मुंबई । देशभर में महिलाओं और बच्चियों के साथ बढ़ रही दुष्कर्म एवं उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर समाज में गहरी चिंता व्याप्त है। इसी क्रम में सामाजिक चिंतक समाजसेविका संतोष पुरोहित ने कहा कि बेटियों की सुरक्षा आज सबसे बड़ी सामाजिक चुनौती बन चुकी है और अब केवल संवेदनाएं व्यक्त करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सरकार, प्रशासन और समाज को मिलकर ठोस एवं प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में सामने आए जघन्य अपराधों ने पूरे देश को झकझोर दिया है। ऐसे मामलों में पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने तथा दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि समाज में कानून का भय स्थापित हो और भविष्य में ऐसे अपराधों की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
संतोष पुरोहित ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और नैतिक मूल्यों से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षण संस्थानों और समाज के सभी वर्गों से महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि न्याय प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब से पीड़ित परिवारों का भरोसा कमजोर होता है। इसलिए ऐसे मामलों की त्वरित सुनवाई कर दोषियों को समयबद्ध सजा दिलाने की व्यवस्था को और प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
पुरोहित ने समाज से अपील की कि महिलाओं और बच्चियों के सम्मान तथा सुरक्षा के लिए सभी नागरिक अपनी जिम्मेदारी निभाएं और अपराधों के प्रति मौन रहने के बजाय जागरूक एवं संवेदनशील समाज के निर्माण में सहयोग करें।

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