उदयपुर राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने कहा कि राजस्थान के राज्य वित्त पोषित कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों की विभिन्न लंबित समस्याओं एवं पेंशन व्यवस्था के स्थायी समाधान की मांग को लेकर महासंघ के आह्वान पर प्रदेश के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनर आगामी 24 अगस्त 2026 को जयपुर के शहीद स्मारक पर आयोजित धरना-प्रदर्शन में सक्रिय एवं संगठित रूप से सहभागिता करेंगे।

उन्होंने कहा कि यह धरना Federation of the Pensioners of the State Universities of Rajasthan के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है।

कृषि विश्वविद्यालय पेंशनर्स महासंघ इसे केवल पेंशन भुगतान की समस्या के रूप में नहीं, बल्कि वर्षों तक राज्य की कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं ग्रामीण विकास में सेवाएं देने वाले सेवानिवृत्त शिक्षकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सम्मान, सामाजिक सुरक्षा और वैधानिक सेवानिवृत्ति अधिकारों का विषय मानता है।

महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने बताया कि राजस्थान के पांचों कृषि विश्वविद्यालयों—महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (MPUAT), स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर (SKRAU), श्री कर्ण नरेंद्र कृषि विश्वविद्यालय, जोबनेर (SKNAU), कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर तथा कृषि विश्वविद्यालय, कोटा—के पेंशनरों की समस्याओं का अब स्थायी समाधान अत्यंत आवश्यक हो गया है।

महासंघ की प्रमुख मांग है कि पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों की पेंशन की स्थायी वित्तीय जिम्मेदारी राज्य सरकार अपने हाथ में ले तथा पेंशन का भुगतान राज्य कोषागार (Treasury) के माध्यम से सीधे एवं नियमित रूप से किया जाए।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की आर्थिक स्थिति अथवा अनुदान की उपलब्धता के आधार पर पेंशनर की अर्जित पेंशन को प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए।

राज्य सरकार के कर्मचारियों एवं पेंशनरों को जिस प्रकार नियमित पेंशन, महंगाई राहत, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, एरियर सहित अन्य सेवानिवृत्ति परिलाभ दिए जाते हैं, उसी प्रकार राज्य वित्त पोषित कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों को भी समान पेंशन एवं सभी पात्र परिलाभ दिए जाने चाहिए।

महासंघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. एस.के. भटनागर, उदयपुर, डॉ. आर.एस. चावड़ा, जोधपुर, डॉ. अरुण कुमार शर्मा, कोटा, मनफूल मांगलिया, बीकानेर तथा मूलचंद जाट, जोबनेर ने संयुक्त रूप से कहा कि पेंशन समस्या के अस्थायी समाधान के बजाय राज्य सरकार को पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की वर्तमान एवं भविष्य की पेंशन देनदारी का समुचित वित्तीय आकलन कर स्थायी राज्य समर्थित पेंशन व्यवस्था लागू करनी चाहिए।

लंबित पेंशन, ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, GPF, 7वें वेतन आयोग के एरियर एवं अन्य स्वीकृत देयकों का तत्काल भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

साथ ही प्रत्येक विश्वविद्यालय में पेंशनर सुविधा एवं शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि पेंशनरों को अपने ही अर्जित अधिकारों के लिए विश्वविद्यालय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।

उन्होंने कहा कि पेंशनरों को राज्य कर्मचारियों के समान पेंशन एवं सेवानिवृत्ति परिलाभ उपलब्ध कराना ही इस समस्या का न्यायपूर्ण और स्थायी समाधान है।

महासंघ के प्रदेश मंत्री डॉ. भारत सिंह भीमावत, जोधपुर, डॉ. भूपेंद्र उपाध्याय, उदयपुर, महावीर शर्मा, कोटा, नेमाराम जाट, बीकानेर, इंजीनियर मोहनलाल चांगवाल, जोबनेर तथा प्रदेश संगठन मंत्री इंजीनियर सुरेंद्र भूषण सहाय, उदयपुर ने कहा कि पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के पेंशनरों की एकजुटता के साथ 24 अगस्त का धरना राज्य सरकार का ध्यान इस गंभीर एवं वर्षों पुरानी समस्या के स्थायी समाधान की ओर आकर्षित करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को मुख्यमंत्री के स्तर पर उच्चस्तरीय समिति गठित कर कृषि विश्वविद्यालयों सहित राज्य वित्त पोषित विश्वविद्यालयों की पेंशन व्यवस्था का समग्र अध्ययन करवाना चाहिए तथा निश्चित समय-सीमा में स्थायी समाधान लागू करना चाहिए।

समिति में पेंशनर प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए तथा पांचों कृषि विश्वविद्यालयों की पेंशन देनदारी के लिए स्थायी वित्तीय व्यवस्था एवं Treasury से सीधे भुगतान का स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।

महासंघ पदाधिकारियों ने कहा कि “पेंशन कोई अनुग्रह नहीं, बल्कि वर्षों की सेवा से अर्जित अधिकार है।” जिन्होंने अपने जीवन के महत्वपूर्ण वर्ष राजस्थान की कृषि शिक्षा, अनुसंधान, प्रसार एवं किसानों के हित में समर्पित किए हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक असुरक्षा में नहीं छोड़ा जा सकता।

यह आंदोलन किसी विश्वविद्यालय, अधिकारी अथवा व्यक्ति के विरुद्ध नहीं, बल्कि पेंशनरों के सम्मानजनक जीवन, सामाजिक सुरक्षा, समान पेंशन अधिकार और स्थायी आर्थिक सुरक्षा के लिए है।

महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष इंजीनियर वीरेन्द्र सिंह सोलंकी एवं प्रदेश महामंत्री इंजीनियर अरविंद कौशल ने पांचों कृषि विश्वविद्यालयों के सभी पेंशनरों से अपील की है कि वे 24 अगस्त को जयपुर के शहीद स्मारक पर अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर धरना-प्रदर्शन को सफल बनाएं और राज्य सरकार तक एकजुट संदेश पहुंचाएं कि कृषि विश्वविद्यालय पेंशनरों की पेंशन समस्या का अब अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहिए।