उदयपुर। गीतांजलि हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए शहर में पहली बार एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) गाइडेड चोलेडोकोडुओडेनोस्टॉमी (ईयूएस-सीडीएस) की सफल प्रक्रिया संपन्न की। यह अत्याधुनिक एवं जीवनरक्षक प्रक्रिया डॉ. पंकज गुप्ता, विभागाध्यक्ष एवं डॉ. आशिष मेहता, डायरेक्टर के मार्गदर्शन में डॉ. कार्तिकेय माथुर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट एवं एडवांस्ड इंटरवेंशनल एंडोस्कोपिस्ट द्वारा सफलतापूर्वक की गई।

रोगी पेरिअम्पुलरी कैंसर के कारण गंभीर कोलेंजाइटिस (पित्त नली का संक्रमण) से पीड़ित थी तथा अत्यंत गंभीर अवस्था में वेंटिलेटर सपोर्ट पर हॉस्पिटल लाई गई थी। सामान्यतः ऐसे मरीजों में ईआरसीपी के माध्यम से पित्त नली में स्टेंट डाला जाता है, लेकिन इस मरीज में कैंसर के कारण ड्यूओडेनम (आंत के प्रारंभिक भाग) के दूसरे हिस्से (डी2) में गंभीर रुकावट होने से एंडोस्कोप उस स्थान तक पहुंच ही नहीं सका। इस कारण ईआरसीपी  तकनीकी रूप से संभव नहीं था।

ऐसी चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में डॉ. कार्तिकेय माथुर ने एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (ईयूएस) की सहायता से बिना किसी बड़े ऑपरेशन के सीधे ड्यूओडेनम से पित्त नली तक नया मार्ग बनाकर विशेष मेटल स्टेंट स्थापित किया, जिससे संक्रमित पित्त का तुरंत निकास हुआ और संक्रमण पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया। सफल उपचार के बाद मरीज की स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ तथा जो मरीज अस्पताल में वेंटिलेटर पर भर्ती हुई थी, वह अब स्वस्थ होकर सामान्य रूप से चल-फिर एवं बातचीत करते हुए अस्पताल से छुट्टी पा चुकी है।

डॉ. कार्तिकेय माथुर ने बताया कि इंटरवेंशनल ईयूएस गैस्ट्रोएंटरोलॉजी की अत्याधुनिक तकनीक है, जिसके माध्यम से केवल जांच ही नहीं बल्कि कई जटिल बीमारियों का बिना बड़े ऑपरेशन के उपचार भी संभव हो गया है। जिन मरीजों में ईआरसीपी  असफल हो जाए या तकनीकी रूप से संभव हो, उनके लिए ईयूएस- गाइडेड बाइलियरी ड्रेनेज (ईयूएस- बीडी), विशेषकर ईयूएस- कोलेडोकोडुओडेनोस्टॉमी (ईयूएस- सीडीएस), एक सुरक्षित एवं प्रभावी विकल्प है। इससे मरीज को पारंपरिक सर्जरी या बाहरी ड्रेनेज ट्यूब (पीटीबीडी) की आवश्यकता से भी कई मामलों में बचाया जा सकता है।

उन्होंने बताया कि गीतांजलि हॉस्पिटल में अब इंटरवेंशनल ईयूएस की उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिनमें ईयूएस गाइडेड बाइलियरी ड्रेनेज, ईयूएस गाइडेड सिस्टोगैस्ट्रोस्टॉमी, ईयूएस गाइडेड सिस्टोडुओडेनोस्टॉमी, ईयूएस गाइडेड कॉइल + ग्लू तथा अन्य जटिल एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं शामिल हैं।

इस उपलब्धि के साथ गीतांजलि मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल ने दक्षिण राजस्थान में एडवांस्ड इंटरवेंशनल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ा है। अब ऐसे जटिल मरीज, जिन्हें पहले बड़े शहरों में रेफर करना पड़ता था, उनका अत्याधुनिक उपचार उदयपुर में ही संभव हो सकेगा। यह उपलब्धि केवल शहर बल्कि पूरे क्षेत्र में गंभीर पैंक्रियाटोबिलियरी रोगों के उपचार की गुणवत्ता को नई दिशा प्रदान करेगी।


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