उदयपुर — जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के निवर्तमान कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत पर मीडिया प्रबंधन के जरिए अपनी एक महान और आदर्श कुलपति की झूठी छवि बनाने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की भर्तियों और पदोन्नति में खुलेआम घोर भाई-भतीजावाद और अनियमितताएं कीं।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि प्रो. सारंगदेवोत के कार्यकाल में कर्मचारियों को उनके मौलिक अधिकारों से वंचित रखा गया: वित्तीय एवं मूलभूत अधिकारों का हनन: कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा समय-समय पर घोषित बोनस, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वर्दी, तथा महंगाई भत्ता (DA) नहीं दिया गया।
कर्मचारियों का कानूनी अधिकार होने के बावजूद उन्हें पे-स्लिप (वेतन पर्ची) और पीएफ (PF) स्टेटमेंट तक मुहैया नहीं कराए गए, यहाँ तक कि सेवानिवृत्ति के समय भी पीएफ का हिसाब नहीं दिया गया।
सेवा रिकॉर्ड और पदोन्नति में गड़बड़ी: कर्मचारियों की पर्सनल फाइल और सर्विस बुक कभी अपडेट नहीं की गईं और न ही सेवानिवृत्ति के समय उन्हें उपलब्ध कराई गईं। वार्षिक वेतन वृद्धि (इन्क्रीमेंट) के आदेश जारी नहीं किए गए। 9-18-27 वर्ष की सेवा के बाद मिलने वाली नियमानुसार पदोन्नति रोक दी गई, जबकि चहेतों को नियमों को ताक पर रखकर आउट-ऑफ-टर्न पदोन्नति दी गई। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का भुगतान भी नहीं किया गया।
तदर्थ से नियमितीकरण में दोहरा रवैया: जहाँ कई कर्मचारी 10 से 15 वर्षों तक संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) पर काम करते रहे, वहीं शैतान सिंह शक्तावत की पुत्री विनीता शक्तावत (अनुसंधान सहायक) को तदर्थ (Adhoc) आधार पर ₹18,000 वेतन पर नियुक्ति (आदेश संख्या: JRVRVU/ESTA/2025-26/7220-25 दिनांक 26-02-2026) देने के मात्र छः महीने के भीतर ₹21,600 वेतन पर नियमित कर दिया गया (आदेश संख्या: JRNRVU/esta/2025-26/2115-20 दिनांक 21-07-2026)।
स्वजनों और करीबियों की नियुक्तियों और पदोन्नति की सूची आरोप है कि प्रो. सारंगदेवोत के कार्यकाल में उनके कई रिश्तेदारों और चहेतों को आउट-ऑफ-टर्न नियुक्तियां और पदोन्नतियां दी गईं: डॉ. युवराज सिंह (भतीजे) – प्रोफेसर नीरू राठौड़ (भांजी) – एसोसिएट प्रोफेसर राजेंद्र सिंह सारंगदेवोत (भतीजे) खुशबू राठौड़ (भतीजे की पत्नी) – एसोसिएट प्रोफेसर नरदेव सिंह सारंगदेवोत (भतीजे) – एसोसिएट प्रोफेसर लोकेंद्र सिंह (भतीजे डॉ. युवराज सिंह के भतीजे) – विधि (Law) मोनिका सारंगदेवोत – असिस्टेंट प्रोफेसर सुरेंद्र सिंह सारंगदेवोत – इलेक्ट्रिशियन करण सिंह सारंगदेवोत – शारीरिक शिक्षा दिलीप सिंह – इलेक्ट्रिशियन युवराज सिंह – नर्सिंग महावीर सिंह – एकाउंट्स रतन सिंह – परीक्षा विभाग चंद्रभान सिंह – केंद्रीय कार्यालय राम सिंह – केंद्रीय कार्यालय ओमकार सिंह – चालक (Driver) दशरथ सिंह – चालक (Driver) गर्वित सिंह सारंगदेवोत, छत्रपाल सिंह आदि।
इसके अतिरिक्त, यह भी आरोप लगाया गया है कि भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी (BNU) की विद्या प्रचारिणी सभा के चुनावों में अपना वर्चस्व और स्थिति मजबूत करने के लिए कई अन्य लोगों को अवैध रूप से नियुक्तियों और लाभों से नवाजा गया। व्यक्तिगत हित साधने और संरक्षण प्राप्त करने के लिए राजनीतिक नेताओं, मीडिया घरानों, पुलिस अधिकारियों और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों को नियम विरुद्ध अनुचित लाभ पहुंचाए गए।