जयपुर । डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारतीय रेल का महत्वाकांक्षी और महत्वपूर्ण और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य मालगाड़ियों के लिए तेज, सुरक्षित और उच्च क्षमता वाला डेडिकेटेड रेल नेटवर्क उपलब्ध कराना है।
इससे माल परिवहन की गति और दक्षता बढ़ने के साथ मौजूदा रेल मार्गों पर यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो रही है, जिससे यात्री ट्रेनों के समयपालन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की स्थापना से औद्योगिक विकास को नई गति मिलने के साथ-साथ यात्रा अनुभव भी बेहतर हुआ है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से लंबी दूरी के माल परिवहन त्वरित गति से परिवहन करने में मदद मिल रही है, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत, परिवहन समय और ग्राहकों को समान की समयबद्ध डिलीवरी प्राप्त होने में सहायता मिल रही है।
इसके साथ ही पर्यावरण अनुकूल रेल संचालन की दिशा को मजबूती प्रदान करने की दिशा में इलेक्ट्रीक ट्रेक्शन पर संचालन से ईंधन की बचत और कार्बन उत्सर्जन में कमी के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।
देश के विभिन्न स्थानों पर विकसित किए गए गति शक्ति कार्गो टर्मिनल, लॉजिस्टिक्स पार्क और मल्टीमॉडल परिवहन सुविधाओं के विकास से उद्योग, व्यापार, रोजगार और निवेश को नई गति मिल रही है और स्थानीय स्तर पर विभिन्न तरह के नए-नए रोजगार के अवसर सृजित हो रहे है।
राजस्थान सहित पूरे देश के आर्थिक एवं औद्योगिक विकास में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।राजस्थान से होकर गुजरने वाले रेवाड़ी से पालनपुर मार्ग पर लगभग 567 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर राज्य के औद्योगिक एवं आर्थिक विकास के लिए विशेष महत्व रखता है।
यह देश में किसी भी राज्य से होकर गुजरने वाला फ्रेट कॉरिडोर का सबसे लंबा खंड है।
इसके माध्यम से जयपुर, अजमेर, पाली और जोधपुर सहित राज्य के मेन्युफेक्चरिंग सेक्टर, कपड़ा, सिरेमिक, मार्बल तथा अन्य औद्योगिक समूहों को तेज, विश्वसनीय एवं उच्च क्षमता वाली पर्यावरण अनुकूल माल परिवहन सुविधा प्राप्त हो रही है।भारत के माल परिवहन सिस्टम में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में उभर रहा है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क देश के प्रमुख औद्योगिक, मेन्युफेक्चरिंग एवं लॉजिस्टिक्स केंद्रों को उच्च क्षमता, तेज, सुरक्षित और विश्वसनीय रेल कनेक्टिविटी उपलब्ध करा रहा है।देश में 1,337 किलोमीटर लंबा ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो पंजाब के न्यू सहनेवाल से बिहार के न्यू सोननगर तक तथा 1,506 किलोमीटर लंबा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, जो उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
इन नेटवर्क से देश के विभिन्न स्थानों सहित समुद्री बंदरगाहो तक औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्रों की कनेक्टिविटी और मजबूत हुई है।बजट 2026-27 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर परियोजना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से नए डानकुनि (पश्चिम बंगाल) से सूरत (गुजरात) तक 2,052 किलोमीटर मार्ग के डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है।
यह कॉरिडोर इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती तथा क्षमता को और अधिक सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा।डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का प्रमुख उद्देश्य मालगाड़ियों के संचालन को यात्री ट्रेनों के लिए अधिक व्यस्त मौजूदा रेल मार्गों से अलग करना है।
इससे माल परिवहन के लिए अतिरिक्त क्षमता और परिचालन में सुगम रेल मार्ग उपलब्ध हो है।
साथ ही, मौजूदा भारतीय रेल नेटवर्क पर यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से कोचिंग ट्रेनों की समयपालनता में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण लाभ प्राप्त हो रहा है।डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क का विस्तार एवं पूर्ण परिचालन भारत के लिए एक नई शुरुआत है, जो समर्पित माल रेल परिवहन को देश की मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, औद्योगिक विकास और दीर्घकालिक आर्थिक प्रगति का अभिन्न हिस्सा बना रहा है।
विशेष रूप से राजस्थान जैसे राज्यों के लिए यह नेटवर्क उद्योग, व्यापार, निर्यात, रोजगार और निवेश को नई गति देने वाला महत्वपूर्ण आधारभूत ढांचा साबित हो रहा है।