श्री प्रेम प्रकाश शर्मा जी देहरादून में आर्यसमाज के प्रमुख स्तम्भ हैं। वह जन्म से आर्यसमाज से जुड़े रहे हैं।
उन्होंने अपने जीवन में अनेक आर्यसमाजों का सुधार व उन्नति के अनेक कार्यों को किया है। कई आर्यसमाजों के मंत्री एवं प्रधान रहे हैं।
आर्यसमाज डाकपत्थर-देहरादून, आर्यसमाज लक्ष्मण चौक, देहरादून तथा वैदिक साधन आश्रम तपोवन, देहरादून के मंत्री आदि पदों को भी सुशोभित किया है। आपके कार्यकाल में इन सभी संस्थाओं ने आशातीत उन्नति की है।
वर्तमान में भी आप आर्यसमाज, चकराता-देहरादून के विकास एवं उन्नति के कार्यों से जुड़े हैं। कुछ वर्ष पूर्व यह आर्यसमाज प्रायः निष्क्रिय हो गया था।
वहां आपने इसकी उन्नति के अनेक कार्यों को किया। चकराता एक हिल स्टेशन हैं।
वहां पर्यटक जाते हैं। उनके लिये सुखद निवास हेतु आपने एक यात्री निवास का भी प्रबन्ध किया है।
आर्यसमाज चकराता के पुराने भवन का भी जीर्णोद्धार किया गया है। यह समाज अब उन्नति के पथ पर अग्रसर है।
इस आर्यसमाज के प्रत्येक वर्ष वार्षिकोत्सव आयोजित किए जाते हैं। श्री शर्मा जी के प्रेरणा से वहां आर्यसमाज के विद्वान श्री शैलेश मुनि सत्यार्थी जी जाया करते हैं।
देहरादून से शर्मा जी अपने अनेक मित्रों एवं परिचितों को चकराता आर्यसमाज में लेकर जाते हैं। तीन दिनों का वार्षिकोत्सव आयोजित किया जाता है।
वहां एक शोभा यात्रा भी निकाली जाती है। शर्मा जी ने वैदिक साधन आश्रम तपोवन की उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
यह आश्रम वर्तमान में भव्य यज्ञशाला, सभागार, कार्यालय भवन एवं ऋषिभक्त साधकों के लिये सुविधापूर्ण आवास व्यवस्था से युक्त है। जो भी व्यक्ति आश्रम में आता है इसकी प्रशंसा करता है।
शर्मा जी ने आर्यसमाज के कार्यों को काफी बढ़ाया है। आर्यसमाज की उन्नति के लिये एक प्रकार से उन्होंने अपना जीवन दिया हुआ है।
उनका योगदान हमेशा स्मरण रखा जायेगा।
श्री प्रेम प्रकाश शर्मा जी प्रत्येक वर्ष अपने निवास पर पांच दिवसीय वेद पारायण यज्ञ, वैदिक मान्यताओं पर प्रवचन एवं भजनों का आयोजन करते हैं। यह आयोजन प्रत्येक वर्ष 7 से 11 सितम्बर तक पांच दिवसों का होता है।
पांचवें दिन समापन के अवसर पर स्थानीय आर्यसमाजों के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित होते हैं। शर्मा जी के परिवार के सभी लोग भी इस आयोजन में पांचों दिन उपस्थित रहते हैं।
इस वर्ष यह आयोजन 7 सितम्बर से 11 सितम्बर, 2026 तक उनके निवास 22 दून विहार, राजपुर रोड, जाखन, देहरादून में सम्पन्न किया गया। आज 11 सितम्बर, 2026 को इस आयोजन का समापन हुआ।
आज के आयोजन में प्रातः 8.00 बजे से यज्ञ हुआ। यज्ञ में द्रोणस्थली कन्या गुरुकुल की कन्याओं ने मंत्रोच्चार किया।
भजनोपदेश के किए प्रख्यात भजनोपदेशक श्री नरेश दत्त आर्य जी बिजनौर से पधारे थे। सत्संग प्रातः एवं सायं दो सत्रों में सम्पन्न किया जाता था।
पिछले दो तीन दशकों से यह आयोजन प्रतिवर्ष होता आ रहा है। हमें भी पिछले दो दशकों से इस आयोजन में उपस्थित होने का अवसर मिलता रहा है।
आज के सत्संग में पं. नरेशदत्त आर्य जी के भजन हुए। श्री शैलेश मुनि सत्यार्थी जी का ज्ञानवर्धक प्रभावशाली पे्ररक व्याख्यान हुआ।
शर्मा जी ने सभी आमंत्रित एवं स्थानीय विद्वानों का दक्षिणा आदि देकर सम्मान किया। समापन के बाद प्रीतिभोज का आयोजन भी किया गया।
इस अवसर पर हमें भी अपने अनेक स्थानीय मित्रों से मिलने का अवसर मिला जो लम्बे समय से नहीं मिले थे।
आज का आयोजन हमें लगता है कि प्रत्येक आर्य को यह सन्देश देता है कि वह भी अपनी सामर्थ्य के अनुसार अपने परिवारों में ऐसे आयोजन किया करें जिससे स्थानीय आर्य परिवारों को प्रेरणा मिले और यजमान परिवार के पड़ोसियों को आर्य संस्कृति को निकट से जानने का अवसर मिले।
आज के इस आयोजन के लिये श्री शर्मा जी प्रशंसा के पात्र हैं। ईश्वर से प्रार्थना हैं कि वह स्वस्थ रहें और भविष्य में भी ऐसे आयोजन सम्पन्न कराते रहें जो स्थानीय लोगों के लिये पे्ररणा का कार्य करें। ओ३म् शम् -मनमोहन कुमार आर्य पताः 196 चुक्खूवाला-2 देहरादून-248001 फोनः09412985121