उदयपुर। उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 के परिणामों ने शहर की राजनीति में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मजबूत प्रभाव कायम होने का संकेत दिया है। नगर निगम के 80 वार्डों के घोषित परिणामों में भाजपा ने 53 वार्डों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है, जबकि कांग्रेस को 23 वार्डों में सफलता मिली। इसके अलावा 3 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशी विजयी रहे, जबकि माकपा ने 1 वार्ड में जीत दर्ज की।
इन परिणामों के साथ भाजपा ने कांग्रेस पर 30 सीटों की निर्णायक बढ़त बना ली है। 80 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए 41 सीटों की आवश्यकता है, जबकि भाजपा के खाते में 53 सीटें आई हैं। यानी भाजपा बहुमत के आंकड़े से 12 सीट अधिक लेकर बोर्ड गठन की मजबूत स्थिति में पहुंच गई है।
भाजपा को 66.25 प्रतिशत सीटें
वार्डवार परिणामों के आधार पर भाजपा ने कुल 80 में से 53 सीटें, यानी 66.25 प्रतिशत सीटों पर कब्जा किया है। कांग्रेस के खाते में 23 सीटें आई हैं, जो कुल सीटों का 28.75 प्रतिशत है। वहीं निर्दलीयों की हिस्सेदारी 3.75 प्रतिशत और माकपा की 1.25 प्रतिशत रही।
| दल | जीती सीटें | कुल 80 में हिस्सेदारी |
|---|---|---|
| भाजपा | 53 | 66.25% |
| कांग्रेस | 23 | 28.75% |
| निर्दलीय | 3 | 3.75% |
| माकपा | 1 | 1.25% |
| कुल | 80 | 100% |
कांग्रेस को मिली 23 सीटें, लेकिन बहुमत से काफी दूर
कांग्रेस ने 23 वार्डों में जीत हासिल कर निगम में विपक्ष की भूमिका के लिए अपनी स्थिति मजबूत की है, लेकिन भाजपा के मुकाबले पार्टी 30 सीट पीछे रह गई। 80 सदस्यीय सदन में कांग्रेस को बहुमत के लिए आवश्यक 41 सीटों से 18 सीट कम मिली हैं।
चुनावी नतीजों से यह भी स्पष्ट है कि भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य दलों एवं निर्दलीय उम्मीदवारों की उपस्थिति सीमित रही। केवल चार सीटें ऐसी रहीं जहां भाजपा और कांग्रेस के अलावा अन्य विकल्प विजयी होकर निगम सदन तक पहुंचे।
67.26 प्रतिशत मतदान ने तय की तस्वीर
उदयपुर नगर निगम क्षेत्र में इस बार मतदाताओं ने भी चुनाव में अच्छी भागीदारी दिखाई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार निगम क्षेत्र में 4,16,143 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 2,79,905 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इस तरह मतदान प्रतिशत 67.26 प्रतिशत रहा।
मतदान के लिए शहर में 410 बूथ बनाए गए थे और नगर निगम के 80 वार्डों से कुल 220 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। मतदान के बाद मतगणना राजस्थान कृषि महाविद्यालय, सूरजपोल परिसर में कराई गई।
वार्ड-दर-वार्ड मुकाबले में कई जगह कांटे की टक्कर
इस चुनाव में कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला देखने को मिला, जबकि बड़ी संख्या में वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय भी रहा। परिणाम आने के साथ ही अलग-अलग वार्डों में प्रत्याशियों की जीत-हार का अंतर भी स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और मतदाताओं के रुझान को सामने लाया।
कुछ वार्डों में मुकाबला बेहद करीबी रहा, तो कुछ स्थानों पर विजेता प्रत्याशियों ने उल्लेखनीय अंतर से जीत दर्ज की। परिणामों ने यह भी दिखाया कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय मुद्दों, प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ और संगठनात्मक ताकत ने चुनावी परिणामों को प्रभावित किया।
2019 के मुकाबले भाजपा की सीटों में बढ़ोतरी
यदि पिछले नगर निगम चुनाव से तुलना करें तो भाजपा के प्रदर्शन में सीटों के लिहाज से बढ़ोतरी दिखाई देती है। वर्ष 2019 में उदयपुर नगर निगम में 70 वार्ड थे, जिनमें भाजपा ने 44, कांग्रेस ने 20, माकपा ने 1 और निर्दलीयों ने 5 सीटें जीती थीं। वर्ष 2026 में वार्डों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है।
2026 में भाजपा ने 53 सीटें जीतकर पिछली बार के 44 के मुकाबले 9 सीटों की बढ़त दर्ज की। कांग्रेस भी 20 से बढ़कर 23 सीटों तक पहुंची, जबकि निर्दलीय सीटें 5 से घटकर 3 रह गईं और माकपा ने अपनी एक सीट बरकरार रखी।
हालांकि दोनों चुनावों में वार्डों की संख्या अलग होने के कारण सीटों की सीधी तुलना करते समय इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।
अब महापौर की कुर्सी पर नजर
चुनावी परिणाम घोषित होने के बाद अब राजनीतिक गतिविधियों का अगला केंद्र महापौर और उपमहापौर चुनाव होंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 21 सितंबर को महापौर और 22 सितंबर को उपमहापौर का चुनाव होना है।
भाजपा के 53 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत में होने के कारण महापौर पद पर भी पार्टी की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि भाजपा महापौर पद के लिए किस चेहरे को मैदान में उतारती है और निगम की नई सत्ता का नेतृत्व किसके हाथों में आता है।
लगातार सातवीं बार बोर्ड बनाने की स्थिति में भाजपा
इन परिणामों का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि उदयपुर नगर निगम में भाजपा ने एक बार फिर अपना मजबूत संगठनात्मक आधार साबित किया है। 53 सीटों का आंकड़ा न केवल बहुमत से काफी ऊपर है, बल्कि कांग्रेस पर 30 सीटों की बड़ी बढ़त भी भाजपा के पक्ष में स्पष्ट जनादेश को दर्शाती है।
अब परिणामों के बाद शहर की राजनीति में नई परिषद के गठन, महापौर के चयन और आगामी पांच वर्षों के विकास एजेंडे पर चर्चा तेज होने की संभावना है। सड़क, सफाई, यातायात, पेयजल, सीवरेज, शहरी विस्तार, पर्यटन और स्मार्ट सिटी से जुड़े मुद्दे नई परिषद के सामने प्रमुख चुनौतियों के रूप में रहेंगे।
कुल मिलाकर उदयपुर नगर निगम चुनाव 2026 में 80 वार्डों का जनादेश भाजपा के पक्ष में स्पष्ट रूप से गया है। 53 सीटों के साथ भाजपा सत्ता की बागडोर संभालने की स्थिति में है, जबकि 23 सीटों के साथ कांग्रेस को मजबूत विपक्ष की भूमिका निभानी होगी। निर्दलीय और माकपा के चार पार्षद भी सदन में अपनी भूमिका निभाएंगे।