उदयपुर। सेंट पॉल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षा, खेल, संस्कार और विद्यालय की गौरवशाली परंपरा से जुड़े अनुभव साझा किए गए। इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों, शिक्षकों, प्राचार्य, प्रबंधन और छात्र प्रतिनिधियों ने शिक्षा के बदलते स्वरूप तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर अपने विचार रखे।

कार्यक्रम में 1995 बैच के पूर्व छात्र चांद चावत ने विद्यालय के खेलों में योगदान को याद किया। अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन पदक विजेता, राष्ट्रीय चैंपियन और कोच चावत ने बताया कि उनके समय में सेंट पॉल्स में खेलों के लिए उपलब्ध सुविधाएं उदयपुर के चुनिंदा विद्यालयों में थीं। उन्होंने कहा कि विद्यालय, शिक्षकों और परिवार से मिले सहयोग ने उनके खेल जीवन की मजबूत नींव तैयार की। उन्होंने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ खेलों में भी सक्रिय रहने और अपने साथियों को प्रेरित करने का संदेश दिया।

2000 बैच के चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल बदाला ने विद्यालय से अपने भावनात्मक जुड़ाव को साझा करते हुए कहा कि स्कूल ने उन्हें केवल व्यावसायिक शिक्षा ही नहीं, बल्कि जीवन के मूल्य भी दिए। उन्होंने अच्छे पेशेवर के साथ अच्छा इंसान बनने की आवश्यकता पर जोर दिया और उदयपुर को वाणिज्य शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाने की अपनी सोच भी साझा की।

1996 बैच के पूर्व छात्र मोहित जोशी ने विद्यालय के विशाल खेल मैदान, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षकों और खेल संस्कृति को अपनी उपलब्धियों की आधारशिला बताया। अल्ट्रा रनर, अल्ट्रा साइकिलिस्ट और पर्वतारोहण के प्रति समर्पित जोशी ने कहा कि विद्यालय ने उन्हें आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी तथा वे भविष्य में भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध रहेंगे।

विद्यालय के विज्ञान विभागाध्यक्ष लक्ष्मण सिंह चौहान ने बदलती शिक्षण पद्धतियों और तकनीक के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता शिक्षकों का स्थान लेने के बजाय उनके साथ मिलकर शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक होगी। अंग्रेजी विभाग की पीजीटी फ्लोरा जैकब ने भी बदलती पीढ़ी की अपेक्षाओं और शिक्षक-विद्यार्थी-अभिभावक के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता बताई।

विद्यालय प्रबंधन ने शिक्षकों, पूर्व विद्यार्थियों और इंफ्रास्ट्रक्चर को संस्था की प्रमुख ताकत बताया। प्रबंधन ने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ विद्यालय अपने मूल्यों, परंपराओं और नैतिक आधार को बनाए रखते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने पर केंद्रित है। विद्यालय में सहशिक्षा, बदलते सामाजिक परिवेश और प्रत्येक बच्चे की अलग क्षमता को ध्यान में रखकर शिक्षा देने पर भी जोर दिया गया।

हेड गर्ल कृष्णा चतुर और हेड बॉय हर्षित शर्मा ने नेतृत्व, लैंगिक समानता तथा वरिष्ठ-जूनियर विद्यार्थियों के बीच बेहतर संवाद की जरूरत पर विचार रखे।

प्राचार्य फादर जॉन बॉस्को ने शिक्षा को केवल अकादमिक उपलब्धियों तक सीमित न रखते हुए चरित्र निर्माण, मूल्यों, अनुशासन और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को प्राथमिकता देने की बात कही। विद्यालय वर्ष 2027 में अपनी प्लैटिनम जुबली की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में यह आयोजन उसकी गौरवशाली विरासत और भविष्य की दिशा दोनों को रेखांकित करता नजर आया।

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