान, मूल्यांकन और प्रमाणीकरण के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार करती है। नए फ्रेमवर्क के तहत, परियोजना के हिसाब से जरूरी कौशल तय किए जाएंगे और कामगारों का प्रैक्टिकल और मौखिक मूल्यांकन तय परीक्षण अधिकारियों के जरिए किया जाएगा। सफल उम्मीदवारों को क्यूआर कोड वाले कौशल प्रमाणपत्र मिलेंगे, जो एक लाइव सत्यापन डेटाबेस से जुड़े होंगे।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस नीति को लागू करने की शुरुआत बड़े और कठिन रेलवे परियोजनाओं जैसे पुल और सुरंगों से होगी और अगले 24 महीनों में इसे सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाईयों तक बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पहल से यह सुनिश्चित होगा कि खास रेलवे कार्यों में सिर्फ प्रमाणीकृत कारीगर और सुपरवाइजर ही लगाए जाएं, भारतीय रेलवे में कौशल का आकलन का एक मानक तरीका बने, जानकारियों का वास्तविक समय में सत्यापन आसान ढंग से हो, काम की गुणवत्ता बेहतर हो, गुणवत्ता आश्वासन मजबूत हो और देश के ढ़ांचागत क्षेत्र में कौशल उन्नयन को बढ़ावा मिले।
सुधार 14ः निर्माण से संबंधित सुधार
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस साल की शुरुआत में शुरू किए गए ठेकेदार की योग्यता से जुड़े सुधारों की सफलता के बाद, भारतीय रेलवे ने अब निर्माण व्यवस्था को मजबूत करने और परियोजनाओं को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए सुधारों का एक और बड़ा कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि इन सुधारों का मकसद कार्य के प्रति गंभीर और काबिल ठेकेदारों को बढ़ावा देना, निर्माण की गुणवत्ता बेहतर करना, विवाद कम करना और रेलवे की ढ़ांचागत परियोजनाओं को समय पर पूरा करना है। सुधारों के तहत, अब अनुबंध शुरू होने पर ही 10 प्रतिशत परफॉर्मेंस सिक्योरिटी ली जाएगी, न कि रनिंग बिल से कटौती करके इसे वसूला जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि रेलवे परियोजनाओं में सिर्फ गंभीर ठेकेदार ही हिस्सा लें और काम पूरा होने के दौरान उनकी जवाबदेही मजबूत हो। कानूनी विवादों को बढ़ावा देने वाले अनुबंधों के तरीकों को रोकने के लिए, योग्यता के कड़े नियम भी लागू किए गए हैं। जिन ठेकेदारों का लंबित कानूनी मामला उनकी नेट वर्थ के 50 प्रतिशत से ज्यादा है, वे रेलवे टेंडर में हिस्सा लेने के लिए योग्य नहीं होंगे। इन सुधारों में कॉन्ट्रैक्टर्स ऑल रिस्क इंश्योरेंस और प्रोफेशनल इंडेम्निटी इंश्योरेंस भी शामिल किए गए हैं, ताकि प्रोजेक्ट पूरा होने के दौरान जोखिम प्रबंधन को मजबूत किया जा सके और निर्माण से जुड़े जोखिमों से सुरक्षा मिल सके।
श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने विवादों को कम करने और परियोजनाओं को समय पर शुरू करने में मदद के लिए जमीन सौंपने की एक साफ और क्रमवार प्रक्रिया भी बनाई है।
केंद्रीय मंत्री ने रेल भूमि का भी जिक्र किया, जो जमीन अधिग्रहण के पूरे प्रबंधन के लिए सीआरआईएस द्वारा बनाया गया एक वेब-बेस्ड प्लेटफॉर्म है। यह प्लेटफॉर्म आईआरपीएसएम, आईपीएएस और एचआरएमएस जैसे रेलवे के कई एप्लिकेशन्स को एक साथ जोड़ता है, जिससे जानकारी का आसानी से आदान-प्रदान, जमीन अधिग्रहण के मुख्य चरणों की ऑनलाइन प्रोसेसिंग, बेहतर कार्य प्रबंधन और डैशबोर्ड तथा प्रबंधन सूचना प्रणाली के जरिए वास्तविक समय में निगरानी मुमकिन हो पाती है। उम्मीद है कि यह पोर्टल जमीन अधिग्रहण की रफ्तार बढ़ाएगा, परियोजनाओं की योजनाओं को बेहतर बनाएगा और रेलवे के ढ़ांचागत कार्यों को समय पर पूरा करने में मदद करेगा।
सुधार 15ः वैगन डिजाइन मंजूरी के लिए पॉलिसी
एक और बड़े संरचनात्मक सुधार के बारे में बताते हुए, श्री वैष्णव ने वैगन डिजाइन मंजूरी के लिए एक नई नीति की घोषणा की। इसका मकसद नवाचारों को बढ़ावा देना और खास तरह के माल-ढुलाई वाले वैगन के डिजाइन में उद्योग जगत की भागीदारी को मुमकिन बनाना है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था के तहत, वैगन के डिजाइन ज्यादातर अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा तैयार किए जाते थे, जिसमें बोगी, कपलर और ब्रेकिंग सिस्टम जैसे कई अहम पार्ट्स तय मानकों तक ही सीमित होते थे। इससे डिजाइन में बदलाव की गुंजाइश कम हो जाती थी और नई सोच या नवाचारों पर रोक लगती थी। नई नीति के तहत, डिजाइनर, निर्माताओं और उद्योग खास तरह के सामान और ऑपरेशन की जरूरतों के हिसाब से वैगन के डिजाइन तैयार कर सकेंगे और उनके प्रस्ताव दे सकेंगे। आरडीएसओ प्रस्तावित डिजाइन का मूल्यांकन करेगा और सैद्धांतिक मंजूरी मिलने पर प्रोटोटाइप बनाने की इजाजत देगा। विस्तृत डिजाइन, प्रोटोटाइप बनाने और कड़े स्थिर और गतिशील परीक्षण के बाद, पूरे रेक का फील्ड ट्रायल होगा। इसके बाद ही इसे सुरक्षा प्रमाणीकरण, मुख्य रेलवे सुरक्षा आयुक्त द्वारा निरीक्षण और सेवा में शामिल करने के लिए रेलवे बोर्ड की मंजूरी मिलेगी।
श्री वैष्णव ने कहा कि नए फ्रेमवर्क से स्टील, पेट्रोलियम, केमिकल, दूध, प्लास्टिक और दूसरे उद्योगों के लिए खास तरह के वैगन बनाने में आसानी होगी, जिन्हें स्वनिर्धारित परिवहन समाधान की जरूरत होती है। इस सुधार से वैगन डिजाइन और निर्माण के लिए एक नयी व्यवस्था बनने, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने और अलग-अलग क्षेत्रों में माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।
सुधार 16ः पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन
श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पेट्रोलियम, तेल और लुब्रिकेंट (पीओएल) उत्पादों के परिवहन के लिए खास तरह के टैंक वैगन की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में, जिसमें सभी टैंक वैगन भारतीय रेलवे के पास होते थे, तेल कंपनियों को अपनी संचालन जरूरतों के हिसाब से खास वैगन लाने की आजादी नहीं थी। इस समस्या को दूर करने के लिए, भारतीय रेलवे ने पेट्रोलियम टैंक वैगन के डिजाइन और उन्हें शामिल करने से जुड़ी संरचनात्मक रुकावटों को हटा दिया है। अब तेल कंपनियाँ सीधे खास वैगन खरीद सकेंगी या लीजिंग एजेंसियों के जरिए उन्हें लीज पर ले सकेंगी और खास जरूरतों के लिए भारतीय रेलवे नेटवर्क पर चला सकेंगी।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस सुधार से खास तरह के टैंक वैगन का इस्तेमाल शुरू हो सकेगा, रसद योजना बेहतर होगी, परिवहन का खर्च कम होगा, रेल से पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही बढ़ेगी और उत्पाद का नुकसान और मिलावट जैसे सड़क परिवहन से जुड़े जोखिम भी कम होंगे।
सुधार 17ः अनाज, आटा और दालों का परिवहन
श्री वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अनाज, आटा और दालों के परिवहन के लिए भी एक बड़ा सुधार किया है। इसके तहत माल ढुलाई के शुल्क को आसान बनाया गया है और कंटेनरों के जरिए ढुलाई को बढ़ावा दिया गया है।
नई नीति के तहत, पहले के मुश्किल स्लैब-आधारित माल ढुलाई ढांचे की जगह अब प्रति टन प्रति किलोमीटर की आसान दर वाला ढांचा लागू किया गया है। यह बदलाव कंटेनरों के जरिए अनाज, आटा और दालों के परिवहन की इजाजत देता है, जिससे इन्हें संभालना आसान हो जाता है, संग्रहण बेहतर होता है और संचालन की जरूरतों के हिसाब से अलग-अलग चरणों में इनका वितरण किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कंटेनरों को विक्रेता या खरीददार के परिसर में रखा जा सकता है और पूरी रेक को रोके बिना, मांग के अनुसार इनका वितरण किया जा सकता है। चूंकि कंटेनर सील रहते हैं, इसलिए मिलावट या खराबी की संभावना भी काफी कम हो जाती है। इससे अनाज के परिवहन की सुरक्षा और गुणवत्ता बेहतर होती है और साथ ही लॉजिस्टिक्स की कार्यक्षमता भी बढ़ती है।
रिफॉर्म एक्सप्रेस पहल के तहत, भारतीय रेलवे ने पहले नौ बड़े संरचनात्मक सुधार लागू किए थे, जिसमें ट्रेन के अंदर लगातार सफाई, गति शक्ति कार्गो टर्मिनलों का विस्तार, रेलटेक पॉलिसी और पोर्टल, रेल दावा अधिकरण का डिजिटलीकरण, नमक और ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट के लिए खास कंटेनर, निर्माण-गुणवत्ता में सात सुधार, टिकट निरस्त करने और रिफंड के आसान नियम और बोर्डिंग पॉइंट में डिजिटल बदलाव शामिल हैं।
श्री वैष्णव ने कहा कि नए सुधारों से माल ढुलाई का एक बड़ा हिस्सा सड़क से रेल की ओर ले जाने में मदद मिलेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरण को काफी फायदा होगा। उन्होंने बताया कि सड़क परिवहन की तुलना में रेल परिवहन से लगभग 90 प्रतिशत कम कार्बन उत्सर्जन होता है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सामानों के लिए धीरे-धीरे कंटेनरों के इस्तेमाल को बढ़ाने से भारतीय रेलवे का माल ढुलाई का दायरा पारंपरिक थोक कार्गो से आगे बढ़ेगा और उसका माल ढुलाई का कारोबार और मजबूत होगा।
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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भारत के माल ढुलाई संचालन को मजबूत करने के लिए ‘‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’’ के तहत आठ और संरचनात्मक सुधारों की घोषणा की
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