प्रतापगढ़/ राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार ष्ज्तंदेवितउंजपअम ज्नमेकंलष्. ैजतंदहमत क्ंदहमत.छव.ळव.ज्मसस (अजनबियों से सावधान - मना करो-दूर जाओ-बताओ।) अभियान के तहत आज प्रतापगढ न्यायक्षेत्र में स्कूलों में न्यायिक अधिकारीगण, स्कूली बच्चों को इस अभियान के बारे में जानकारी प्रदान की गई, उक्त अभियान के तहत श्रीमान् अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण महोदय श्रीमती आशा कुमारी (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) एवं श्रीमान् सुन्दर लाल खारोल(अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश)- सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतापगढ, द्वारा दी सेन्ट्रल हाईट्स स्कुल, प्रतापगढ में ैजतंदहमत क्ंदहमत.छव.ळव.ज्मसस (अजनबियों से सावधान - मना करो-दूर जाओ-बताओ।) थीम के तहत विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।

अभियान के तहत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, श्रीमती आशा कुमारी ने संबोधित करते हुए बताया कि शिविर का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों को अपहरण एवं व्यपहरण के बारे में जानकारी देना है।

श्रीमान् ने बताया कि इस महत्वपूर्ण विषय पर हमको बात करनी है। हर बच्चे को सुरक्षित रहने, सम्मान से जीने और बिना डर के पढने-लिखने का अधिकार है।

श्रीमान् द्वारा बच्चों को बताया गया आपका एक गलत कदम आपको फंसा सकता हैः अपहरण, अगवा करना और बाल तस्करी से सतर्क रहोः अपहरण और तस्करी से खुद को बचाओ।

श्रीमान द्वारा बच्चों को बताया गया कि अपहरण का अर्थ है किसी बच्चे को उसके माता-पिता या वैध अभिभावक की अनुमति के बिना उससे दूर ले जाना। यह बच्चों के विरूद्ध होने वाले अत्यंत गंभीर अपराध है क्योंकि इसमें बच्चे को सुरक्षा से हटाकर खतरे में डाल दिया जाता है।

अपहरण कहीं भी हो सकता है - स्कूल के बाहर, ट्यूशन सेंटर के पास, बस स्टैंड, बाजार, रेलवे स्टेशन, मेला, खेल के मैदान या सुनसान रास्तों पर। इसलिए हर विद्यार्थी को सतर्क रहना और अपनी सुरक्षा के बारे में जागरूक होना आवश्यक है।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 भारत का मुख्य आपराधिक कानून है जो बच्चों को अपहरण, व्यपहरण, तस्करी और शोषण से सुरक्षा प्रदान करता है। न्यायालय केवल अपराधियों को दंडित करने पर ही नहीं, बल्कि बच्चों के बचाव और पुनर्वास पर भी विशेष ध्यान देता है।

इसके साथ ही उपस्थित छात्रों कों व्यपहरण के विषय मंे भी जानकारी दी गई बच्चांे को बताया गया कि व्यपहरण का अर्थ है किसी भी व्यक्ति को बल, धमकी, धोखे, प्रलोभन या छल के माध्यम से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना। यह बच्चों और बड़ों दोनों के साथ हो सकता है। अपहरणकर्ता बच्चों को बालश्रम, बाल तस्करी, जबरन भीख मंगवाना, फिरौती अथवा शोषण के लिए अपहृत करते हैं।

अपहरण से बचने के लिए विद्यार्थियों को खतरे के संकेत जल्दी पहचानने चाहिए।

जैसेः कोई अजनबी बार-बार आपके स्कूल, घर या माता-पिता के बारे में पूछे, कोई बिना कारण महंगे उपहार दे, कोई माता-पिता का नाम लेकर झूठ बोले, कोई अजनबी आपको अनजान जगह ले जाने का दबाव डाले, कोई व्यक्ति स्कूल या घर के आसपास बार-बार घूमे, कोई वाहन बार-बार एक ही जगह रूकता दिखाई दे एवं किसी मित्र का अचानक लापता हो जाना।

यदि ऐसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत माता-पिता, शिक्षक या स्कूल को बताएं और आवश्यकता होने पर 1098 पर कॉल करें।

बाल तस्करी बच्चों के विरूद्ध होने वाला सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। बाल तस्करी का अर्थ है बच्चों को अवैध रूप से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना, खरीदना-बेचना या शोषण के उद्देश्य से रखना।

यह अपराध केवल अपहरण तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके बाद बच्चों को बाल श्रम, जबरन भीख और अन्य शोषण में धकेल दिया जाता है। बाल तस्करी अक्सर हिंसा से शुरू नहीं होती।

कई बार अपराधी पहले बच्चों या उनके परिवार का विश्वास जीतते हैं और फिर उन्हें फंसा लेते हैं।

श्रीमान् सुन्दर लाल खारोल सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने उपस्थित सभी विद्यार्थिगणों, बच्चों से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतापगढ की ओर से एक अत्यंत महत्वपूर्ण अपील की गई।

किसी कानूनी सहायता की आवश्यकता हो तो आप बेझिझक राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के हेल्पलाइन नंबर 15100 पर संपर्क कर सकते है। आवाज उठाना बहादुरी का काम है।

आपातकालीन स्थिति में तुरंत बाल हेल्पलाइन 1098 या पुलिस 112 पर संपर्क करें। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण स्कूलों, गॉवों, शहरों में विधिक जागरूकता शिविरों के माध्यम से बच्चों और उनके माता-पिता को बाल अधिकार एवं कानूनों की जानकारी प्रदान करता है।

जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, प्रतापगढ आपकों हर संभव कानूनी मदद और परामर्श प्रदान करता है।

कार्यक्रम के विशिष्ठ अतिथि के रूप में उद्बोधन देते हुए श्री मुलशंकर मेघवाल जिला शिक्षा अधिकारी (प्राथमिक) ने बताया कि बच्चों के खिलाफ बढतें अपराध के कारण बच्चों को सुरक्षा के उपाय सिखाना जरूरी है।

क्योकि वर्तमान समय में अपराधी बच्चों को किसी वस्तु जैसे मोबाईल चोकलेट आदि का झांसा देकर अपहरण कर लेते है, तथा उनके साथ मारपीट करते है, यदि बच्चें शिक्षित होगें तो जल्दी से किसी के झांसे में नहीं आएगें, यदि किसी तरीके से आ भी गए तो अपनी सुझ बुझ से जल्द ही बाहर आ सकेगें।

साथ ही शिक्षा का मूल उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं है, बल्कि बच्चे को एक निडर, जागरूक और सुरक्षित नागरिक बनाना है। ‘स्टैंजर डेंजर और नो-गो-टे‘ जैसे विषय आज के समय की अनिवार्य आवश्यकता हैं।

हमारे बच्चे असुरक्षित स्पर्श या अजनबियों के गलत इरादों को पहचान सकें और बिना डरे अपनी बात कह सकें, यही इस अभियान का मुख्य लक्ष्य है। हम हर स्कूल को एक ‘सुरक्षित क्षेत्र‘ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

उक्त अभियान के क्रम जिले के समस्त न्यायिक अधिकारीगण श्री सुरेश बंसल विशिष्ठ न्यायाधीश एनडीपीस न्यायालय, प्रतापगढ, श्री महेन्द्र कुमार दवे विशिष्ठ न्यायाधीश पारिवारिक न्यायालय, प्रतापगढ़, श्री वैभव कुमार टेलर न्यायाधीश महोदय अजा/अजजा न्यायालय प्रातपगढ, श्रीमती दिप्ती स्वामी- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतापगढ, श्री तुषार शर्मा न्यायाधीश ग्राम न्यायालय प्रतापगढ, सुश्री तन्वी गोस्वामी सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतापगढ, श्रीमती स्तुति राठी अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, प्रतापगढ, द्वारा प्रतापगढ न्यायाक्षैत्र की विभिन्न स्कूलों में पहुंच कर जागरूकता के इस अभियान के तहत ’’अजनबियों से सावधान - मना करो-दूर जाओ-बताओः थीम के बारे में अपने विचार उपस्थित विद्यार्थीयों से साझा किये।